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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:इस धरा पर मृदुल रस धार-सी तुम सुख का सार हो नारीतुम वंदनीय हो, अभिनंदनीय हो, सादर नमन तुम्हें हे नारी…!धरा सी सहनशील, जल-सी निर्मल, फूलों सी कोमल तुम नारीजीवन की गति, जीवन की रति, जीवन की मति हो तुम नारी…! |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘अभिनंदनीय नारी’ नामक कविता से लिया गया हैं जिसके रचयिता जयन्ती प्रसाद नौटियाल हैं। |
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