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गृह-गणित से आप क्या समझती हैं? अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा गृह-व्यवस्था के सन्दर्भ में गृहिणियों के लिए गृह-गणित के महत्व को स्पष्ट कीजिए।यागृह-गणित का ज्ञान होना गृहिणी के लिए क्यों आवश्यक है?यागृह विज्ञान की छात्राओं के लिए गृह-गणित के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।

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गणित मूल रूप से अंकों का विज्ञान है। जब हम किसी भी रूप में संख्याओं का प्रयोग करते हैं तो हम गणित का ही प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए – यदि हम कहते हैं कि “घर में दो किलोग्राम आम हैं।” तो यह कथन गणित पर ही आधारित माना जाएगा।

गृह – गणित का अर्थ

गणित अर्थात् संख्याओं के विज्ञान को जब गृह-कार्यों तथा गृह-व्यवस्था सम्बन्धी क्रिया-कलापों में इस्तेमाल किया जाता है, तब उसे गृह-गणित कहा जाता है। उदाहरण के लिए-बाजार से घरेलू वस्तुएँ खरीदते समय दाम को जोड़ना, नौकरों को पैसे गिनकर देना, धोबी को कपड़े गिनकर देना तथा लेना, नित्य आने वाले दूध की मात्रा लिखते रहना तथा पूरे महीने में आए दूध को जोड़कर उसका हिसाब तैयार कर लेना गृह-गणित का ही रूप है। कपड़े सिलते समय नाप लेना तथा लिखना तथा उसी के अनुकूल कपड़ा काटना आदि क्रियाएँ गृह-गणित पर ही आधारित हैं। अत: स्पष्ट है कि घर पर प्रत्येक क्रिया-कलाप में किसी-न-किसी रूप में गृह-गणित का इस्तेमाल अवश्य होता है।
 
गृह-गणित का महत्त्व

गृह-विज्ञान की छात्राओं के लिए सामान्य गणित का ज्ञान अति आवश्यक होता है। आहार एवं पोषण-विज्ञान, वस्त्र-विज्ञान आदि का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए कुछ गणनाएँ अवश्य ही करनी पड़ती हैं। गृह-प्रबन्ध तथा पारिवारिक बजट के सैद्धान्तिक अध्ययन एवं व्यावहारिक उपयोग के लिए भी गणित का ज्ञान आवश्यक होता है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए ही गृह-विज्ञान की छात्राओं को गृह- गणित के रूप में सामान्य गणित का ज्ञान प्रदान किया जाता है। इसी प्रकार गृहिणियों के लिए भी गृह- गणित का ज्ञान विशेष रूप से उपयोगी तथा आवश्यक होता है। गृह-गणित का समुचित ज्ञान होने की स्थिति में गृहिणियों को विभिन्न कार्य करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, वे स्वयं ही रुपए-पैसे का लेन-देन कर सकती हैं तथा गृह-बजट तैयार कर सकती हैं। अतः स्पष्ट है कि गृह-प्रबन्ध की सफलता के लिए प्रत्येक गृहिणी के लिए गृह-गणित का ज्ञान आवश्यक एवं महत्त्वपूर्ण है।



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