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सहसम्बन्ध का महत्त्व बताइए।

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सहसम्बन्ध का महत्त्व

सांख्यिकी में सहसम्बन्ध का सिद्धान्त अत्यधिक उपयोगी है। इस सिद्धान्त का विकास फ्रांसिस गाल्टन व कार्ल पियर्सन ने प्राणिशास्त्र तथा जनन-विद्या की अनेक समस्याओं के आधार पर किया है। सहसम्वन्ध के द्वारा ही अनेक वैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में दो-या-दो से अधिक घटनाओं के आपसी सम्बन्धों को स्पष्टीकरण मिलता है। इसकी सहायता से इस बात का आभास होता है कि विभिन्न समस्याओं के कारण तथा परिणाम में कितना और किस प्रकार का सम्बन्ध है। प्रतीपगमन (Regression), विचरण अनुपात (Ratio of Variation), आन्तरगणन (Interpolation), बाह्यगणन (Extrapolation) आदि अनेक सांख्यिकीय धारणाएँ सहसम्बन्ध सिद्धान्त पर आधारित हैं।

सांख्यिकी के अतिरिक्त; मनोविज्ञान, शिक्षा, कृषि, अर्थशास्त्र आदि के क्षेत्रों में भी सहसम्बन्ध का विशेष महत्त्व है। अर्थशास्त्र में सहसम्बन्ध के उपयोग के बारे में नीसवेंजर लिखते हैं-“सहसम्बन्ध विश्लेषण आर्थिक व्यवहार को समझने में योग देता है, विशेष महत्त्वपूर्ण चरों, जिन पर अन्य चर निर्भर करते हैं, को खोजने में सहायता देता है, अर्थशास्त्री को उन सुझावों को स्पष्ट करता है जिनसे गड़बड़ी फैलती है तथा उसे उन उपायों का सुझाव देता है जिनके द्वारा स्थिरता लाने वाली शक्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं।”



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