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1.

समुद्रगुप्त की विजय यात्रा को मुख्य उद्देश्य क्या था?

Answer»

समुद्रगुप्त की विजय यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत में राष्ट्रीय एकता की स्थापना करना था।

2.

समुद्रगुप्त की शासन व्यवस्था का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Answer»

समुद्रगुप्त की शासन व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि उसके लगभग पचास वर्ष के शासनकाल में किसी भी क्षेत्र में न अशान्ति हुई और न किसी ने साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने का साहस किया। उस समय उत्तर भारत में सती प्रथा का प्रचलन था। समुद्रगुप्त ने न केवल इस सती प्रथा को समाप्त किया वरन् महिलाओं की मर्यादा और प्रतिष्ठा को भी यथोचित महत्त्व प्रदान किया। उस समय खेती और व्यापार उन्नत दशा में थे। भारत-भूमि धन-धान्य से परिपूर्ण थी।

3.

समुद्रगुप्त की विजय का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

Answer»

समुद्रगुप्त ने भारत की राष्ट्रीय एकता की स्थापना हेतु विजय यात्रा प्रारम्भ की। उसने उत्तर भारत के राजाओं को परास्त किया और उनके राज्यों को अपने साम्राज्य में मिला लिया। उसके साहस और पौरुष की चारों ओर चर्चा होने लगी। अपनी सेना का संचालन वह स्वयं करता था और एक सैनिक की भाँति युद्ध में भाग लेता था। धीरे-धीरे उसने पूर्व में, बंगाल तक अपना राज्ये फैलाया। पूर्वी तट के द्वीपों पर आक्रमण के लिए उसने नौ सेना का गठन किया।

4.

समुद्रगुप्त के शासन काल को स्वर्णयुग क्यों कहा जाता है?

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समुद्रगुप्त शासन के संचालन में सद्व्यवहार, न्याय, समता और लोक-कल्याण पर अधिक ध्यान देता था। उस समय खेती और व्यापार उन्नत दशा में थे। नहरों एवं सड़कों का जाल सा बिछा था। भारत-भूति धन धान्य से परिपूर्ण थी। पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता थी। समुद्रगुप्त की उदारता की प्रशंसा बौद्ध भिक्षु भी करते थे। अतः समुद्रगुप्त के शासनकाल को स्वर्ण युग कहा जाता है।

5.

अश्वमेध यज्ञ किसे कहते हैं? इस अवसर पर समुद्रगुप्त को क्या उपाधि दी गयी थी?

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अश्वमेध यज्ञ में एक घोड़ा छोड़ा जाता था और सेना उसके पीछे चलती थी। यदि कोई घोड़ा पकड़ लेता था तो राजा उससे युद्ध करता था अन्यथा जब घोड़ा विभिन्न राज्यों की सीमाओं से होकर वापस आता था तब यह यज्ञ पूर्ण माना जाता था और राजा दिग्विजयी समझा जाता था। इसे ही अश्वमेध यज्ञ कहते हैं। इस अवसर पर समुद्रगुप्त को ‘महाराजाधिराज’ की उपाधि दी गई थी।

6.

समुद्रगुप्त कौन था?

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समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त प्रथम का पुत्र था।

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