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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए :ताकि दिखाई दो सुंदर, बहुत ही सुंदर-यों कहती होसुंदर लगे किसको, कहो माँ?देखनेवालों को लगता है सुंदर, देता हैआनंद; मगर मुझे बनता है बड़ा बंधन! |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य गौरव’ के ‘गहने’ नामक आधुनिक कविता से लिया गया है, जिसके रचयिता कुवेंपू हैं। संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियों में उन्होंने गहने से अधिक माँ और बेटी के रिश्ते को महत्व दिया है। भाव स्पष्टीकरण : माँ अपनी बेटी से सोने के गहने और रंगीन कपड़े पहनने के लिए कहती है। बेटी ऐसा करने से मना करती है क्योंकि सोने के गहने तकलीफ़ देते हैं और रंगीन कपड़े उसे मिट्टी में खेलने नहीं देते। वह कहती है कि देखनेवाले को भले ही आनंद दे लेकिन मुझे बड़ा बंधन लगता है। विशेष : सरल भाषा, माँ और बेटी का मधुर संबंध। |
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