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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

दक्षेस का मुख्यालय स्थित है(क) काठमाण्डू में(ख) ढाका में(ग) नई दिल्ली में(घ) कोलम्बो में

Answer»

सही विकल्प है (क) काठमाण्डू में

2.

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) की स्थापना किस वर्ष हुई थी ?(क) 1984(ख) 1985(ग) 1986(घ) 1987

Answer»

सही विकल्प है (ख) 1985

3.

दक्षेस का 15वाँ शिखर सम्मेलन सम्पन्न हुआयादक्षेस ( दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन, सार्क) का पन्द्रहवाँ शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।(क) कोलम्बो में(ख) माले में(ग) दिल्ली में(घ) ढाका में

Answer»

सही विकल्प है (क) कोलम्बो में

4.

Write any four concepts of accounting.

Answer»

1. Money measurement concepts 

2. Dual concepts 

3. Business entity concept 

4. Continuity concept.

5.

“Production is the transformation of inputs into outputs”. Justify the statement by citing examples from your location. Also built a production function based on your example.

Answer»

Production is possible only through effective utilisation of factors of production. The factors of production like land, labour, capital and organisation are called inputs. In the production process, these inputs. In the production process, these inputs are transformed into output. Thus a production function stands for functional relationship between inputs and output. In my locality paddy is produced by combining inputs like labour, machinery, land, bank loan and organisers efforts. These are inputs.

Thus the paddy production function can be stated as follows.

Q = f(X1, X2, X3 ,Xn)

Where Q = paddy, X1, X2 ……… Xn are inputs used.

6.

औद्योगीकरण से आप क्या समझते हैं ? औद्योगीकरण की परिभाषा दीजिए तथा औद्योगीकरण की विशेषताएँ भी बताइए।याऔद्योगीकरण किसे कहते हैं ? औद्योगीकरण के सामाजिक प्रभावों का उल्लेख कीजिए। याभारत में औद्योगीकरण के सामाजिक और आर्थिक परिणामों का वर्णन कीजिए। 

Answer»

औद्योगीकरण का अर्थ एवं परिभाषाएँ

धन कमाना मनुष्य की एक प्रमुख क्रिया है। आजीविका जुटाने के लिए प्रकृति के साथ सतत संघर्ष करना ही मानव-विकास की कहानी है। मनुष्य आखेट, पशुपालन व मछली पकड़ने से लेकर धीरे-धीरे औद्योगिक युग तक पहुँच गया है। औद्योगीकरण दो शब्दों के मेल से बना है-उद्योग + करण’। ‘उद्योग’ का अर्थ ‘कारखाने’ तथा ‘करण’ का अर्थ है–‘स्थापित करना। इस प्रकार औद्योगीकरण का शाब्दिक अर्थ हुआ ‘कारखाने स्थापित करना।
क्लार्क केर के अनुसार, “औद्योगीकरण से अभिप्राय एक ऐसी स्थिति से है जिसमें पहले का कृषक अथवा व्यापारिक समाज एक औद्योगिक समाज की दिशा की ओर परिवर्तित होने लगता है।”
संयुक्त राष्ट्र संघ (U.N.O.) के अनुसार, “औद्योगीकरण से तात्पर्य बड़े-बड़े उद्योगों के विकास तथा छोटे और कुटीर उद्योग-धन्धों के स्थान पर बड़े पैमाने की मशीनों की व्यवस्था से है। औद्योगीकरण आर्थिक विकास की व्यापक प्रक्रिया का अंग मात्र है, जिसका उद्देश्य उत्पादन के साधनों की क्षमता में वृद्धि करके जनजीवन के स्तर को ऊँचा उठाना है।”
अतः औद्योगीकरण उद्योगों के विकास की एक प्रक्रिया है, जिसमें बड़े पैमाने पर उद्योग लगाये जाते हैं तथा हाथ से किया जाने वाला उत्पादन मशीनों से किया जाने लगता है।

औद्योगीकरण की विशेषताएँ

औद्योगीकरण में मुख्य रूप से निम्नलिखित विशेषताएँ पायी जाती हैं.

⦁    औद्योगीकरण उत्पादन की एक प्रक्रिया है, जिसका विकास धीरे-धीरे होता है।
⦁    औद्योगीकरण के कारण राष्ट्र में नये-नये उद्योगों की स्थापना तीव्र गति से होती है।
⦁    औद्योगीकरण मानवीय शक्ति की अपेक्षा मशीनी शक्ति पर बल देता है।
⦁    औद्योगीकरण में मशीनों का संचालन कोयला, खनिज तेल अथवा विद्युत-शक्ति द्वारा किया जाता है।
⦁    औद्योगीकरण की प्रमुख विशेषता श्रम-विभाजन और विशिष्टीकरण है।
⦁    औद्योगीकरण तीव्र गति से सस्ते और बड़े पैमाने के उत्पादन पर बल देता है।
⦁    औद्योगीकरण की प्रमुख विशेषता नवीनतम वैज्ञानिक विधियों तथा उत्पादन की नवीनतम तकनीक के प्रयोग पर बल देना है।
⦁    औद्योगीकरण प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम तथा योजनाबद्ध दोहन पर बल देता है।
⦁    औद्योगीकरण के फलस्वरूप प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है, जो आर्थिक विकास की परिचायक है।
⦁    औद्योगीकरण राष्ट्र के सामाजिक और आर्थिक ढाँचे में आमूल-चूल परिवर्तन करता है।
⦁    औद्योगीकरण के कारण वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होने से प्राचीन मान्यताएँ ध्वस्त हो जाती हैं।
⦁    औद्योगीकरण पूँजीवाद का जनक है। इसके फलस्वरूप श्रमिक वर्ग और पूँजीपति वर्ग जन्म लेते हैं।
⦁    औद्योगीकरण की एक प्रमुख विशिष्टता राष्ट्रीय व्यापार और उद्योगों में होने वाली भारी वृद्धि
⦁    औद्योगीकरण का क्षेत्र अन्तर्राष्ट्रीय बाजार होने के कारण यह अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों की स्थापना करने में सक्षम होता है।
⦁    औद्योगीकरण के कारण राष्ट्र को समूचा विनिर्माण, उद्योगों तथा अर्थव्यवस्था को परिवेश परिवर्तित हो जाता है।

औद्योगीकरण का भारतीय समाज पर प्रभाव

औद्योगीकरण का भारतीय समाज के सभी पक्षों पर गहरा प्रभाव पड़ा है, जिस पर हम निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत विचार करेंगे

