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Answer» सरकार नियंत्रित अर्थव्यवस्था में निजीक्षेत्र, व्यक्तिगत निर्णय की स्वतंत्रता, बाजार परिबलों द्वारा आर्थिक निर्णयों का विस्तार बढ़े तो उसे उदारीकरण कहते हैं, । भारत के मिश्र अर्थतंत्र में राज्य के नियंत्रणवाले आर्थिक निर्णयों में निजी और बाजार आधारित क्षेत्र के स्वीकार को उदारीकरण कहते हैं । उदारीकरण के कारण भारत में निम्नलिखित परिवर्तन हुए : - आर्थिक सत्ता का केन्द्रीयकरण एवं एकाधिकारशाही को रोकने के लिए रचित कानून MRTP Act (Monopolies and Restrictive Trade Pratices Act) को समाप्त करके Competition Act में परिवर्तित किया गया है अर्थात् प्रतिबंध को हटाकर स्पर्धा को प्रोत्साहन दिया गया है ।
- FERA (Foreign Exchange Regulation Act) में से Regulation के स्थान पर Management लाया गया । अर्थात् अब तो नियंत्रण के बदले संचालन किया जाता है । जिससे FERA का स्थान FEMA ने ले लिया ।
- औद्योगिक नीति में बड़े पैमाने पर परिवर्तन किया । सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए आरक्षित 18 उद्योगों में से घटाकर तीन कर दिये गये है ।
- छोटे पैमाने के उद्योगों में पूँजीनिवेश की मर्यादा बढ़ा दी गयी जिससे वे नवीनीकरण के पीछे खर्च कर सकते हैं ।
- विदेशी पूँजी निवेश की प्रक्रिया सरल बनी और बहुत सारे क्षेत्रों में विदेशी पूँजी निवेश की अनुमति अपने आप ही मिल गयी ।
- राजकोषीय नीति, व्यापार नीति और आयात-निर्यात नीति द्वारा सरकार ने बाजार परिबलों को आर्थिक निर्णय प्रक्रिया में अधिक महत्त्व दिया है ।
- सबसिडी खर्च कम किया गया, आयात-निर्यात लाइसन्स नीति हल की गयी, विदेशी मुद्रा की दर अधिक मुक्त बनी ।
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