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गहने कविता का भावार्थ :

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1) सोने के गहने क्योंकर, माँ?
तकलीफ देते हैं, नहीं चाहिए, माँ!
रंगीन कपड़े क्योंकर, माँ?
मिट्टी में खेलने नहीं देते, माँ!

माँ से बेटी कहती है कि सोने के गहने क्यों चाहिए माँ? ये मुझे तकलीफ देते हैं, मुझे नहीं चाहिए। ये रंगीन कपड़े क्यों चाहिए माँ? ये मुझे मिट्टी में खेलने नहीं देते।

2) ताकि दिखाई दो सुंदर, बहुत ही सुंदर-यों कहती हो
सुंदर लगे किसको, कहो माँ?
देखनेवालों को लगता है सुंदर, देता है आनंद;
मगर मुझे बनता है बड़ा बंधन!

माँ ने बेटी से कहा – इसलिए कि तू सुंदर लगे और देखने वाले भी प्रसन्न हों। किसे माँ? देखने वालों को सुंदर लगे और मुझे आनंद मिले। माँ! इन्हें पहनने से मैं बन्धन में आ जाऊँगी।

3) मेरा यह बचपन, तुम्हारा मातृत्व
ये ही गहने हैं मेरे लिए, माँ;
मैं तुम्हारा गहना; तुम मेरा गहना;
फिर अन्य गहने क्यों चाहिए, माँ?

माँ! मेरा यह बचपन और तुम्हारा मातृत्व ये ही तो हैं मेरे लिए गहने। मैं तुम्हारा गहना हूँ और तुम मेरा गहना हो माँ! फिर अन्य गहने या आभूषण लेकर क्या करूँ?



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