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यात्रा के दौरान लेखक ने डाकुओं से अपनी रक्षा कैसे की ?

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अपनी तिब्बत यात्रा के दौरान लेखक डाँडे जैसी खतरनाक जगहों से गुजरे थे । इस जगह डाकुओं का खतरा रहता है । वे यात्रियों को मारकर उन्हें लूट लेते थे । जब कभी कोई खतरा लगता तो लेखक जो कि भिखमंगे के वेश में था, ‘कुची-कुची एक पैसा’ कहकर भीख मांगने लगते । यों डाकुओं को लगता कि यह भिखारी हैं इनके पास कुछ नहीं होगा । इस प्रकार लेखक डाकुओं से अपने आप को बचाते हैं ।



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