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युवक ने अपना स्थान स्वयं कैसे बनाया?

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एक बादशाह रहता था । उसे एक अच्छे आदमी की ज़रूरत हुई । मंत्री जी ने उसके लिए एक युवक को लाया था । बादशाह ने उसे अपने कार्यालय के चपरासी पद दिया | महीने को 15 रुपये वेतन देने का निर्णय किया ।

उस युवक के लिए बादशाह की सेवा करने का अवकाश ही वेतन से बडा है । वह ईमानदारी से काम करता था । वह बादशाह के कार्यालय को लगातार काम करके शाही कार्यालय के रूप में बदल दिया।

कार्यालय में पडे हुए रद्दी लिफ़ाफ़ों को जड़े हुए रत्न तथा सोने की पच्चीकारियाँ बेचकर अच्छी फ़र्नीचर और चित्रादि लाकर कार्यालय को सजाया । बाकी रुपये खजाने में जमा कर दिया |

सारे मंत्री उनसे ईर्ष्या करने लगे | उसके बारे में बादशाह को ग़लत शिकायतें देने लगे | वह हर हमेशा ईमानदारी ठहरने लगा | इस बार युवक वित्तमंत्री बना ।

एक बार बादशाह ने सारे मंत्रियों को एक आधी रात को दो बजे को जैसे के वैसे अपने कमरे में लिवा लाया । तो कुछ मंत्री नशे में थे | कुछ चौपड़ खेल रहे थे । तो वित्तमंत्री कागज़ देख रहा था ।

उसे पूछने पर मालूम हुआ कि सिर्फ एक पैसा राज-कर के रूप में वसूल किये धन कमी है तो वह बार-बार देख रहा है । वह बादशाह के पैसे को इनकार करके कहा कि इसके लिए अधिकारियों को पूछताछ करना है । नहीं तो अधिकारियों में अलसत्व आजायेगा । इससे बादशाह उसकी प्रशंसा करके अपने प्रधानमंत्री पद पर नियुक्त किया । इस तरह युवक ने अपना स्थान स्वयं बना लिया।



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