1.

प्रोग्शाला के निदेशांश फ्रेम में कोई नाभिक विराम में है । यदि यह बभीक दो छोटे नाभिकों में विघटित हो जाता है, तो यह दर्शय की उत्पाद विपरीत दिशाओ में गति करने चाहिए ।

Answer» माना विधटन के पश्चात उत्पन्न उत्पादों के द्रव्यमान क्रमश: `m_1` व् `m_2`है तथा उनके वेग `vecv_1` व् `vecv_2` है।
अतः विघटन/क्षय के बाद निकाय का सम्पूर्ण रेखीय संवेग
`m_1vecv_1+m_2vecv_2`
तथा क्षय के पूर्ण चूँकि नाभिक विराम में था अततः संवेग संरषण सिद्धांत से,
`m_1vecv_1+m_2vecv_2=0`
अथवा `vecv_1=-m_2/m_1vecv_2`
चूँकि `vecv_1` व् `vec v_2` सदिशों के चिह विपरीत है, अतः विघटन के पश्चात नाभिक विपरीत दिशाओ में गति करेंगे ।


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