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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

कॉपर मैटी (matte) को सिलिका के अस्तर युक्त परिवर्तक में क्यों रखते हैं?

Answer» सिलिका युक्त परिवर्तक (बेसेमर परिवर्तक) में मैटो में उपस्थित शेष FeS को FeO में ऑक्सीकृत करने के लिए रखा जाता है, जो सिलिका के साथ संयोग कर संगलित धातुमल बनाता है।
`2FeS + 3 O_(2) to 2 FeO + 2 SO_(2)`
`FeO + SiO_(2) to underset("धातुमल")(FeSiO_(3))` विस्तृत जानकारी हेतु क्रपया पाठ्य देखे ।
2.

कॉपर के धातुकर्म में सिलिका के कार्य उल्लेखित कीजिए।

Answer» सिलिका द्रव्य में उपस्थित आयरन की अशुद्धियों को `FeSiO_(3)` के रूप में पृथक् कर देता है। विस्तृत जानकारी हेतु कृपया पाठ्य देखें।
3.

खनिज तथा अथस्क में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Answer» Correct Answer - कृपया पाठ्य देखें।
4.

क्रोमेटोग्राफी में स्थिर प्रावस्था के चयन के लिए किस आधार का प्रयोग किया जाता है?

Answer» स्थिर प्रावस्था इस प्रकार के पदार्थ की बनी होनी चाहिए, जो कि अशुद्धियों को अधिक प्रबलता से अधिशोषित करने में सक्षम हो। इससे तत्त्व का निर्गमन (elution) सुगमता से हो जाता है।
5.

निम्नलिखित विधियों के द्वारा धातुओ के शोधन के सिध्दान्त लिखिए - (i) मण्डल परिष्करण (ii) वेधतु शोधन (iii) वाष्प प्रावस्था शोधन

Answer» Correct Answer - कृपया पाठ्य देखें।
6.

सिलिका युक्त बॉक्साडट अथस्क में सिलिका से ऐल्थयुमिवा को खप किस प्रकार पृरथक् करेंगे? यदि कोई अभिकिया हो, तो लिखिए ।

Answer» बेचर को जिधि सरपेक की विधि कृपया पाढ्य देखे।
7.

समझाइए- (i) मण्डल परिष्करण, (ii) कॉलम क्रोमेटोग्राफी

Answer» Correct Answer - कृपया पाठ्य देखें।
8.

अयस्क में सिलिका की अशुद्धि उपस्थित होने पर गालक के रूप में किस पदार्थ का प्रयोग किया जाता है?

Answer» Correct Answer - चूना
9.

पायराइट अयस्क से कॉपर का निष्कर्षण अपचयन द्वारा इसके हता ऑक्साइड अयस्क से निष्कर्षण की तुलना में अधिक कठिन होता है। क्यों ?

Answer» पायराइट अयस्क में कॉपर `Cu_(2)S` के रूप में विद्यमान रहता है। `Cu_(2)S` के निर्माण की मानक मुक्त ऊर्जा `(Delta_(f),G^(@)), CS_(2)` तथा `H_(2)S` से अधिक होती है, जोकि ऊष्माशोषी यौगिक है। इसलिए कार्बन या `H_(2)`, का प्रयोग `Cu_(2)O` को Cu धातु में अपचयित करने के लिए नहीं किया जा सकता है। इसके विपरीत `CupO के AG° का मान CO, से बहुत कम होता है। का
10.

अयस्क के शोधन के लिए प्रयुक्त फेन प्लवन विधि में अयस्क के कण तैरते हैं क्योंकि-A. ये हल्के होता हैB. इनकी सतह जलविरोधी होता है अर्थात जल के द्वारा सरलता से भीगती नहीं हैC. इन पर वेधतु स्थैतिक आवेश होता हैD. ये अविलेय होता है

Answer» Correct Answer - B
11.

निम्नलिखित में से किस अयस्क का भर्जन धातु प्राप्त करने के लिए किया जाता है?A. बॉक्साइडB. कॉपर पायराइडC. आयरन पायराइडD. हार्न सिल्वर ।

Answer» Correct Answer - B::C
12.

