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‘यदि सच्ची राह पर हो तो तुम्हें क्रोध करने की जरूरत ही नहीं।’

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सच्चाई मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है। सच्चाई के सामने झूठ कभी नहीं टिक सकता। सच्ची राह पर चलनेवाला व्यक्ति निर्भीक होता है। उसे अपनी सच्चाई के सबूत के रूप में इधर-उधर की बेसिर-पैर की मनगढंत बातें जोड़नी नहीं पड़तीं। सच्ची राह पर चलनेवाले व्यक्ति को कितना भी उत्तेजित क्यों न किया जाए, वह अपना धैर्य कभी नहीं खोता।

इसका कारण यह है कि उसे यह पता होता है कि आखिरकार विजय उसके सच की ही होगी। सच्चाई की राह पर चलनेवाला व्यक्ति शांतिपूर्ण ढंग से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं महात्मा गांधी। वे देश को स्वतंत्र कराने का उद्देश्य लेकर सच्ची राह पर आगे बढ़े। उन पर अनेक प्रकार के अत्याचार हुए, पर उन्होंने कभी प्रतिक्रिया में कभी क्रोध नहीं किया। वे शांतिपूर्ण ढंग से निष्ठापूर्वक सच्चाई के मार्ग पर चलते रहे और एक दिन अपने उद्देश्य में सफल हुए। उन्होंने देश को आज़ाद करा कर ही दम लिया।



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