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Answer» शेरशाह ने राजस्व सम्बन्धी निम्न सुधार किए। - उसने भूमि की विविधता के आधार पर अलग-अलग लगान निर्धारित किया।
- फसलों की उपज के आधार पर कर निर्धारित किया।
- उसने पटवारी द्वारा रस्सी से भूमि की नाप की व्यवस्था की, नाप की इकाई ‘गज’ थी।
- उसके राज्य में नगद कर देने का आदेश था।
- संकट या अकाल के कारण फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति सरकार द्वारा होती थी।
- उसने किसानों एवं राज्यों के बीच सीधा सम्बन्ध स्थापित किया, जिसे रैयतबाड़ी व्यवस्था कहा जाता था।
- किसानों के द्वारा भूमि का विवरण सरकार को लिखित रूप में दिया जाता था, जिसे कबूलियत कहते थे।
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