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Who answer it correctly I will mark him as brainlist and thank u and give five star rating and follow U Question is हिंदी गद्य साहित्य और पद्य साहित्य का इतिहास लिखिए। |
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Answer» हिंदी साहित्य का आधुनिक काल भारत के इतिहास के बदलते हुए स्वरूप से प्रभावित था। स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीयता की भावना का प्रभाव साहित्य में भी आया। भारत में औद्योगीकरण का प्रारंभ होने लगा था। आवागमन के साधनों का विकास हुआ। अंग्रेजी और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव बढा और जीवन में बदलाव आने लगा। ईश्वर के साथ साथ मानव को समान महत्व दिया गया। भावना के साथ-साथ विचारों को पर्याप्त प्रधानता मिली. पद्य के साथ-साथ गद्य का भी विकास हुआ और छापेखाने के आते ही साहित्य के संसार में एक नई क्रांति हुई.आधुनिक हिन्दी गद्य का विकास केवल हिन्दी भाषी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहा. 1 भारतेंदु पूर्व युग 1800 ईस्वी से 1850 ईस्वी तक2 भारतेंदु युग 1850 ईस्वी से 1900 ईस्वी तक3 द्विवेदी युग 1900 ईस्वी से 1920 ईस्वी तक4 रामचंद्र शुक्ल व प्रेमचंद युग 1920 ईस्वी से 1936 ईस्वी तक5 अद्यतन युग 1936 ईस्वी से आज तक १९वीं सदी से पहले का हिन्दी गद्यहिन्दी गद्य के उद्भव को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं| कुछ विद्वान हिन्दी गद्य की शुरूआत १९वीं सदी से ही मानते हैं जबकि कुछ अन्य हिन्दी गद्य की परम्परा को ११वीं-१२वीं सदी तक ले जाते हैं| आधुनिक काल से पूर्व हिन्दी गद्य की निम्न परम्पराएं मिलती हैं- १- राजस्थानी में हिन्दी गद्य २- ब्रजभाषा में हिन्दी गद्य ३- दक्खिनी में हिन्दी गद्य ४- गुरूमुखी लिपि में हिन्दी गद्य भारतेंदु पूर्व युगहिन्दी में गद्य का विकास 19वीं शताब्दी के आसपास हुआ. इस विकास में कलकत्ता के फोर्ट विलियम कॉलेज की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इस कॉलेज के दो विद्वानों लल्लूलाल जी तथा सदल मिश्र ने गिलक्राइस्ट के निर्देशन में क्रमशः प्रेमसागर तथा नासिकेतोपाख्यान नामक पुस्तकें तैयार कीं. इसी समय सदासुखलाल ने सुखसागर तथा मुंशी इंशा अल्ला खां ने 'रानी केतकी की कहानी' की रचना की इन सभी ग्रंथों की भाषा में उस समय प्रयोग में आनेवाली खडी बोली को स्थान मिला. ये सभी कृतियाँ सन् 1803 में रची गयी थीं.आधुनिक खडी बोली के गद्य के विकास में विभिन्न धर्मों की परिचयात्मक पुस्तकों का खूब सहयोग रहा जिसमें ईसाई धर्म का भी योगदान रहा. बंगाल के राजा राम मोहन राय ने 1815 ईस्वी में वेदांत सूत्र का हिन्दी अनुवाद प्रकाशित करवाया. इसके बाद उन्होंने 1829 में बंगदूत नामक पत्र हिन्दी में निकाला. इसके पहले ही 1826 में कानपुर के पं जुगल किशोर ने हिन्दी का पहला समाचार पत्र उदंतमार्तंड कलकत्ता से निकाला. इसी समय गुजराती भाषी आर्य समाज संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने अपना प्रसिध्द ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश हिन्दी में लिखा.भारतेंदु.भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) को हिन्दी-साहित्य के आधुनिक युग का प्रतिनिधि माना जाता है.पण्डित महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर ही इस युग का नाम द्विवेदी युग रखा गया. सन 1903 ईस्वी में द्विवेदी जी ने सरस्वती पत्रिका के संपादन का भार रामचंद्र शुक्ल एवं प्रेमचंद युगगद्य के विकास में इस युग का विशेष महत्त्व है.पं रामचंद्र शुक्ल (1884-1941) ने निबंध, हिन्दी साहित्य के इतिहास और समालोचना के क्षेत्र में गंभीर लेखन कियाExplanation:here is ur answer mark me as a BRAIN list and 10thnx plz by #MUKTA cute girl .... |
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