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निम्नलिखित पात्रों का चरित्र-चित्रण कीजिए :१. महापंडित श्रीधर२. सुशीला३. महाकवि भारवि

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१. महापंडित श्रीधर
महापण्डित श्रीधर संस्कृत के महापण्डित थे। उनका पुत्र महाकवि था और वह शास्त्रार्थ में पण्डितों को पराजित करता चला जा रहा था। इससे उसका अहंकार बढ़ता जा रहा था। उसे अपनी विद्वता का घमंड हो गया था। श्रीधर अपने पुत्र को सही राह पर लाना चाहते थे। वे अपने पुत्र को ताड़ना देते हैं क्योंकि वे उसका भला चाहते हैं। अहंकार व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकता है। वे एक आदर्श पिता का फर्ज निभाते हुए अपने पुत्र को सही राह पर लाने के लिए ताड़ना देते हैं। उनका पुत्र उन्हें गलत समझता है लेकिन अपने पिता के उद्देश्य का पता चलने पर वह लज्जित हो जाता है। वह अपनी गलती के लिए प्रायश्चित करना चाहता है। इस तरह श्रीधर का चरित्र उच्च कोटि का है।

. सुशीला
सुशीला महापंडित श्रीधर की पत्नी तथा महाकवि भारवि की माता है। अपने विद्वान पुत्र पर पिता की तरह इसे भी गर्व है। वह अपने पुत्र भारवि के घर न लौटने के कारण दुःखी है। वह पुत्र शोक में सो नहीं पाती। वह मानती है कि यदि पुत्र के लिए माँ की ममता मूर्खता है तो ऐसी मूर्खता हमेशा बनी रहे। पति के समझाने पर भी पुत्र-मोह कम नहीं होता। पुत्र के व्यामोह में वह अपने पति से भी काफी वाद-विवाद करती है, परन्तु अपनी मर्यादा में रहकर, अपने पति-धर्म को निभाती है।

३. महाकवि भारवि
भारवि संस्कृत के महाकवि थे जो आगे चलकर ‘किरातार्जुनीयम’ महाकाव्य की रचना करते हैं। भारवि शास्त्रार्थ में पंडितों को पराजित कर रहे थे। उनके अंदर पंडितों की हार से अहंकार बढ़ता जा रहा था। उन्हें अपनी विद्वत्ता का घमंड होता जा रहा था। उनका गर्व सीमा का अतिक्रमण कर रहा था। उनके पिता श्रीधर भरी सभा में उन्हें ताड़ते हैं। भारवि उनसे बदला लेना चाहता है। जब भारवि को पिता का उनके प्रति मंगलकामना का पता चलता है तो वे विचलित हो जाते हैं। अपनी गलती पर पछताते हुए पिता से दण्ड माँगते हैं। इस तरह भारवि के चरित्र का पता चलता है कि उन्हें अपनी गलती का पछतावा है। वे पिता द्वारा दिए हुए दण्ड को सहर्ष स्वीकार करते हुए पालन करने की आज्ञा माँगते हैं।



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