(क) भारतीय पारिवारिक जीवन पर प्रभाव

औद्योगीकरण का भारतीय पारिवारिक जीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ा है

1. संयुक्त परिवार प्रथा का विघटन – संयुक्त परिवार भारतीय समाज की एक प्रमुख विशेषता रही है। एक परिवार के सभी नये-पुराने सदस्य एक ही स्थान पर रहते हुए खेती का कार्य करते रहे हैं, किन्तु उद्योगों के विकास के साथ-साथ लोग कारखानों में काम करने के लिए गाँव छोड़कर शहरों की ओर भागे। एक ही परिवार का कोई सदस्य कहीं पहुँच गया, कोई कहीं। कारखानों की मजदूर कॉलोनी में या अन्य छोटे-छोटे आवासों में लोग जा बसे, जहाँ मुश्किल से एक छोटे-से परिवार को ही गुजारा होता है। इस प्रकार संयुक्त परिवार को विघटन होने लगा और यह क्रिया काफी व्यापक पैमाने पर हुई है। इस प्रकार के स्थानों पर जिन परिवारों की नींव पड़ी, वे भी छोटे थे; क्योंकि पति-पत्नी तथा बच्चों के अतिरिक्त अन्य किसी का वहाँ गुजारा नहीं हो सकता था।

2. पारिवारिक कार्य-क्षेत्र का सीमित होना – संयुक्त परिवार में परिवार के सदस्यों की अधिकांश आवश्यकताएँ अन्य सदस्यों द्वारा पूरी हो जाती थीं। औद्योगीकरण के प्रभाव से परिवार के अनेक कार्य विशिष्ट संस्थाओं द्वारा होने लगे हैं। औद्योगीकरण के फलस्वरूप कपड़े धोने का काम लॉण्ड्री में, कपड़े सिलने का काम दर्जी की दुकानों में, आटा पीसने का काम आटा पीसने की शक्ति-चालित चक्कियों में, खेत जोतने, बोने, काटने, माँड़ने का काम विभिन्न मशीनों से होने लगा। इस प्रकार परिवार का कार्य-क्षेत्र सीमित हो गया है।

3. स्त्रियों का नौकरी करना – औद्योगीकरण के फलस्वरूप घर के अनेक कार्य मशीनों द्वारा होने लगे और स्त्रियों के पास समय बचने लगा। अतः महँगाई और अभाव से ग्रस्त परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए स्त्रियाँ नौकरी करने लगीं। औद्योगीकरण के फलस्वरूप सघन कॉलोनी में रहने के कारण पर्दा-प्रथा भी कम हो गयी और नौकरी पर जाने में स्त्रियों की हिचक समाप्त हो गयी।

4. स्त्रियों की स्थिति में सुधार – धन कमाने के कारण स्त्रियाँ स्वावलम्बिनी होने लगीं। अपने पैरों पर खड़े होने के कारण उनका आत्मविश्वास बढ़ा। वे अधिक स्वतन्त्र हुईं। उनमें शिक्षा का प्रसार हुआ और इस प्रकार उनकी स्थिति में सुधार हुआ।

5. विवाह के रूप में परिवर्तन – पहले धर्म-विवाह होते थे, जो संयुक्त परिवार के बुजुर्गों द्वारा कर दिये जाते थे। औद्योगीकरण के प्रभाव में प्रेम-विवाह और अन्तर्जातीय विवाहों की संख्या बढ़ी है, क्योंकि सघन औद्योगिक बस्तियों में युवक और युवतियों के सम्पर्क बढ़े तथा बड़े बुजुर्गों के नियन्त्रण का अभाव हो गया। इसके साथ-ही-साथ अपने पैरों पर खड़े होने के प्रयास में विवाह की आयु बढ़ी और इस प्रकार विलम्ब विवाह होने लगे। वैवाहिक जीवन पर नियन्त्रण घटने से तलाक भी बढ़े हैं।

6. पारिवारिक नियन्त्रण का घटना – पहले संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों पर परिवार के मुखिया का कठोर नियन्त्रण रहता था। हर व्यक्ति परिवार के रीति-रिवाज, आस्थाओं, मान्यताओं आदि से प्रभावित रहता था। औद्योगीकरण के प्रभावस्वरूप परिवारों का आकार छोटा हो गया और व्यक्ति पर पारिवारिक नियन्त्रण घट गया है।

(ख) भारतीय सामाजिक जीवन पर प्रभाव

औद्योगीकरण ने भारतीय सामाजिक जीवन को निम्न प्रकार प्रभावित किया

1. रहन-सहन में कृत्रिमता – औद्योगीकरण के फलस्व रूप लोगों का जीवन अप्राकृतिक हो गया। है। तंग घरों, अँधेरी गलियों, धुएँ से भरा हुआ आकाश, ट्रामें, बसें, रेलें, ऊँचे-नीचे मकान व मशीनों का शोर औद्योगीकरण की ही देन है। इस प्रकार मनुष्य प्रकृति से दूर होती जा रही है।

2. गन्दी तथा तंग बस्तियों का विकास – हर औद्योगिक नगर में जनसंख्या का घनत्व बढ़ने के कारण रहने के स्थान का अभाव हो जाता है। घनी तंग बस्तियों में दिन में भी सूर्य के दर्शन नहीं होते। कमरे धुएँ से भरे रहते हैं। मल-मूत्र की बदबू असह्य होती है, फिर भी लोग अपने को उसका आदी बना लेते हैं। मुम्बई में ‘चाल’, चेन्नई में ‘चेरी’ और कानपुर में ‘अहाता’ आदि इस प्रकार की गन्दी बस्तियों के उदाहरण हैं।।

3. जाति-प्रथा को कमजोर होना – औद्योगीकरण के फलस्वरूप और बढ़ती हुई बेकारी के कारण हर जाति के लोग कारखानों में काम पाने का प्रयास करते हैं। काम करते समय और सामान्य जीवन में एक-दूसरे के इतने नजदीक आ जाते हैं कि उन्हें प्रतिबन्धों और निषेधों की उपेक्षा करनी पड़ती है। उन्हें मानकर वे कोई कार्य नहीं कर सकते। अन्तर्जातीय विवाह भी
ऐसे स्थानों पर जाति-प्रथा को ढहाने में सहायक होते हैं।