किसी घातु के अयस्क में `P_(2),0_(2)`, अशुद्धि के रूप में है। इसके लिए उपयुक्त गालक है-A. `SiO_(3)`B. CaOC. `B_(2)O_(3)`D. `PbO`

Answer» Correct Answer - C::D
13.

किसी परिस्थिति विशेष में अपचायक का चयन ऊष्मागतिकीय कारक पर निर्भर करता है। आप इस कथन से कितने सहमत हैं? अपने विचार की उपयुक्त उदाहरणों की सहायता से पुष्टि कीजिए।

Answer» (a) संयुक्त अवस्था में, (b) संयुक्त तथा मुक्त अवस्था दोनों (c) सामान्यत: मुक्त अवस्था में।
14.

उस प्रक्रिया का नाम लिखिए जिससे क्लोरीन सह - उत्पाद के रूप में प्राप्त है । क्या होगा जब NaCl के जलीय विलय का वैधतु अपघटन किया जाता है ?

Answer» डाउन प्रक्रिया में गलित NaCl के वेद्युत अपघटन के फलस्वरूप सह-उत्पाद के रूप में क्लोरीन प्राप्त होती है।
`NaCl("fused") to Na^(+) + Cl^(-)`
केथोड पर - `Na^(+)+ e^(-) to Na(s)`
एनोड पर - `Cl^(-) - e^(-) to (1)/(2)Cl_(2)(g)`
जब NaCl के जलीय विलयन का विधुत अपघटन किया जाता है तो केथोड पर `H_(2)` गैस तथा एनोड पर `Cl_(2)` गैस प्राप्त होता है। NaOH का एक जलीय विलयन सह - उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है|
`NaCl(aq) to Na^(+)(aq) + Cl^(-) (aq)`
एनोड पर `Cl^(-) (aq) - e^(-) to (1)/(2)Cl_(2)(g)`
केथोड पर - `2H_(2)O(l) +2e^(-) to 2OH^(-)(aq) + H_(2)(g)`
15.

`Cr_(2)O_(3)`के निर्माण के लिए `Delta_(f)G^(@)` का मान `-540 KJ mol^(-1)` होता है तथा `Al_(2)O_(3)` का होता है । क्या AI के द्वारा `Cr_(2)O_(3)` का अपचयन सम्भव है ?

Answer» हांँ, AI के द्वारा `Cr_(2)O_(3)` का अपचयन सम्भव है। इसको निम्न प्रकार समझा जा सकता है-
इस प्रक्रिया में निहित अभिक्रियाएँ निम्न हैं-
`2 Al(s) + (3)/(2)O_(2)(g) to Al_(2)O_(3) (s), Delta_(f)G^(@) = - 827 KJ mol^(-1)" "......(i)`
`2cr(s) + (3)/(2)O_(2)(g) to Cr_(2)O_(3) to Cr_(2)O_(3)(s) , Delta_(f)G^(@) = - 540 kJ mol^(-1)" ".....(ii)`
समी० (1) में से समी० (ii ) को घटाने पर,
`2Al(s) + Cr_(2)O_(3) (s) to Al_(2)O_(3) + 2Cr(s), Delta_(r)G^(@) = - 827 - (-540) = - 287 kJ mol^(-1) " ".....(iii)`
चूंकि संयुक्त रिडॉक्स अभिक्रिया के लिए `Delta_(r)G^(@)` का मान ऋणात्मक है इसलिए प्रक्रिया सम्भाव्य है अर्थात् AI के द्वारा `Cr_(2)O_(3)` का अपचयन सम्भव है।
16.

ZnO के लिए C तथा CO में से कौंन -सा अच्छा अपचायक है ?

