Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

व्याख्या कीजिए −दुनिया की सारी गंदगी के बीच दुनिया की सारी खुशबू रचते रहते हैं हाथ

Answer»

कवि कहता है कि खुशबु रहने वाले हाथ अर्थात अगरबत्ती बनाने वाले लोग स्वयं कितने गंदे वातावरण में रहते हैं, इसकी कल्पना करना भी कठिन है। इस गंदगी में रहकर भी इनके हाथ में कमाल का जादू है ये खुशबूदार अगरबत्तियों को बनाते हैं।

2.

'वसंत का गया पतझड़' और 'बैसाख का गया भादों को लौटा' से क्या अभिप्राय है?

Answer»

कवि ने इस पंक्तियों में तेजी से बदलते दुनिया की ओर इशारा किया है। वे बताते हैं कि जब वो नए बसते इलाके में कुछ दिनों बाद आते हैं तो उन्हें हर चीज़ नयी मालूम पड़ती है। उन्हें लगता है वो सालों बाद आये हैं।

3.

कवि ने यह क्यों कहा है कि 'खुशबू रचते हैं हाथ'?

Answer»

कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि अगरबत्ती जिसका प्रयोग सुंगध फैलाने के लिए किया जाता है का निर्माण हाथों द्वारा किया जाता है।

4.

नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है?

Answer»

नए बसते इलाके में प्रतिदिन नए मकान बनते चले जा रहे हैं। इन मकानों के बनने से पुराने पेड़, खाली ज़मीन, टूटे-फूटे घर सब कुछ खत्म हो गए हैं।  कवि अपने ठिकाने पर पहुँचने के लिए निशानियाँ बनाता है, वे जल्दी मिट जाती हैं। इसीलिए कवि रास्ता भूल जाता है।

5.

कवि एक घर पीछे या दो घर आगे क्यों चल देता है?

Answer»

कवि एक घर पीछे या दो घर आगे इसलिए चल देता है क्योंकि नए इलाके में प्रतिदिन परिवर्तन आ रहे हैं। उसकी पुरानी पहचान करने की निशानियाँ मिट जाती हैं।

6.

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन में भारत की भूमिका को समझाते हुए आलोचनात्मक विवेचन कीजिए।

Answer»

गुटनिरपेक्षता का अर्थ - गुटनिरपेक्षता का अर्थ है दोनों महाशक्तियों के गुटों से अलग रहना। यह महाशक्तियों के गुटों में शामिल न होने तथा अपनी स्वतन्त्र विदेश नीति अपनाते हुए विश्व राजनीति में शान्ति और स्थिरता के लिए सक्रिय रहने का आन्दोलन है। न यह तटस्थता है और न पृथक्तावाद। अतः गुटनिरपेक्षता का अर्थ है किसी भी देश को प्रत्येक मुद्दे पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने की स्वतन्त्रता और राष्ट्रीय हित एवं विश्वशान्ति के आधार पर गुटों से अलग रहते हुए निर्णय लेने की स्वतन्त्रता।

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक-गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की जड़ में यूगोस्लाविया के जोसेफ ब्रॉज टीटो, भारत के जवाहरलाल नेहरू और मिस्र के गमाल अब्दुल नासिर प्रमुख थे। इण्डोनेशिया के सुकर्णो और घाना के वामे एनक्रूना ने इनका जोरदार समर्थन किया। ये पाँच नेता गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक कहलाए।

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन में भारत की भूमिका
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन में भारत की भूमिका को निम्न प्रकार स्पष्ट किया गया है-

⦁    गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का संस्थापक-भारत गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का संस्थापक सदस्य रहा है। भारत के प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्षता की नीति का प्रतिपादन किया।
⦁    स्वयं को महाशक्तियों की खेमेबन्दी से अलग रखा-शीतयुद्ध के दौर में भारत ने सजग और सचेत रूप से अपने को दोनों महाशक्तियों की खेमेबन्दी से दूर रखा।
⦁    नव-स्वतन्त्र देशों को आन्दोलन में आने के लिए प्रेरित किया—भारत ने नव-स्वतन्त्र देशों को महाशक्तियों के खेमे में जाने का पुरजोर विरोध किया तथा उनके समक्ष तीसरा विकल्प प्रस्तुत करके उन्हें गुटनिरपेक्ष आन्दोलन का सदस्य बनाने के लिए प्रेरित किया।
⦁    विश्वशान्ति और स्थिरता के लिए गुटनिरपेक्ष आन्दोलन को सक्रिय रखना-भारत ने गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के नेता के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप की नीति अपनाने पर बल दिया।
⦁    वैचारिक एवं संगठनात्मक ढाँचे का निर्धारण-गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के वैचारिक एवं संगठनात्मक ढाँचे के निर्धारण में भारत की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है।
⦁    समन्वयकारी भूमिका-भारत ने समन्वयकारी भूमिका निभाते हुए सदस्यों के बीच उठे विवादास्पद मुद्दों को टालने या स्थगित करने पर बल देकर आन्दोलन को विभाजित होने से बचाया।

भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति का आलोचनात्मक विवेचन
भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति का आलोचनात्मक विवेचन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत किया गया है-

(I) भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति के लाभ
गुटनिरपेक्षता की नीति ने निम्नलिखित क्षेत्रों में भारत का प्रत्यक्ष रूप से हित साधन किया है-