4. नैतिकता का ह्रास – मशीनों के बीच काम करते-करते मनुष्य की संवेदनशीलता का लोप हो जाता है। उसमें अपने बन्धु-बान्धवों के प्रति सद्भाव का लोप होने लगता है। कारखानों में काम करने वाला व्यक्ति स्वार्थप्रिय हो जाता है और उसमें मूल्यों के प्रति आस्था समाप्त हो जाती है। औद्योगिक बस्तियों में इसीलिए चोरी, बेईमानी, ईष्र्या-द्वेष, मद्यपान, जुआ, हत्याएँ सामान्य घटनाएँ होती रहती हैं। इससे भ्रष्टाचार का व्यापक प्रसार हुआ है। अपराधों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।

5. प्रतिद्वन्द्विता और संघर्ष – उद्योगों में अस्वस्थ प्रतिद्वन्द्विता के कारण पारस्परिक संघर्ष उत्पन्न हुआ है, जिससे प्रभावित होकर एक व्यक्ति दूसरे को गला काटने से भी नहीं चूकता।

6. बाल-अपराधों में वृद्धि – औद्योगीकरण के फलस्वरूप भारत की औद्योगिक बस्तियों में बाल-अपराधों की भी वृद्धि हुई है। माता-पिता दिन में अधिकांश समय कारखानों में काम करते हैं, उनकी अनुपस्थिति में बच्चे हर तरह से संसर्ग में आते हैं। नैतिक शिक्षा का अभाव पहले से होता है। माता-पिता द्वारा नैतिक आदर्श रखे नहीं जाते; अस्तु बच्चे हर तरह के
अपराध करने लगते हैं।

7. सामुदायिक जीवन का ह्रास – मानवीय सम्बन्धों के ह्रास के कारण समाज में वैयक्तिकता अधिक पनपी है। पारस्परिक सद्भाव, सहयोग और सहानुभूति के अभाव के कारण सामुदायिक जीवन का ह्रास होता है।

8. चिन्ता एवं तनाव में वृद्धि – बढ़ती हुई जनसंख्या और रहन-सहन की सुविधाओं के अभाव के कारण तथा नौकरी की तनावपूर्ण दशाएँ, शोषण, ईष्र्या, द्वेष, प्रतिद्वन्द्विता आदि के कारण औद्योगिक बस्ती में रहने वाले लोगों में चिन्ता एवं तनावों में अत्यधिक वृद्धि हो गयी है। इससे व्यक्ति का व्यक्तिगत जीवन अशान्त हो गया है।

(ग) भारतीय आर्थिक जीवन पर प्रभाव

भारतीय आर्थिक जीवन को औद्योगीकरण ने व्यापक रूप से प्रभावित किया है, जो निम्न प्रकार है।

1. पूँजीवाद का विकास बड़े – बड़े उद्योग चलाने के लिए अत्यधिक धन की आवश्यकता होती है, जो पूँजीपतियों से प्राप्त होता है या सरकार द्वारा लगाया जाता है। भारत में भी औद्योगीकरण के विकास के साथ पूँजीपतियों को बढ़ावा मिला है। उनका धन उद्योगों के खोलने में लगा है और उद्योगों के लाभ से उनके कोष भरे पड़े हैं। इसके साथ-ही-साथ श्रमिकों का शोषण भी हुआ है।

2. बड़े पैमाने पर उत्पादन एवं व्यापार –  भारत में औद्योगीकरण के फलस्वरूप नये-नये कारखाने खोले गये हैं, जिनसे विभिन्न वस्तुओं का व्यापार भी बड़े पैमाने पर होने लगा है। कई उद्योगों के लिए कच्चा माल बाहर से आने लगा है और शक्ति के कुछ साधनों का भी आयात किया गया है। इस प्रकार औद्योगीकरण से उत्पादन एवं व्यापार को काफी बढ़ावा मिला है।

3. उच्च जीवन-स्तर – औद्योगीकरण से देश में उत्पादन बढ़ता है और निर्यात द्वारा जो धनोपार्जन होता है वह जीवन-स्तर को ऊँचा उठाने में सहायक होता है। हमारे देश में स्वतन्त्रता-प्राप्ति के बाद जो तीव्र गति से औद्योगिक विकास हुआ है, उससे देशवासियों के
जीवन-स्तर में कुछ-न-कुछ वृद्धि तो हुई ही है।

4. श्रम-विभाजन एवं विशिष्टीकरण – कुटीर उद्योगों में तो उद्योग खोलने वाला व्यक्ति सभी काम स्वयं कर लेता है, किन्तु बड़े उद्योगों में कारखानों में काम कई भागों में बाँट दिये जाते हैं और उन्हें विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति अत्यधिक तीव्र गति और दक्षता से करते हैं। इस प्रकार श्रम-विभाजन एवं विशिष्टीकरण द्वारा उत्पादन में वृद्धि होती है। औद्योगीकरण का यह एक अनिवार्य परिणाम है।

5. काला धन, चोर-बाजारी एवं आयकर की चोरी – औद्योगीकरण के साथ लोगों की आमदनी बढ़ती है। आमदनी पर कर देना होता है, इसलिए उत्पादन ही छिपा लिया जाता है। इस प्रकार कुल आमदनी के एक अंश आयकर की चोरी की जाती है। अवैध रूप से दबाये हुए उत्पादन की वस्तुओं की बिक्री करके चोर-बाजारी पनपती है। भारत में यह सभी कुछ हो रहा है।

(घ) भारतीय राजनीतिक जीवन पर प्रभाव

औद्योगीकरण का प्रभाव भारतीय राजनीतिक जीवन पर भी पड़ा है, जो निम्नवत् है

⦁    राज्य का उत्तरदायित्व बढ़ना – औद्योगीकरण विकास की योजनाओं के अन्तर्गत होता है। उसे कार्यान्वित करने के लिए राज्य को विधिवत् योजनाएँ बनाना होता है और कारखाने खोलने के लिए धने का प्रबन्ध करना होता है। औद्योगीकरण के द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है, अन्य देशों से लेन-देन बढ़ा है और उनकी व्यवस्था से सम्बन्धित अनेक जिम्मेदारियाँ बढ़ी हैं।
⦁    राजनीतिक समस्याओं में वृद्धि – औद्योगीकरण से देश में अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। जैसे–हड़ताल, तालाबन्दी, श्रमिकों एवं पूँजीपतियों के पारस्परिक संघर्ष, श्रमिक-कल्याण, दुर्घटनाएँ आदि। इन सभी समस्याओं को राज्य की ओर से हल करने की कोशिश की जाती है।

