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कवि को पुष्प कैसे दिखाई देते हैं? । |
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Answer» पुष्य से तंद्रालस लालसा खींच लूँगा मैं. द्वार दिखा दूँगा फिर उनको। अभी न होगा मेरा अंत। कवि को पुष्प कैसे दिखाई पड़ते हैं? ... वह उन्हें अपना स्पर्श देना चाहता है। उन्हें अनंत तक खिलाना चाहता है। वह उन्हें अपने जीवन के अमृत रस से सींचना चाहता है। वह उन्हें गुलदस्ते में सजाकर सुंदर बनाना चाहता है। |
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