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‘युग और मैं’ कविता का संदेश लिखिए। |
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Answer» ‘युग और मैं’ कविता में कवि ने संसार की स्थिति के संदर्भ में अपनी स्थिति देखी है। कवि कहता है कि प्रायः मनुष्य अपनी मामूली पीड़ा को भी बड़ी मानने लगता है। उसे लगता है कि उसके अस्तित्व का कोई महत्त्व नहीं है। प्रस्तुत कविता के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि दुनिया की स्थिति देखकर मनुष्य को कभी हताश और निराश नहीं होना चाहिए। उसे आत्मविश्वासपूर्वक पूर्ण जीने का प्रयत्न करना चाहिए। |
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