ङ) भारतीय धार्मिक जीवन पर प्रभाव

औद्योगीकरण का किसी देश के धार्मिक जीवन पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है। भारत में औद्योगीकरण का धार्मिक मान्यताओं पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ा है

1. समाज में धर्म का महत्त्व कम होना – औद्योगीकरण के फलस्वरूप भारत में ईश्वर पर से लोगों की आस्था कम होती जा रही है। लोगों का ध्यान भौतिक सुखों की ओर अधिक बढ़ने लगा है।

2. नैतिकता का ह्रास – नैतिकता की भावना, जो धर्म का एक आवश्यक अंग है, भारतीय जीवन से तिरोहित होती जा रही है। स्वार्थों की टकराहट में मानवता का हनन हो रहा है। मनुष्य ने मनुष्य को पहचानना तक छोड़ दिया है।

3. आदर्शों का अभाव – औद्योगीकरण के फलस्वरूप व्यक्ति का दृष्टिकोण भौतिकवादी हो गया है। अपने को वह केवल वर्तमान से ही जोड़कर रखने की कोशिश करता है। भौतिक सुखों की उपलब्धि उसके जीवन का लक्ष्य है। जीवन के आदर्शों का उसके लिए कोई महत्त्व नहीं रहा है, क्योंकि उसकी निगाह भविष्य पर टिकी नहीं होती।
औद्योगीकरण के दुष्प्रभावों को रोकने के उपाय

औद्योगीकरण के दुष्प्रभावों को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं

⦁    देश में उद्योगों का विकेन्द्रीकरण किया जाए जिससे राष्ट्र का सन्तुलित विकास हो सके।
⦁    ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योग-धन्धों की पुनः स्थापना की जाए।
⦁    कृषि एवं उद्योगों में बढ़ती हुई यन्त्रीकरण की प्रवृत्ति पर रोक लगायी जाए।
⦁    तीव्र गति से बढ़ती हुई जनसंख्या पर रोक लगायी जाये। इर के लिए परिवार कल्याण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए।
⦁     नगरों में आवास सुविधाएँ बढ़ायी जाएँ, प्रदूषण तथा गन्दगी का विनाश किया जाए।
⦁     अपराध वृत्ति पर रोक लगायी जाए तथा अपराध निरोध के लिए उपाय किये जाएँ।
⦁    जनसुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यकतानुसार वृद्धि की जाए।
⦁     नैतिक आदर्शों एवं सामाजिक मूल्यों के प्रति लोगों की आस्था बढ़ायी जाए।
⦁    सामाजिक न्याय एवं सामाजिक कल्याण में वृद्धि की जाए।
⦁     उद्योगों में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा उनकी सुविधाएँ बढ़ायी जाएँ।
⦁     वर्ग-संघर्ष कम करने के लिए समाज में धन का उचित वितरण किया जाए।
⦁    बेरोजगारी तथा निर्धनता पर रोक लगायी जाए।
⦁    पारिवारिक विघटन की प्रक्रिया को कम किया जाए।
⦁    समाज में मनोरंजन के स्वस्थ साधनों का विकास किया जाए।
⦁    समाज-सुधार एवं समाज-कल्याण की योजनाएँ चलायी जाएँ।
⦁     उद्योगों का विकास बस्तियों से दूर कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों में किया जाए।
⦁     समाज में सहयोग, प्रेम तथा एकता को वातावरण तैयार किया जाए जिससे तनाव और संघर्षों को रोका जा सके।
⦁     श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए श्रम-कल्याणकारी कानूनों का निर्माण किया जाए।
⦁     सामाजिक समस्याओं के निराकरण हेतु प्रशासन को अधिक चुस्त बनाया जाए।
⦁    राष्ट्र में कुशल नेतृत्व का विकास किया जाए तथा प्रजातान्त्रिक मूल्यों की स्थापना की जाए।

7.

What is accounting conventions?

Answer»

Accounting conventions refers to customs, traditions, usages or practices followed by accountants as guide for preparation of financial statements.

8.

भारत में औद्योगीकरण के चार सामाजिक प्रभावों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

भारत में औद्योगीकरण के चार सामाजिक प्रभाव निम्नलिखित हैं

⦁     नगरीकरण एवं गन्दी बस्तियों की स्थापना,
⦁     जनसंख्या का स्थानान्तरण,
⦁     कुटीर उद्योगों का पतन तथा ।
⦁     श्रम-विभाजन एवं विशेषीकरण।

9.

औद्योगीकरण का अर्थ बताते हुए उसकी चार विशेषताएँ बताइए।

Answer»

औद्योगीकरण का अर्थ-औद्योगीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा आधुनिक उद्योगों एवं सम्बन्धित संस्थाओं का विकास व प्रसार होता है। इसमें आर्थिक उत्पादन हेतु अमानवीय शक्ति (मशीनों आदि) का अधिकाधिक प्रयोग होता है। औद्योगीकरण की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

⦁    यह मानवीय शक्ति की अपेक्षा मशीनी शक्ति पर बल देता है।
⦁     इसकी प्रमुख विशेषता श्रम-विभाजन और विशिष्टीकरण है।
⦁     इसके कारण प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में वृद्धि होती है।
⦁    यह प्राकृतिक संसाधनों के अधिकतम तथा योजनाबद्ध दोहन पर बल देता है।

10.

Why is necessary for accountancy to assume that business will remain a going concern?

Answer»

According to this the assumption is made that “Every business is carried on with a view to continue it for an indefinite period of time in future and not to liquidate the affairs.

11.

Expand GAAP.

Answer»

Generally Accepted Accounting Principles.

12.

What is revenue said to be recognized? Are there exceptions to the general rule?

Answer»

“Revenue is said to be recognised from sale of goods, or services only when revenue is actually realsied".

13.

“औद्योगीकरण कुटीर उद्योगों का ह्रास करते हैं।” इस कथन की सत्यता बताइए।

Answer»

औद्योगीकरण से पूर्व उत्पादन कुटीर उद्योगों द्वारा होता था, किन्तु जब मशीनों की सहायता से उत्पादन होने लगा जो कि हाथ से बने माल की अपेक्षा सस्ता, साफ व टिकाऊ होता था, तो उसके सामने गृह-उद्योग द्वारा निर्मित माल टिक नहीं सका। धीरे-धीरे कुटीर व्यवसाय समाप्त होने लगे और उनमें काम करने वाले तथा उनके मालिक कारखानों में श्रमिकों के रूप में सम्मिलित हुए। कुटीर व्यवसायों में व्यक्ति को काम करने के बाद जो मानसिक आनन्द मिलता था, वह कारखानों में समाप्त हो गया, क्योंकि अब वह सम्पूर्ण उत्पादन की प्रक्रिया का एक छोटा-सा भाग ही पूर्ण करने में सहयोग देता है। इस प्रकार औद्योगीकरण से ग्रामीण कुटीर उद्योगों एवं गृह-कला का ह्रास हुआ।

14.

