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बतुकम्मा और अट्ला तद्दी त्यौहार कैसे मनाये जाते हैं?

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बतुकम्मा और अट्ला तद्दी दोनों गौरी पूजा के ही त्यौहार हैं। ये त्यौहार औरतें और लडकियाँ बडी’ श्रद्धा से मनाती हैं | बतुकम्मा को गौरी माँ का रूप मानकर औरतें विविध फूलों से थालियों में पिरामिड जैसी एक आकृति बनाती हैं। बीच में गौरी माँ को बिठाती हैं । उन फूलों से सजी थालियों को एक जगह रखकर उनके चारों ओर गीत गाती घूमती हैं। औरतें और लडकियाँ तालियाँ बजाती घूमती है । दसवें दिन गौरी माँ की पूजा करके नदी में या कुएँ में विसर्जन करती हैं। अट्ला तद्दी के दिन औरतें और अविवाहित लडकियाँ बगीचों में जाती हैं। वहाँ अट्लु बनाकर खाती हैं । झूला झूलती हैं । इस प्रकार ये त्यौहार मनाकर औरतें अपने सौभाग्य की रक्षा करने की विनती माँ से करती हैं।



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