Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

औद्योगीकरण और नगरीकरण का परस्पर संबंध है। विचार करें।

Answer»

औद्योगीकरण का संबंध यांत्रिक उत्पादन के उदय से है, जो शक्ति के गैरमानवीय संसाधन; जैसे-वाष्प या विद्युत पर निर्भर होता है।

⦁    औद्योगिक समाज की एक प्रमुख विशेषता है। कि लोग कृषि के बजाय अधिक संख्या में कारखानों, ऑफ़िसों और दुकानों में काम करते हैं।

⦁    90 प्रतिशत से भी अधिक लोग कस्बों और शहरों में रहते हैं, क्योंकि वहीं पर रोजगार तथा व्यवसाय के अधिक अवसर होते हैं। ब्रिटेन का समाज औद्योगीकरण से गुजरने वाला पहला समाज था। अतः सबसे पहले ग्रामीण से रूपांतरित होकर नगरीय देश बना।

⦁    ब्रिटिश शासन काल के दौरान कुछ क्षेत्रों में औद्योगीकरण के कारण पुराने नगरीय केंद्रों का क्षरण हुआ।

⦁    उपनिवेशी शासन काल के दौरान पुराने नगरीय केंद्रों का क्षरण हुआ तथा नए उपनिवेशवादी नगर बस गए। उदाहरणार्थ, सूरत तथा मसुलीपट्नम ने अपना आकर्षण खो दिया तथा मुंबई तथा चेन्नई महत्त्वपूर्ण शहर बनकर उभरे।

⦁    जब ब्रिटेन में निर्माण क्षेत्रों में तेजी आई हुई थी, तब भारत के परंपरागत, निर्यातक वस्तुओं रेशम तथा कपास के उत्पादन तथा निर्यात में गिरावटआई क्योंकि ये ‘मैनचेस्टर’ की प्रतियोगिता नहीं कर सकते थे।

⦁    उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में, भारत के कुछ शहरों में औद्योगीकरण के कारण उनकी जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई।

⦁    पूर्वी भारत के उन क्षेत्रों के अतिरिक्त यहाँ ब्रिटिश का आगमन जल्दी तथा सघन था, दूसरे क्षेत्र अधिक समय तक इससे अप्रभावित रहे। *उदाहरणार्थ-सुदूर गाँवों की ग्रामीण शिल्पकला इससे काफी समय तक अप्रभावित रही। इन पर प्रभाव तभी पड़ा जब रेलवे का विस्तार हुआ। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने औद्योगीकरण के संरक्षण तथा संवर्द्धन के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए।

⦁    उदारीकरण की वर्तमान नीति के कारण शहरो का तीव्र विकास हुआ है।

2.

उपनिवेशवाद का हमारे जीवन पर किस प्रकार का प्रभाव पड़ा है? आप या तो किसी एक पक्ष जैसे संस्कृति या राजनीति को केंद्र में रखकर, या सारे पक्षों को जोड़कर विश्लेषण कर सकते हैं?

Answer»

⦁    ब्रिटिश उपनिवेशवाद जो कि पूँजीवाद पर आधारित था, ने सीधे तौर पर निजी लाभ तथा ब्रिटिश पूँजीवाद के हितों पर अपना ध्यान केंद्रित किया।

⦁    जो भी नीतियाँ बनाई गईं, उनका उद्देश्य ब्रिटिश पूँजीवाद को विस्तारित तथा मजबूत करना था।

⦁    उसने कृषिगत भूमि के नियमों में भी बदलाव किए

(क) इसने न केवल भूमि के स्वामित्व में बदलाव किए, बल्कि इस नीति ने यह भी निर्धारित किया कि कौन-सी फसल का उत्पादन किया जाना चाहिए तथा किसका नहीं?

(ख) इन नीतियों ने वस्तुओं के उत्पादन तथा वितरण की पद्धति में भी बदलाव किए।

(ग) इसने विनिर्माण क्षेत्रों में भी हस्तक्षेप किया।

(घ) इसने जंगलों पर नियंत्रण करके पेड़ों का सफाया कर वहाँ बगान लगाना प्रारंभ कर दिया।

(ङ) उपनिवेशवाद ने वन अधिनियम लागू किया। इसके कारण जनजातियों तथा चरवाहों के जीवन में बदलाव आया।

(च) इसने लोगों को भारत के एक भाग से दूसरे भाग तक आने-जाने को भी सुगम बनाया। इस कारण लोगों में जागरूकता बढी तथा ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरुद्ध असंतोष और मुखर हुआ।
उपनिवेशवाद ने हमारे सांस्कृतिक तथा राजनीतिक जीवन को काफी प्रभावित किया तथा कमोवेश इसे एक-दूसरे के साथ मिलाने का भी काम किया। गतिशीलता तथा आधुनिक विचारधारा को अपनाने के कारण लोगों ने स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों के बारे में सोचना प्रारंभ किया। इसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की नींव को तैयार किया। उपनिवेशवाद का एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक प्रभाव भी था। जैसे कि भारतीय मध्यम वर्ग की जीवन शैली में परिवर्तन आया। इनके खानपान, भाषा तथा पहनावे में भी परिवर्तन आया।

उपनिवेशवाद का भारतीय समाज पर पड़ने वाला राजनीतिक प्रभाव बहुत ही गहरा था। इसने हमारे राष्ट्रीय आंदोलन, राजनीतिक पद्धति, संसदीय तथा विधिक पद्धति, संविधान, शिक्षा पद्धति तथा पुलिस यातायात के नियम तथा कुल मिलाकर पूरे राजनीतिक संरचना में उपनिवेशवाद के कारण बदलाव आए।

Previous Next