भौगोलिक निकटता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर क्या असर होता है?

Answer»

भौगोलिक एकता का क्षेत्रीय संगठनों के गठन पर निम्नलिखित रूप से विशेष प्रभाव पड़ता है-

⦁    भौगोलिक निकटता के कारण क्षेत्र विशेष में आने वाले देशों में संगठन की भावना विकसित होती है।
⦁    पारस्परिक निकटता से आर्थिक सहयोग एवं अन्तर्देशीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
⦁    सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करके कम धन व्यय होता है और बचे हुए धन का उपयोग अपने-अपने देश के विकास के लिए कर सकते हैं। अत: स्पष्ट है कि भौगोलिक निकटता क्षेत्रीय संगठनों को शक्तिशाली बनाने में तथा उनके प्रभाव में वृद्धि में योगदान देती है।

15.

“औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप मजदूर समस्याओं एवं मजदूर संगठनों का जन्म होता है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।

Answer»

औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण अनेक मजदूर समस्याओं ने जन्म लिया। मजदूरों के स्वास्थ्य, काम के घण्टे, भर्ती, शिक्षा, बीमा, चिकित्सा, मकान, बोनस आदि से सम्बन्धित अनेक समस्याओं का जन्म हुआ। इन्हें हल करने के लिए उन्होंने मजदूर संगठनों को निर्माण किया। इन समस्याओं के उचित तरीके से समाधान नहीं होने पर मजदूरों द्वारा काम रोक दिया जाता है और सम्पूर्ण आर्थिक जगत को इससे हानि होती है। हड़ताल, तालाबन्दी, तोड़फोड़, आगजनी, घेराव एवं हिंसात्मक उपद्रव होने लगे। कभी-कभी तो मजदूरों की समस्याओं को हल करने हेतु श्रम-कल्याण योजनाएँ बनायी गयीं। कुटीर व्यवसाय से सम्बन्धित कोई श्रम समस्याएँ नहीं थी, क्योंकि उनमें काम करने वाले एक ही परिवार व पड़ोस के व्यक्ति अथवा रिश्तेदार होते थे। उनमें परस्पर सहयोग और घनिष्ठ सम्बन्ध थे। अतः शोषण का प्रश्न ही नहीं था। सूर्योदय एवं सूर्यास्त होने के साथ-साथ काम के घण्टे तय होते थे, किन्तु औद्योगीकरण ने अनेक श्रम-समस्याओं को जन्म दिया है। इन समस्याओं के समाधान के लिए भारत सरकार ने 1948 ई० में कारखाना अधिनियम पारित किया।

16.

औद्योगीकरण को परिभाषित कीजिए तथा पर्यावरण पर इसके प्रभावों की विवेचना कीजिए।यानगरीकरण द्वारा पर्यावरण पर पड़ रहे दो दुष्प्रभावों का उल्लेख कीजिए।याऔद्योगीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव लिखिए। 

Answer»

औद्योगीकरण की परिभाषा

विभिन्न विद्वानों द्वारा औद्योगीकरण की परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं
एम० एस० गोरे के अनुसार, “औद्योगीकरण उस प्रक्रिया से सम्बन्धित है जिसमें वस्तुओं का उत्पादन हाथ से न होकर विद्युतशक्ति द्वारा चालित मशीनों से किया जाता है।”
गैराल्ड ब्रीज के अनुसार, “किसी समाज में औद्योगीकरण का प्रथम चरण छोटी-छोटी मशीनों के विकास पर बल देता है, जबकि अन्तिम चरण बड़ी-बड़ी मशीनों के विकास पर केन्द्रित होता है।”
फेयरचाइल्ड के शब्दों में, “औद्योगीकरण विज्ञान द्वारा प्रौद्योगिक विकास की प्रक्रिया है; इसमें शक्ति-चालित यन्त्रों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। अतः एक व्यापक बिक्री के लिए उत्पादन एवं उपयोग में आने वाली सामग्री को तैयार किया जाता है। इस बड़े पैमाने का उत्पादन श्रम-विभाजन द्वारा होता है।”

विलबर्ट ई० मूर के शब्दों में, “औद्योगीकरण से अभिप्राय आर्थिक उत्पादन के लिए अमानवीय शक्तियों को अधिक प्रयोग तथा संचार संगठन एवं अन्य व्यवस्थाओं में परिवर्तन से है।”
पी-कांग-चांग के अनुसार, “औद्योगीकरण से अर्थ उस प्रक्रिया से है जिसके अन्तर्गत उत्पादन के कार्यों में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन होते रहते हैं। इनमें वे आधारभूत परिवर्तन भी सम्मिलित किये जाते हैं जिनका सम्बन्ध किसी औद्योगिक उपक्रम के यन्त्रीकरण, नवीन उद्योगों का निर्माण, नये बाजारों की स्थापना तथा किसी नवीन क्षेत्र के विकास से है। वह एक प्रकार से पूँजी को गहन तथा व्यापक बनाने की विधि है।”

ऊपर वर्णित परिभाषाओं से स्पष्ट है कि औद्योगीकरण उद्योगों के विकास की एक प्रक्रिया है, जिसमें बड़े पैमाने पर उद्योग लगाए जाते हैं तथा हाथ से किया जाने वाला उत्पादन मशीनों से किया जाने लगता है। औद्योगीकरण शब्द का प्रयोग व्यापक एवं संकुचित दो अर्थों में हुआ है। संकुचित अर्थ में औद्योगीकरण से तात्पर्य निर्माता-उद्योगों की स्थापना एवं विकास से है। इस अर्थ में औद्योगीकरण आर्थिक विकास की प्रक्रिया का ही एक भाग है जिसका उद्देश्य उत्पादन के साधनों की कुशलता में वृद्धि करके जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना है। व्यापक अर्थ में, “औद्योगीकरण के द्वारा देश की सम्पूर्ण आर्थिक संरचना को परिवर्तित किया जा सकता है।”
औद्योगीकरण एवं नगरीकरण का पर्यावरण पर प्रभाव
औद्योगीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें लघु एवं कुटीर उद्योगों का स्थान बड़े पैमाने के उद्योग ले लेते हैं। उद्योगों में जड़ शक्ति का प्रयोग किया जाता है और उत्पादन मशीनों की सहायता से होता है। फलस्वरूप उत्पादन तीव्र गति से तथा विशाल मात्रा में होता है। औद्योगीकरण के विकास में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी ने अत्यन्त महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अन्तर्गत कोयला, विद्युत शक्ति, खनिज पदार्थ आदि की अधिकाधिक प्राप्ति तथा उनके प्रयोग पर बल दिया जाता है। छोटेछोटे उद्योगों के स्थान पर बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना अथवा बड़े पैमाने पर उद्योगों की स्थापना जिनमें प्राकृतिक संसाधनों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाता हो तथा उत्पादन कार्य मशीनों की सहायता से होता हो, उसे औद्योगीकरण कहा जाता है।

