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डार्विन के चयन सिद्धांत के परिप्रेश्य में जीवणुओं में देखे गए प्रतिजैविक प्रतिरोध का स्पष्टी कारण कीजिये|

Answer» डार्विन के चयन सिद्धांत के अनुसार, प्राणी अपने को वातावरण के अनुकूल बनाकर ही जीवित रहते हैं तथा संतान उत्पन्न करते हैं इसके विपरीत, जो जीव अपने को वातावरण के अनुकूल बनाने में असमर्थ होते हैं नष्ट हो जाते हैं|
संक्रामक रोगों के उपचार के लिए ऐसी ओशोदियों का प्रयोग किया जाता हैं जो रोगजनक जीवाणुओं की वृद्धि रोक दे अथवा उन्हें मार डालें| इन औषिधियों में प्रतिजैविकों (antibiotics) का काफी प्रयोग किया जाता हैं| पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन, ओरियोमैकिन आदि कुछ प्रमुख जैविकों के उदाहरण हैं|
काफी समय तह यह समझा जाता रहा की प्रतिजैविकों कुछ समय पूर्व किसी रोगजनक पर नियंतरण कर सकते थे, वे अब निर्थक हो गए हैं| इन प्रतिजैविकों का रोजनक जीवाणुओं पर कोई विशेष पराभव नहीं पड़ता| दूसरे शब्दों में, ये जीवाणु प्रतिजैविकों के लिए प्रतिरोधी हो गए हैं|


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