Answer» का्बन CO से अधिक अच्छा अपचायक है, इसको निम्न प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है-
एलिंघम चित्र (चित्र 6.7) में C, CO वक्र Zn, ZnO वक्र से 1120 K से अधिक ताप पर नीचे स्थित तथा C, CO वक्र 1323 K से अधिक ताप पर नीचे स्थित है। इस प्रकार, C से CO के लिए `Delta_(f)G^(@)` का मान तथा C , `CO_(2)` , के लिए `Delta_(f)G^(@)` के मान क्रमशः 1120 K तथा 1323 K पर C से ZnO के लिए `Delta_(f)G^(@)` के मान से कम है। जबकि CO, `CO_(2)` वक्र Zn, ZnO वक्र से 2273 K पर भी ऊपर है। इसलिए ZnO को C के द्वारा अपचयित किया जा सकता है परन्तु CO के द्वारा नहीं। इसलिए C व CO में से ZnO के अपचयन के लिए C अधिक अच्छा अपचायक है।
17.

विद्युत अपघटनी प्रक्रम द्वारा सामान्यतः कौन-सी धातुएँ निष्कर्षित की जाती हैं? आवर्त-सारणी में इन धातुओं की स्थिति क्या है?

Answer» 983 K से कम ताप पर। CO, C की अपेक्षा शीघ्रता से `CO_(2)`, में ऑक्सीकृत हो जाती है। अत: 983 K से कम ताप पर CO अधिक प्रभावी अपचायक है। 983 K से उच्च ताप पर CO का `CO_(2)` में ऑक्सीकरण C के CO में ऑक्सीकरण की अपेक्षा कम अनुकूल होता है। अत: 983 K से उच्च ताप पर C अधिक प्रभावी अपचायक है।
18.

निम्न ग्रेड कॉपर अयस्कों का निक्षारण (leaching) किस प्रकार किया जाता है?

Answer» निम्न ग्रेड कॉपर अयस्क का निक्षारण वायु या जीवाणुओं की उपस्थिति में अम्ल के साथ क्रिया करके किया जाता है। इस प्रक्रिया में कॉपर `Cu^(@)` आयनों के रूप में विलयन में चला जाता है।
19.

कॉपर को होडड्रोमैटेलर्जी के द्वारा निष्कर्षित किया जा सकता है परन्तु जिंक को नहीं। स्पष्ट कीजिए।

Answer» `Zn (E_(zn^(2+)//Zn)^(@) = - 0. 76 V), Cu (E_(cu^(2+)//cu)^(@) = 0.34V)` से अधिक क्रियाशील होता है। कॉपर आयनों के विलयन से `Cu^(2+)` आयनों को Zn के द्वारा आसानी से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
`Zn(s) + Cu^(2+)(aq) to Zn^(2+)(aq) + Cu(s)`
इस प्रकार, कॉपर को हाइड्रोमैटेलर्जी के द्वारा निष्कर्षित किया जा सकता है। परन्तु जिंक को अधिक क्रियाशील होने के कारण `Zn^(@)` युक्त विलयन से सरलता से विस्थापित नहीं किया जा सकता है। इसका कारण है कि जिंक से अधिक क्रियाशील धातुएँ, जैसे-ऐल्युमीनियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम इत्यादि जल से क्रिया करती हैं। इसलिए जिंक को हाइड्रोमैटेलजी के द्वारा निष्कर्षित नहीं किया जा सकता है।
20.

निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया में निस्तापन नहीं होता है?A. `CaCO_(3) to CaO + CO_(2)`B. `2FeS + 3O_(2) to Fe_(2)O_(3) + 2SO_(2)`C. `Fe_(2)O_(3). 3H_(2)O to Fe_(2)O_(3) + 2SO_(2)`D. `CuCO_(3) . Cu(OH)_(2) to 2CuO+H_(2) O + CO_(2)`

Answer» Correct Answer - A::D
21.

उन धातुओं के नाम लिखिए, जो अपने अयस्कों से निष्कर्षण निम्नलिखित शब्दावली से सम्बन्धित हैं-

Answer» सक्रिय धातुएँ, जैसे-Na, Mg, Al आदि का निष्कर्षण विद्युत- अपघटनी प्रक्रम द्वारा किया जाता है। इन धातुओं को सामान्य रासायनिक विधियों द्वारा निष्कर्षित नहीं किया जा सकता। केवल कुछ धातुओं को छोड़कर, इनमें से अधिकांश आवर्त-सारणी के p-ब्लॉक में उपस्थित हैं।
22.