1. प्रदूषित मकानों का जन्म – उद्योगों में काम करने के लिए गाँवों से लोग हजारों की संख्या में आते हैं। परिणामस्वरूप उनके निवास की समस्या पैदा होती है। शहरों में हवा वे रोशनी वाले मकानों का अभाव होता है। मकान महँगे होने के कारण कई व्यक्ति मिलकर एक ही कमरे में रहने लगते हैं। औद्योगिक केन्द्रों में मकान, भीड़-भाड़युक्त, सीलन भरे एवं बीमारियों के घर होते हैं। औद्योगीकरण एवं नगरीकरण ने गन्दी बस्तियों की समस्या को प्रमुखत: जन्म दिया है।

2. प्रदूषित वातावरण – शहर में स्वच्छ वातावरण का अभाव होता है। मकानों में भीड़-भाड़, वायु प्रदूषण, मिल-फैक्ट्री का धुआँ, स्थान की कमी, बन्द मकान, रोशनी एवं स्वच्छ हवा का अभाव, गड़गड़ाहट एवं बहरा कर देने वाला शोरगुल, खटमल, मच्छर, आदि की अधिकता, छूत के रोग, बदबूदार एवं सीलन भरे कमरे, आदि सभी मिलकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। शहरों में मृत्यु-दर गाँव की अपेक्षा अधिक होने का यही प्रमुख कारण है। स्वच्छ वातावरण प्रदान करने एवं मनोरंजन हेतु वहाँ पार्क, बगीचों एवं खेलकूद की सुविधाएँ जुटायी जाती हैं।

3. सांस्कृतिक पर्यावरण पर प्रभाव – औद्योगीकरण एवं नगरीकरण के कारण ही यातायात एवं सन्देशवाहन के साधनों का विकास हुआ। नवीन साधनों ने विभिन्न संस्कृतियों के लोगों को एक-दूसरे के नजदीक ला दिया, उनमें पारस्परिक समझ बढ़ी, पारस्परिक आदान-प्रदान हुआ, एक-दूसरे की फैशन, वस्त्र प्रणाली, धर्म, रीति-रिवाज, जीवन विधि आदि को अपनाना सम्भव हुआ। यही कारण है कि शहरों में जो औद्योगिक केन्द्र हैं, उनमें हम विभिन्न संस्कृतियों को साथ-साथ फलते-फूलते देख सकते हैं।

17.

\(\frac{ΔTC}{Δq}\) is  .........(а) MC(b) AC (c) FC (d) VC[TC = Total Cost, q = Output, MC = Marginal Cost, AC = Average Cost, FC = Fixed Cost, VC = Variable Cost]

Answer»

 \(\frac{ΔTC}{Δq}\) is MC 

18.

क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य क्या हैं?

Answer»

क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-

1. अन्तर-क्षेत्रीय समस्याओं का क्षेत्रीय स्तर पर हल ढूँढना-क्षेत्रीय संगठन अन्तर-क्षेत्रीय समस्याओं का क्षेत्रीय स्तर पर हल ढूँढने में अन्य संगठनों की अपेक्षा अधिक कामयाब हो सकते हैं। यदि किसी क्षेत्र के किन्हीं दो राष्ट्रों में किसी मामले को लेकर विवाद है तो उसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने से दोनों देशों में कटुता बढ़ेगी। यदि क्षेत्रीय संगठन अपने सदस्य देशों के आपसी विवाद का हल ढूँढने में सफल रहते हैं तो आपस में अनावश्यक द्वेष अथवा विनाश से बचा जा सकता है।
2. संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों को सुगम करना–यदि छोटी-छोटी क्षेत्रीय समस्याओं को क्षेत्रीय संगठनों द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर ही हल कर लिया जाए तो संयुक्त राष्ट्र संघ का कार्य हल्का हो जाएगा और वह बड़ी अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में अपना समय लगा सकता है।
3. बाहरी हस्तक्षेप का मुकाबला-क्षेत्रीय संगठनों में आमतौर पर यह प्रावधान रखा जाता है कि क्षेत्र के किसी एक देश में बाहरी हस्तक्षेप होने पर संगठन के अन्य सदस्य उस देश की सहायता करेंगे और ऐसे संकट के समय समस्त क्षेत्रीय देश बाहरी हस्तक्षेप का डटकर मुकाबला करेंगे।
4. क्षेत्रीय सहयोग एवं एकता की स्थापना क्षेत्रीय संगठनों में आपसी सहयोग की भावना एवं एकता स्थापित होती है। क्षेत्र के विभिन्न देश क्षेत्रीय संगठन बनाकर आपस में राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदि क्षेत्रों में सहयोग कर लाभ उठा सकते हैं। अपने-अपने क्षेत्रों में अधिक शान्तिपूर्ण एवं सहकारी क्षेत्रीय व्यवस्था विकसित करने का प्रयास कर सकते हैं।

19.

The cost incurred by a Toys Manufacturing Company is given below. Classify the cost into fixed cost and variable cost.Rent, Wages, Insurance Premium, Electricity Charges, Cost of raw material, Salary to the Managing Director.    Fixed CostVariable Cost

Answer»
  Fixed Cost     Variable Cost
1. Rent1. Wages
2. Insurance Premium2. Cost of raw materials
3. Salary of M.D3. Cost of raw materials
20.

The relationship between input & Output is ......

Answer»

The relationship between input & Output is Production function

21.

What is clustered bar diagram?

Answer»

The diagram in which the values of a common variable and over a common base are given for rtore than one section of related parameters is known as clustered bar diagram.

22.

Give some examples ¡n which time based line diagram can be used.

