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बालक की शिक्षा में समुदाय के योगदान का उल्लेख कीजिए।

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बालक की शिक्षा में समुदाय का योगदान
(Contribution of Community in Child’s Education)

परिवार और विद्यालय के समान समुदाय भी शिक्षा का महत्त्वपूर्ण अभिकरण है। समुदाय बालक के व्यवहार को इस भाँति रूपान्तरित करता है ताकि वह उस समूह के कार्यों में सक्रिय भाग ले सके, जिसका कि वह सदस्य है। बालक समुदाय से औपचारिक तथा अनौपचारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा प्राप्त करता है। व्यापक अर्थ में शिक्षा आजन्म चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके अन्तर्गत बालक अनौपचारिक तथा स्वाभाविक रूप से प्रत्येक क्षण अपने सामुदायिक जीवन से कुछ-न-कुछ सीखता रहता है। जॉन डीवी का मत है, “विद्यालय को समाज का वास्तविक प्रतिनिधि होना चाहिए।’ विद्यालय शिक्षा की एक औपचारिक संस्था है, जिसकी स्थापना समाज या समुदाय करता है। अत: विद्यालय पर समुदाय का प्रभाव पड़ता ही है। इसी तरह से समुदाय भी विद्यालय शिक्षा के उद्देश्य निर्धारित करने में योगदान देता है।

बालक के व्यक्तित्व के विकास पर समुदाय का गहरा असर पड़ता है। बालक की संस्कृति, आचरण, रहन-सहन, बोलचाल, स्वभाव, विचारों तथा आदतों के निर्माण में भी समुदाय का परोक्ष, प्रभावशाली एवं महत्त्वपूर्ण योगदान है। बालक की अनुकरण करने की जन्मजात प्रवृत्तियों पर समुदाय के वातावरण का विशेष प्रभाव पड़ता है। प्रायः बालक वैसा ही बनता है जैसा कि समुदाय का नेतृत्व उसे बनने की प्रेरणा देता है। सामुदायिक संगति का गहरा और व्यापक असर होता है। प्राय: देखने में आता है कि कलाकार के साथ रहने वाला बालक उसकी कला से प्रभावित हो जाता है और विशिष्ट कला में रुचि रखने लगता है। इसके अतिरिक्त, धार्मिक, सामाजिक, नागरिक एवं शैक्षिक संस्थाएँ; जैसे-विद्यालय, समाज सेवी तथा राजनीतिक दल, समाचार-पत्र, पुलिस, यात्राएँ, घर, पास-पड़ोस तथा क्रीड़ा-स्थल आदि सामुदायिक इकाइयाँ भी बालक की शिक्षा और उसके सर्वांगीण विकास में भूमिका निभाती हैं। स्पष्टतः बालक की शिक्षा में समुदाय का अभीष्ट योगदान रहता है।



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