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व्यक्तित्व को परिवार तथा वातावरण वैसे प्रभावित करता है? विवेचना कीजिए। अथवामनुष्य के व्यक्तित्व पर वातावरण किस प्रकार प्रभाव डालता है? अथवाऊध बालक के व्यक्तित्व के विकास में आनुवंशिकता तथा पर्यावरण का क्या महत्त्व है? अथवाबालक के यक्तित्व को प्रभावित करने वाले तत्व वौन-कौन अथवा व्यक्तित्व निर्माण में किन कारकों का योगदान होता है? |
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Answer» बालक के व्यक्तित्व निर्माण में आनुवंशिकता एवं पर्यावरण को प्रमुख योगदान होता है। आनुवंशिकता के अन्तर्गत वे समस्त कारक निहित होते हैं, जो बालक को अपने माता-पिता तथा पूर्वजों से प्राप्त होते हैं। बालक के शारीरिक गुण तथा अन्य विभिन्न जन्मजात गुण आनुशिकता से ही निघांरित होते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि बालक के व्यक्तित्व के विकास में आनुवंशिकता का विशेष महत्व होता है। पर्यावरण में आशय उन् समस्त बाहरी कारकों से है, जो जम के उपरान्त बालक के जीवन को प्रभावित करते हैं। ये कारण भी अनेक है तथा इनका बालक के ग्यक्तित्व के त्रिकास में अत्यधिक योगदान होता है। उत्तम पर्यावरण बालक के विकास में सहायक तथा प्रतिकूल पर्यावरण आधिक होता है। व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारक ऐसे अनेक कारक है, जो जातक के व्यक्तित्व निर्माण में प्रभाव डालते हैं। बालक के व्यक्तित्व पर प्रभाव टालने वाले तत्व निम्नलिखित हैं। 1. शारीरिक बनावट का प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तित्व पर उसके। आकार का प्रभाव जाने कारक पड़ता है। यह देखा जाता है कि गोल मटोल आदमो हास्यप्रिय, आरामपसन्द एवं सामाजिक होते हैं, जबकि दुबले-पतले। माता-पिता का प्रमा आदमी संयमी होते हैं। व्यक्ति। अपर आ सकतात ज भाव के शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान। आर्थिक स्तेि का प्रमा में रखते हुए। अन्य व्यक्ति। भी उसके प्रति अपने व्यवहार प्रतिमान का निर्धारण करते हैं। भव्य एवं आकर्षक शारीरिक गठन वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान क व्यवहार किया जाता है। 2. अन्त:स्रावी ग्रन्थियाँ ये प्रन्थियों अपना रस रक्त में छोड़ देती हैं एवं रक्त इसे सम्पूर्ण शरीर में ले जाता है। यदि ये प्रन्थियाँ पर्याप्त मात्रा में रक्त को अपना रस देना बन्द कर दें, तो शरीर, बुद्धि एवं भाव में परिवर्तन हो आता है। यदि पीयूष ग्रन्थि आदि अपना काम मन्द गति से करती है, तो व्यक्ति की। लम्बाई नहीं बढ़ती तथा वह बौना हो जाता है, यदि ये अन्य तीव्र गति से कार्य करती हैं, तो व्यक्ति या लम्या हो जाता है। 3. स्नायविक संगठन निरीक्षण द्वारा यह देखा गया है कि यदि जल्यावस्था में क्ति के मस्तिष्क को किसी प्रकार का आघात लगता है, तो उसके व्यक्तित्व में विभिन्न प्रकार के परिवर्तन आ जाते है। इसके साथ-साथ विशिष्ट प्रकार के स्नायविक संगठन का भी व्यक्तित्व पर उल्लेखनीय प्रभाव 4. माता-पिता का प्रभाव माता-पिता का भय बच्चों पर बहुत अधिक पड़ता है, जो माता-पिता कठोर स्वभाव के होते हैं एवं अपने बच्चों को अधिक प्यार नहीं करते, ऐसे बच्चों में अन्तर्मुखी प्रवृत्ति बढ़ जाती हैं। वे एकान्त में रहने लगते हैं तथा हमेशा कल्पनाशील रहते हैं, जो माता-पिता अपने बच्चों को अधिक प्यार करते हैं, उन बच्चों में आत्मनिर्भरता के गुणों का अभाव पाया जाता है, वे बच्चे परावलम्बी हो जाते हैं। इस प्रकार उपरोक्त दोनों प्रकार के बच्चों का व्यक्तित्व स्वाभाविक तथा सामान्य नहीं होता है। अत: माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों के प्रति किए गए आचरण में प्यार एवं नियन्त्रण का सन्तुलन बना रहे। 5. बालक के जन्म-क्रम का प्रभाव परिवार में बच्चा जब तक इकलौता रहता है, तो उसके अधिकार को छीनने वाला कोई नहीं होता और न कोई उसकी सुख-सुविधाओं में हिस्सा में आता है, इसलिए यह निर्दी हो जाता है। इससे भिन्न परिवार में सबसे छोटा बच्चा, बों परिवार में सभी का स्नेह प्राप्त करता है एवं उत्तरदायित्वों से मुक्त होता है, हमेशा सहायता के लिए दूसरे की और ही देखता है। 6. क्रीड़ा-समूह का व्यक्तित्व पर प्रभाव जब बच्चा चलने-फिरने योग्य हो आता है, तो वह अन्य बच्चों के साथ मिलता-जुलता है। खेलकूद के लिए बच्चों का एक क्लौड़ा समूह बन जाता है। में अपना अपना कार्य बाँट लेते हैं। कार्यों के आधार पर ही व्यक्तित्व का विकास होता हैं। 7. आर्थिक स्थिति का प्रमाण परिवार की आर्थिक स्क्यिति व्यक्तित्व विकास को प्रभवित करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। सामान्य रूप से यह देखा गया है। कि जे बालक आर्थिक अभाओं में पलते हैं, वे प्रायः अपराधी प्रवृत्ति के बन् आते हैं, जयके सम्पन्न परिवारों के बालकों का विकास सुचारु रूप से होता है। |
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