Answer»

Time based line diagram can be used to show size of population in different time periods, rate of inflation in various years, literacy rate in various years, etc.

23.

Why it is very difficult or rather impossible to measure real cost?

Answer»

Over and above money used for production, real cost also includes psychological factors such as fatigue, boredom, pain, sacrifice, effect on worker’s health due to smoke emitted, polluted water released, etc. It is very difficult to measure these factors and hence

24.

Which are the three types of bar diagram?

Answer»
  1. Simple bar diagram,
  2. Clustered diagram, and
  3. Divided bar diagram]
25.

Explain monetary cost.

Answer»

Monetary cost:

Generally, the amount that the producer pays monetarily for the process of production is called its monetary cost. Thus, the cost of production in terms of money is known as monetary cost. Monetary cost includes wages, rent, raw material, fuel and the total of all the expenditure made by the producer.

Example:

  • If a factory producing pens incur the cost of ₹ 50,000 to produce 1000 units of pen, the monetary cost to produce 1,000 units of pen is ₹ 50,000.
  • Real cost and opportunity cost have many limitations which make their calculation very difficult. Hence, the concept of monetary cost is widely used in economic analysis, for decisions related to production and in price determination. Since cost of production is calculated in terms of money, the concept of monetary cost is important.
26.

When production is zero then which cost is positive?(A) Monetary cost(B) Average cost(C) Variable cost(D) Fixed cost

Answer»

Correct option is (C) Variable cost

27.

State the importance of marginal cost in economics.

Answer»
  • It helps to decide optimum sales price,
  • To study effect on profit,
  • To take decision of selling products at different prices to different customers, etc.
28.

What is a Subscription?

Answer»

Subscription is the periodical payment made by the members to the ‘Not for Profit’ concern for maintaining their membership.

29.

Which cost cannot be measured?(A) Real cost(B) Monetary cost(C) Opportunity cost(D) Long run cost

Answer»

Correct option is (A) Real cost

30.

Give the meaning simple bar diagram.

Answer»

A simple bar diagram represents values of only one variable over a base, say various regions or years etc.

31.

Explain the concept of opportunity cost, problems faced in measuring it and factors affecting it.

Answer»

Opportunity cost:

  • The concept of opportunity cost was presented by Austrian economist but it was properly presented by Marshall. We know that the means of production have alternative uses i.e. more than one use. The concept of opportunity cost is based on the particular characteristic of factor of production which says that when a factor is used for a particular use, the other use is left out or the same cannot be used for other purpose. Under such circumstances, the best alternative which remains is the opportunity cost of production.
  • If a factor of production is used in the production of one commodity which seems the best, the next best or say the second best alternative is left out.
  • Assuming the best choice is made, opportunity cost is the ‘cost’ incurred by not enjoying the benefit that would have been had by taking the second best available choice

Example:
(a) If someone is producing wheat on one piece of land, then at the same time on the same piece of land other food grain (crop) cannot be produced.

(b) A worker working in textile mill cannot at the same time work in any other industry.

  • Suppose if wheat is produced on a piece of land one can earn an income of ₹ 2 lakh can be earned and if rice is produced the income of ₹ 3.5 lakh can be earned.
  • The farmer decides produce rice in which he earns more.
  • So, to get the income of ₹ 3.5 lakh from the production of rice, farmer loses out income of ₹ 2 lakh from the production of wheat. This left out income of ₹ 2 lakh from the production of wheat is called the opportunity cost of ₹ 3.5 lakh earned from the production of rice.

Problems in measuring opportunity cost:
(I) Factors with one use:
If a factor of production has only one use then its opportunity cost cannot be decided.

Example:
(a) Suppose if a piece of land is used only to produce grass so far than we cannot calculate the opportunity cost of that land.
(b) The same applies for a person who is currently unemployed. Since the person does not have any work how can we calculate alternative cost?

(II) Factors having specific use:
-If factors of production have only a specific use then the concept of opportunity cost is not useful. Returns of these factors are not decided by their alternative uses but on the basis of their demand.

Example:
(a) Persons having expertise over computers, scientist having knowledge of atomic power, etc. These people do not know any other work except their own.
(b) Machine for making ice can only produce ice i.e. it has no alternative use and so no opportunity cost is involved.

32.

Who presented the concept of opportunity cost?(A) A Dutch researcher(B) A German teacher(C) An Austrian economist(D) A Management professor

Answer»

Correct option is (C) An Austrian economist

33.

What is time-based line diagram?

Answer»

Time based line diagram is a diagram in which pictures show the shape or slope of a relationship in economics between two variables. For example, demand curve, supply curve, etc.

34.

Which factors are included in real cost over and above money.

Answer»

Mental factors such as fatigue, boredom tension, stress, faced by the labourers, the anxiety faced by entrepreneur or investors who risk their saving and capital, insecurity of wrong decisions, etc. are also the factors included in the real cost.

35.

‘If a factor of production has only one use than its, opportunity cost cannot be decided’. Give one example that justifies this statement.

Answer»

Example to justify this statement is: Suppose if a piece of land is used only to produce grass so far than we cannot calculate the opportunity cost of that land.

36.

List down two importance of diagrams and graphs in economics.

Answer»
  1. Trends of certain economic parameters over various years can be observed through a single diagram or graphs.
  2. Changes occurring in vanous sectors of the economy can also be easily understood with the help of diagrams and graphs.
37.

आज की चीनी अर्थव्यवस्था नियन्त्रित अर्थव्यवस्था से किस तरह अलग है?

Answer»

आर्थिक सुधारों के प्रारम्भ करने से चीन सबसे अधिक तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रहा है और माना जाता है कि इस गति से चलते सन् 2040 तक चीन दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति, अमेरिका से भी आगे निकल जाएगा। क्षेत्रीय मामलों में उसका प्रभाव बहुत बढ़ गया है। आज की चीनी अर्थव्यवस्था पहले की नियन्त्रित अर्थव्यवस्था से किस प्रकार अलग है, इसे निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत समझा जा सकता है

1. आर्थिक सुधारों के हेतु खुले द्वार की नीति-सन् 1949 में माओ के नेतृत्व में हुई साम्यवादी क्रान्ति के बाद चीनी जनवादी गणराज्य की स्थापना के समय यहाँ की आर्थिक रूपरेखा सोवियत मॉडल पर आधारित थी। इसका जो विकास मॉडल अपनाया उसमें खेती से पूँजी निकालकर सरकारी नियन्त्रण में बड़े उद्योग खड़े करने पर जोर था। परन्तु इसका औद्योगिक उत्पादन पर्याप्त तेजी से नहीं बढ़ रहा था। विदेशी व्यापार न के बराबर था और प्रति व्यक्ति आय काफी कम थी।