अयस्कों के सान्द्रण के लिए प्रयुक्त गुरुत्वीय पृथक्करण प्रक्रम का विस्तृत वर्णन कीजिए।

Answer» यह कथन सत्य है। वे खनिज जिनसे धातु कम खर्च में अधिक मात्रा में प्राप्त होती है,
23.

निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?A. लेवीगेशन का प्रयोग सामान्यत: ऑक्साइड अयस्कों के निष्कर्षणके लिए किया जाता हैB. हेमेटाइट साधारणत: फेन प्लवन विधि के द्वारा सान्द्रित किया जाता हैC. फेन प्लवन विधि में प्रयुक्त ऐथिल जैन्येट फेन उत्पन्न करने वाले पदार्थ के रूप में कार्य करता हैD. निक्षालन एक रासायनिक विधि है।

Answer» Correct Answer - C
24.

बॉक्साइट अयस्क के सान्द्रण के लिए प्रयुक्त प्रक्रम का नाम लिखिए तथा प्रक्रम का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

Answer» NaOH के साथ निक्षालन। (विस्तृत वर्णन के लिए अध्याय देखें)।
25.

उन धातुओं के नाम बताइए, जो निम्नलिखित अयस्क बनाती हैं- (a) बॉक्साइट (b) गैलेना (c ) जिप्सम (d) कैलामाइन

Answer» (a) Al, (b) Pb (c ) Ca, (d) Zn
26.

बॉक्साइट (जोकि ऐल्युमीनियम का एक अयस्क है) है एक -A. सल्फाइड अयस्कB. कार्बनेट अयस्कC. ऑक्साइड अयस्कD. हैलाइड अयस्क

Answer» Correct Answer - C
27.

शोधन की कौन-सी विधि निम्नलिखित समीकरण के द्वारा व्यक्त होती है? `TI + 2I_(2) overset(773K)to TiI_(4) overset(1675K)to TI +2I_(2)`A. क्यूपलेशनB. पोलिंगC. वान आरकेलD. मण्डल परिष्करण

Answer» Correct Answer - A
28.

आयरन के निष्कर्षण में प्रयुक्त वात्या भट्टी के विभिन्न भागो में होने वाली अभिक्रियाओं को लिखिए।

Answer» Correct Answer - कृपया पाठ्य देखें।
29.

ताँबे के धातुकर्म में कौन-सा निष्कर्षण प्रक्रम प्रयुक्त होता है?

Answer» स्वत : अपचयन प्रक्रम
30.

अत्यधिक शुद्ध सिलिकॉन को प्राप्त करने के लिए किस प्रक्रम को प्रयोग में लाया जाता है?

Answer» Correct Answer - क्षेत्र परिष्करण
31.

`710^(@)C` पर C तथा CO में से कोन-सा अधिक प्रबल अपचायक है?

Answer» `CO, 850^(@)C` से उच्च ताप पर ही कार्बन एक अच्छे अपचायक के रूप में कार्य करता है।
32.

देश के किस भाग में प्रचुर मात्रा में खनिज उपलब्ध हैं?

Answer» Correct Answer - बिहार
33.

किस प्रकार के अयस्कों का सामान्यत: निस्तापन (calcinati) किया जाता है?

Answer» Correct Answer - कार्बेनेट अयस्क
34.

क्या यह सत्य है कि उपयुक्त परिस्थितियों में Mg, `SiO_(2)`, को अपचयित कर सकता है जबकि Si, MgO को अपचयित कर सकता है?

Answer» हॉँ, Mg 1773 K से कम ताप पर `SiO_(2)`, को अपचयित कर सकता है। सिलिकॉन 1773 K से उच्च ताप पर MgO को अपचयित कर सकता है।
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