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वर्ष 1980 के बाद वैश्विक स्तर पर लोकतन्त्र के विस्तार को स्पष्ट कीजिए।

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वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र के विस्तार का अगला पड़ाव वर्ष 1980 के बाद और विशेष रूप से 1991 ई. में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् शुरू हुआ। सन् 1980 में पोलैण्ड (Poland) पर पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी (Polish United Workers Party) का शासन था। यह पार्टी उन साम्यवादी दलों में से एक थी जो तब पूर्वी यूरोप के अनेक देशों पर शासन करते थे। इन देशों में किसी अन्य राजनीतिक दल को राजनीति में भाग लेने की अनुमति नहीं थी। लोग साम्यवादी दल के या शासन के पदाधिकारियों का चुनाव आजाद ढंग से नहीं कर सकते थे। नेताओं, पार्टी या सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल में डाल दिया जाता था। पोलैण्ड की सरकार को एक बड़े साम्यवादी देश, सोवियत संघ का समर्थन हासिल था और वही इस पर नियंत्रण भी करता था।

पोलैण्ड के ग्लांस्क शहर स्थित ‘लेनिन जहाज कारखाना’ के मजदूरों ने 14 अगस्त, 1980 ई. को हड़ताल कर दी। उस समय पोलैण्ड के अधिकांश कारखाने सरकारी नियंत्रण में थे। ‘लेनिन जहाज कारखाना’ भी सरकारी नियंत्रण में था। एक महिला क्रेन चालक को गलत ढंग से नौकरी से निकाला जाना हड़ताल का तात्कालिक कारण था। हड़तालियों की माँग थी कि इस महिला को काम पर वापस लिया जाए। कानून के अनुसार हड़ताल की इजाजत नहीं थी क्योंकि देश में शासक दल से अलग किसी स्वतन्त्र मजदूर संघ की अनुमति नहीं थी।

हड़ताल जारी रही और फिर पहले काम से निकाला गया एक इलेक्ट्रिशियन बंदरगाह की दीवार लांघकर अन्दर पहुँचा और हड़ताली कर्मचारियों के संग हो लिया। इस आदमी का नाम था लेक वालेशा और बहुत जल्दी ही, यह हड़ताली कर्मचारियों का नेता बन गया। हड़ताल का समर्थन बढ़ता गया और जल्दी ही यह पूरे शहर में फैल गई। अब मजदूरों ने ज्यादा बड़ी माँगें करनी शुरू कर दीं। उन्होंने स्वतंत्र मजदूर संध बनाने की माँग की। उन्होंने यह भी माँग की कि राजनैतिक बन्दियों को रिहा किया जाए और प्रेस पर लगी सेंसरशिप हटाई जाए।

आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता के कारण सरकार को झुकना पड़ा। लेक वालेशा के नेतृत्व में मजदूरों ने सरकार के साथ 21 सूत्रीय समझौता किया और हड़ताल समाप्त हुई। डांस्क संधि के बाद एक नया मजदूर संगठन ‘सोलिडरनोस्क’ (जिसका अंग्रेजी अर्थ होगा सोलिडेरिटी) बना। किसी भी साम्यवादी देश में पहली बार एक स्वतन्त्र मजदूर संघ का गठन हुआ। एक वर्ष के अन्दर ही सोलिडेरिटी का विस्तार पूरे देश में हो गया और इसकी सदस्य संख्या एक करोड़ के करीब पहुँच गई। सन् 1989 में सरकार को विवश होकर लेक वालेशा के साथ एक और समझौता करना पड़ा जिसके अनुसार स्वतंत्र चुनाव कराने की माँग मान ली गई। सोलिडेरिटी (Solidarity) ने सीनेट की सभी 100 सीटों के लिए चुनाव लड़ा और उसे 99 सीटों पर सफलता मिली। अक्टूबर, 1990 ई. में पोलैण्ड में राष्ट्रपति पद के लिए प्रथम बार चुनाव हुए जिसमें एक से अधिक ‘राजनैतिक दल भाग ले सकते थे। लेक वालेशा को पोलैण्ड का राष्ट्रपति चुन लिया गया और इस प्रकार पोलैण्ड एक लोकतंत्रीय राज्य बन गया।

भारत के पड़ोसी देशों में भी अनेक परिवर्तन घटित हुए। वर्ष 1990 में नेपाल और पाकिस्तान दोनों में लोकतंत्र की बहाली हुई। नेपाल के राजा ने अपने विशेषाधिकार एवं शक्तियों को काफी हद तक परित्याग कर दिया और वह संवैधानिक राजा बन गया। किन्तु ये परिवर्तन स्थायी नहीं रहे। पाकिस्तान और नेपाल में पुनः तानाशाही की स्थापना हो गयी। लेकिन इस कालखण्ड में अनेक देशों में लोकतन्त्र की स्थापना हुई। सन् 2002 में विश्व के लगभग 140 देशों में बहुदलीय आधार पर लोकतांत्रिक चुनाव कराए जा रहे थे। लेकिन आज भी विश्व के अनेक देशों में लोगों को अपनी इच्छानुरूप लोकतांत्रिक सरकार चुनने तथा सार्वजनिक रूप से अपने विचार प्रकट करने की स्वतन्त्रता नहीं है। ऐसे देशों में संचार माध्यमों पर या सेंसर होता है या वे सरकार के नियंत्रण में होते हैं। उन्हें वही समाचार छापने या दिखाने होते हैं जिन्हें सरकार प्रदर्शित करना चाहती है।



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