चीनी नेतृत्व ने 1970 के दशक में बड़े नीतिगत निर्णय लिए। सन् 1972 में अमेरिका से सम्बन्ध बनाकर अपने राजनीतिक और आर्थिक एकान्तवाद को समाप्त किया। सन् 1978 में तत्कालीन नेता देंग श्याओपेंग ने चीन में आर्थिक सुधारों और खुले द्वार की नीति की घोषणा की। अब नीति यह हो गयी कि विदेशी पूँजी और प्रौद्योगिकी के निवेश से उच्चतर उत्पादकता को प्राप्त किया जाए। बाजारमूलक अर्थव्यवस्था को अपनाने के लिए चीन ने अपना तरीका अपनाया।

2. खेती एवं उद्योगों का निजीकरण–चीन ने शॉक थेरेपी पर अमल करने के स्थान पर अपनी अर्थव्यवस्था को चरणबद्ध ढंग से खोला। सन् 1982 में खेती का निजीकरण किया गया और उसके बाद 1998 में उद्योगों के व्यापार सम्बन्धी अवरोधों को केवल विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए ही हटाया गया वहाँ विदेशी निवेशक अपने उद्यम लगा सकते हैं।

3. कृषि और उद्योग दोनों का विकास-आज की चीनी अर्थव्यवस्था को मूल रूप से उभरने का अवसर मिला है। कृषि के निजीकरण के कारण कृषि उत्पादों तथा ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उद्योग और कृषि दोनों ही क्षेत्रों में चीन की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर तेज रही। व्यापार के नए कानून तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (स्पेशल इकॉनामिक जोन-SEZ) के निर्माण से विदेशी व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा कृषि और उद्योगों के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

4. विश्व व्यापार संगठन में शामिल-राज्य द्वारा नियन्त्रित अर्थव्यवस्था वाला देश चीन आज पूरे विश्व में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए सबसे आकर्षक देश बनकर उभरा है। चीन के पास विदेशी मुद्रा का विशाल भण्डार है और इसके दम पर चीन दूसरे देशों में निवेश कर रहा है। चीन 2001 में विश्व व्यापार संगठन में शामिल हो गया। अब चीन की योजना विश्व आर्थिकी से अपने जुड़ाव को और गहरा करके भविष्य की विश्व व्यवस्था का एक मनचाहा रूप देने की है।

चीन की आर्थिक स्थिति में तो नाटकीय सुधार हुआ लेकिन वहाँ हर किसी को सुधारों का लाभ नहीं मिला है। वहाँ महिलाओं को रोजगार और काम करने के हालात उतने ही खराब हैं जितने यूरोप में 18वीं और 19वीं सदी में थे। गाँव और शहर के बीच भी फासला बढ़ता जा रहा है। परन्तु क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर चीन एक ऐसी जबरदस्त आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है कि सभी उसका लोहा मानने लगे हैं। इसी स्थिति के कारण जापान, अमेरिका और आसियान तथा रूस सभी व्यापार के आगे चीन से बाकी विवादों को भुला चुके हैं। आशा की जाती है कि चीन और ताइवान के मतभेद भी खत्म हो जाएंगे। सन् 1997 में वित्तीय संकट के बाद आसियान देशों की अर्थव्यवस्था को टिकाए रखने में चीन के उभारने में काफी मदद की है। इसकी नीतियाँ बताती हैं कि विकासशील देशों के मामले में चीन एक नई विश्वशक्ति के रूप में उभरता जा रहा है।

38.

What is Capital Fund?

Answer»

In case of not-for profit organisations, excess of assets over liabilities is called capital fund. It is similar to the capital account in case of profit-making entities. Any surplus/ deficit shown by the Income and Expenditure Account will be added/ deducted from the opening capital and the net capital fund will be shown on the Liabilities side.

39.

State whether the following statement are True or False.An interest on capital is an expenditure of the partnership firm.OptionsTrueFalse

Answer»

True.

Explanation: Money invested by the partners in a business is regarded as partners’ capital. Any interest paid on such capital will be an income for the partners and an expense for the firm. Hence, the above statement is true.

40.

Which aspect is not include in physical quality of life?(A) Housing and clothing(B) Calories, fats and proteins consumed(C) Entertainment(D) Number of holidays per year

Answer»

Correct option is (D) Number of holidays per year

41.

Name four aspect of physical quality of life.

Answer»
  1. Food (Calories, protein fats) Proportion,
  2. Health and Medical services (Proportion of doctor to population)
  3. Housing and clothing (Number of rooms in a house, average number of people lMng in each room) and
  4. Average life expectancy.]
42.

Which type of frequency distribution is presented for data using diagram?

Answer»

Discrete frequency distribution of data is presented by a diagram.

43.

What do you mean by ‘Not for Profit’ concerns?

Answer»

Organisations that are formed not to earn profit but to render services to their members and to the public are known as not-for profit organisations. For example, aided schools, clubs, societies etc.

44.

What is fixed capital account method ?

Answer»

A method of partners capital under which no change is reported in opening balance and closing balance in the partners capital account is known as fixed capital account method.

45.

Why does a data table and source of data accompany a diagram or graph?

Answer»

A data table and source of data should accompany a diagram/graph to increase the reliability and authenticity of the graph diagram.

46.

When can one say that the physical quality of life has improved?

Answer»

When the 10 aspects or determinants of physical quality of life improve we can say that there is improvement in the physical quality of human life.

47.

How many types of relations exist between average cost and marginal cost?(A) 1(B) 2(C) 3(D) Many

Answer»

Correct option is (C) 3

48.

How many types of different concepts of cost are there? Name them?

Answer»

Three:

  1. Real cost
  2. Opportunity cost and
  3. Monetary cost.
49.

State the problems experienced in calculating true national income

Answer»

Problems of double counting, products produced for self-consumption, difficulties in calculating depreciation, illegal income, tax avoidance, tax evasion, barter transactions, illiteracy, employment of occupation, etc. are few of the problems experienced

50.

State whether the following statement are True or False.There is no limit to maximum number of partners in a firm.OptionsTrueFalse

Answer»

False.

Explanation: The Companies Act of 1956 specifies the maximum limit of partners in a firm as 10 in case of banking business and 20 in case of any other business. Hence, the given statement is false.