1.

वैश्वीकरण का अर्थ देकर उसके महत्त्व की चर्चा कीजिए ।

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अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष ने उसके नीचे अधिक मात्रा में ऋण में डूबे विकासशील देशों को 1991 में उनकी संरक्षणात्मक आर्थिक नीतियों को बदलने के लिए विवश किया, परिणामस्वरूप भारत ने भी उद्योगों को संरक्षण देनेवाली आर्थिक नीतियों में से मुक्त अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रोत्साहक नीतियाँ स्वीकार की और भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया शुरू हुयी ।

अर्थ : ‘वैश्वीकरण अर्थात देश के अर्थतंत्र को विश्व के अर्थतंत्र के साथ अधिक से अधिक जोड़ने की प्रक्रिया ।’

वैश्वीकरण की प्रक्रिया : भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया में निम्नलिखित बातों का समावेश होता है :
आयात-निर्यात की लाइसन्स नीति में छूट-छाट (मुक्त) दी गयी ।

  1. 1995 में भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO – World Trade Organization) का सदस्य बना ।
  2. भारतीय चलन रुपये को अन्य देशों के चलन के साथ विनिमयदर क्रमश: मुक्त की । उसके क्रय-विक्रय को भी सरल बनाया गया ।
  3. देश में सीधा विदेशी निवेश क्षेत्रों में क्रमश: अधिक से अधिक मुक्त बनाया गया ।
  4. भारतीय उद्योगपतियों, निवेशकों को अन्य देशों के साथ आर्थिक व्यवहार में अधिक से अधिक छूट (खुला माहोल) दी गयी ।
  5. देशी और विदेशी उत्पादकों, व्यापारियों, निवेशकों के लिए सरकार नीतिगत तटस्थ रही ।
  6. अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक – सामाजिक आदान-प्रदान भी सरल बना ।


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