1.

शास्त्रार्थ में पंडितों को हराते देख पिता ने भारवि के बारे में क्या सोचा?

Answer»

शास्त्रार्थ में पंडितों को हराते देख पिता ने भारवि के बारे में सोचा कि पंडितों की हार से उसका अहंकार बढ़ता जा रहा है। उसे अपनी विद्वता का घमंड हो गया है। उसका गर्व सीमा को पार कर रहा है। भारवि आज संसार का श्रेष्ठ महाकवि है। दूर-दूर के देशों में उसकी समानता करने वाला कोई नहीं है।
उसने शास्त्रार्थ में बड़े से बड़े पण्डितों को पराजित किया है। उसका पांडित्य देखकर पिता को बहुत प्रसन्नता होती है। पर भारवि के मन में धीरे-धीरे अहंकार बढ़ता जा रहा है। पिता चाहते हैं कि भारवि और भी अधिक पंडित और महाकवि बने। पर अहंकार उन्नति में बाधक है। इसलिए पिता ने अहंकार पर अंकुश रखना चाहा। जिसे अपने पांडित्य का अभिमान हो जाता है वह अधिक उन्नति नहीं कर सकता। इसी कारण से पिता भारवि को समय-समय पर मूर्ख और अज्ञानी कहते हैं। पिता नहीं चाहते हैं कि अहंकार के कारण उसके पुत्र की उन्नति रुक जाये।



Discussion

No Comment Found