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Story writing on preaching fools.✌️ |
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Answer» आपकी स्टोरी मैंने हिंदी में लिखा है :- मूर्ख को उपदेशकिसी पर्वत देश में वानरों का एक दल रहता था । जाड़े के दिन थे । ठंडी हवा सरसराती हुई बह रही थी । वानरों के शरीर से कपकपी तो यूं ही छूट रही थी , ऊपर से औरों के साथ वर्षा की झड़ी भी लगी हुई थी । बरसात थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी । बेचारे वानर परेशान होकर इधर-उधर भाग रहे थे । पर कहीं चैन नहीं मिल रहा था । वर्षा कुछ समय के लिए थमी तो उनमें से कुछ वानरों ने लाल गुंजा फल जुटाए और उनको ही आग समझकर उनकी ढेरी को घेरकर बैठ गए । सूचीमुख नामक एक पक्षी उनके इस व्यर्थ प्रयास को देखकर बोला , "तुम लोग तो पहले दर्जे के मूर्ख मालूम होते हो । जिन्हें तुम आज की चिंगारियां समझकर घेरे बैठे हो वह तो गुंजा फल है । इन्हें जुटाने में तुम लोगों ने इतनी मेहनत बेकार ही की है । इनसे तुम्हें गर्मी नहीं मिलने वाली । तुम जाकर कोई ऐसा स्थान देखो जहां हवा से ओट हो । उससे भी अच्छा होगा कि कोई गुफा तलाश कर उसमें छीप जाओ । क्योंकि बादलों का घटाटोप इस समय भी बना हुआ है । बरसात की झड़ी फिर शुरू हो सकती है । " सूचीमुख की बात सुनकर उनमें से एक बूढ़ा वानर ने कहा , " मूर्ख तो तुम भी कुछ कम नहीं हो । तुम यह उपदेश दे रहे हो उससे तुम्हें क्या लाभ ? तुम यहां से चुपचाप खिसक जाओ । कहते हैं जो अपनी भलाई चाहता है उसे किसी काम में बार-बार असफल हुए व्यक्ति और हारे हुए जुआरी से बहस नहीं करनी चाहिए । " " यही नहीं , जो नादान किसी बहेलियां , नाकाम आदमी, मूर्खों और आफत में पड़े लोगों को नसीहत देता है उसका तिरस्कार हुए बिना नहीं रहता । पैर सूचीमुख पर उसके समझाने का कोई असर नहीं हुआ । वह फिर कहने लगा आप लोग यह बेकार का कष्ट क्यों उठा रहे हैं ? अब क्या था उन वानरों में से एक इतना बिगड़ उठा कि उसने सूची मुख के पंख पकड़कर उसे चट्टान पर दे मारा और वह उसके साथ ही मर गया । इसलिए ही कह रहा था कि मूर्ख को उपदेश देने से लाभ तो होता नहीं नुकसान जरूर होता है । मूर्ख को उपदेश दो तो उसका क्रोध शांत होने के स्थान पर और बढ़ता है । इसलिए कहा गया है कि हर ऐरे गैरे को उपदेश नहीं देते रहना चाहिए । |
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