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निजीकरण का अर्थ और प्रक्रिया को समझाइए ।

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भारत में 1991 की आर्थिक नीति में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किये गये जो आर्थिक सुधार के नाम से जाने गये । 1991 की आर्थिक नीति में उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण को शामिल किया गया ।

हम यहाँ निजीकरण की चर्चा करेंगे :

निजीकरण का अर्थ : निजीकरण अर्थात् औद्योगिक मालिकी का सार्वजनिक क्षेत्र में से निजी क्षेत्र में स्थानांतरण ।

निजीकरण की प्रक्रिया : सरकार देश में सार्वजनिक क्षेत्र उद्योगों की मालिकी और संचालन करता है । यह मालिकी और संचालन पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से निजी क्षेत्रों को सौंपने की प्रक्रिया अर्थात् निजीकरण की प्रक्रिया ।

भारत में निजीकरण की प्रक्रिया : भारत में निजीकरण की प्रक्रिया को दो भागों में बाँटकर अध्ययन करेंगे :

(1) सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों का शेयर निजी क्षेत्रों को बेचकर मालिकी परिवर्तन करें तो उसे निजीकरण कहते हैं । ऐसा निजीकरण दो प्रकार से होता है :

  • सार्वजनिक क्षेत्र के सभी शेयर निजी क्षेत्रों को बेच दें । अर्थात् मालिकी का संपूर्ण स्थानांतरण ।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के कुछ शेयर (29% या 49%) निजी क्षेत्रों को बेच दें तो उसे अंशत: निजीकरण कहते हैं ।

यहाँ समझना होगा कि 51% शेयर से कम शेयर सरकार बेचे तो सरकार का नियंत्रण होता है । 51% से अधिक शेयर बेचें। तो संचालन निजी क्षेत्रों के हस्तक जाता है ।

(2) सरकार कुछ उद्योगों की मालिकी रखती है और कुछ क्षेत्रों पर अंकुश रखती है । विशेष तो सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र । जहाँ निजी निवेशकों के प्रवेश पर प्रतिबंद होता है । यहाँ सरकार के निजी क्षेत्रों को काम करने की छूट दी गयी है ।

जैसे – बैंकिंग व्यवसाय, शिक्षा, संचार, परिवहन में अब निजी औद्योगिक समूह भी सेवा उपलब्ध करवाता है ।

प्रभाव (असर):

  • 1991 के आरम्भ के वर्षों में भारत के सार्वजनिक क्षेत्रों का विस्तरण हुआ था । 31 मार्च, 1951 में भारत में सार्वजनिक इकाईयाँ 5 थी । वह बढ़कर 1990 में 233 हो गयी । 1991 से यह इकाईयाँ घटी और मार्च, 2010 में 217 इकाईयाँ रह गयी है ।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित रखे गये क्षेत्रों में से निजी क्षेत्रों के लिए पूँजी निवेश के लिए खोल दिए । वर्तमान अणु ऊर्जा के लिए नियंत्रित साधन तथा रेलवे सरकार के अन्तर्गत है ।


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