1. राष्ट्रीय हित के अनुरूप फैसले-गुटनिरपेक्षता की नीति के कारण भारत ऐसे अन्तर्राष्ट्रीय फैसले और पक्ष ले सका जिससे उसका हित सधता था, न कि महाशक्तियों और उनके खेमे के देशों का।
2. अन्तर्राष्ट्रीय जगत् में अपने महत्त्व को बनाए रखने में सफल-गुटनिरपेक्ष नीति अपनाने के कारण भारत हमेशा इस स्थिति में रहा कि अगर भारत को महसूस हो कि महाशक्तियों में से कोई उसकी अनदेखी कर रहा है या अनुचित दबाव डाल रहा है, तो वह दूसरी महाशक्ति की तरफ अपना रुख कर सकता था। दोनों गुटों में से कोई भी भारत सरकार को लेकर न तो बेफिक्र हो सकता था और न ही दबाव डाल सकता था।

(II) भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति की आलोचना
भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति की निम्नलिखित कारणों से आलोचना की गई है-

1. सिद्धान्त विहीन नीति-भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति सिद्धान्त विहीन है। कहा जाता है कि भारत अपने हितों को साधने के नाम पर अक्सर महत्त्वपूर्ण मामलों पर कोई सुनिश्चित पक्ष लेने से बचता रहा है।
2. अस्थिर नीति–भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति में अस्थिरता रही है।

7.

“गुटनिरपेक्ष आन्दोलन अब अप्रासंगिक हो गया।” आप इस कथन के बारे में क्या सोचते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क प्रस्तुत करें।

Answer»

गुटनिरपेक्षता की नीति शीतयुद्ध के सन्दर्भ में सामने आई थी। शीतयुद्ध के अन्त और सोवियत संघ के विघटन से एक अन्तर्राष्ट्रीय आन्दोलन और भारत की विदेश नीति की मूल भावना के रूप में गुटनिरपेक्षता की प्रासंगिकता तथा प्रभावकारिता में कमी आयी।

सोवियत संघ के विघटन के बाद विश्व एकध्रुवीय बन चुका है। सन् 1992 में इण्डोनेशिया में दसवें शिखर सम्मेलन में अधिकतर सदस्यों ने गुटनिरपेक्ष आन्दोलन को जारी रखने के साथ-साथ इसके उद्देश्यों को परिवर्तित करने पर जोर दिया।

गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की वर्तमान प्रासंगिकता
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की वर्तमान प्रासंगिकता को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

⦁    गुटनिरपेक्षता इस बात की पहचान पर टिकी है कि उपनिवेश की स्थिति से आजाद हुए देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव है और यदि ये देश साथ आ जाएँ तो एक शक्ति बन सकते हैं।
⦁    गुटनिरपेक्षता की नीति के कारण किसी भी गरीब और छोटे देश को किसी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने की आवश्यकता नहीं है।
⦁    कोई भी देश अपनी स्वतन्त्र विदेश नीति अपना सकता है।
⦁    गुटनिरपेक्ष देशों को आज भी आपसी सहयोग की दृष्टि से इस मंच की आवश्यकता है।
⦁    संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रभाव से मुक्त रहने के लिए इन निर्गुट राष्ट्रों का आपसी सहयोग आवश्यक है।
⦁    यह नीति आज भी गुटनिरपेक्ष देशों को सुरक्षा प्रदान करती है साथ ही विश्व में नि:शस्त्रीकरण की आवश्यकता पर बल देती है।
⦁    वास्तव में गुटनिरेपक्ष आन्दोलन मौजूद असमानताओं से निपटने के लिए एक वैकल्पिक विश्व व्यवस्था बनाने और अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था को लोकतन्त्रधर्मी बनाने के संकल्प पर भी टिका है। अतः शीतयुद्ध के बाद भी यह आन्दोलन प्रासंगिक है।

8.

कवि ने इस कविता में 'बहुवचन' का प्रयोग अधिक किया है। इसका क्या कारण है?

Answer»

कवि ने इस कविता में किसी ख़ास एक व्यक्ति का वर्णन नही किया है बल्कि एक समाज का वर्णन किया है इस कारण इस कविता में 'बहुवचन' का प्रयोग अधिक किया है।

9.

इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Answer»

इस कविता को लिखने का मुख्य उद्देश्य गरीब मज़दूरों की दयनीय दशा की ओर ध्यान आकर्षित करना है। इस प्रकार कवि उनके उद्धार के प्रति चेतना जाग्रत करना चाहता है। वह चाहता है कि इन श्रमिकों की दयनीय दशा को सुधारा जाए, इनके रहने की दशा को स्वास्थ्यप्रद बनाया जाए।

10.

कवि ने हाथों के लिए कौन-कौन से विशेषणों का प्रोयग किया है।

Answer»

कवि ने हाथों के लिए निम्नलिखित विशेषणों का प्रोयग किया है −  

1. उभरी नसों वाले हाथ 

2. गंदे नाखूनों वाले हाथ 

3. पत्तों से नए हाथ 

4. खुशबूदार हाथ 

5. गंदे कटे पिटे हाथ 

6. फटे हुए हाथ 

7. खुशबू रचते हाथ

11.

कविता में कौन-कौन से पुराने निशानों का उल्लेख किया गया है?

Answer»

इस कविता में पीपल का पेड़, ढहा हुआ घर, ज़मीन का खाली टुकड़ा, बिना रंग वाले लोहे के फाटक वाला मकान आदि पुराने निशानों का उल्लेख है। 

12.

“गुटनिरपेक्ष आन्दोलन द्विध्रुवीय विश्व के समक्ष चुनौती था।” इस कथन को न्यायोचित ठहराइए।

Answer»

उक्त कथन को निम्नलिखित बिन्दुओं के द्वारा न्यायोचित ठहराया जा सकता है-

⦁    विश्व की दोनों महाशक्तियाँ नव-स्वतन्त्रता प्राप्त तीसरे विश्व के अल्पमत विकसित देशों को लालच देकर दबाव बनाकर तथा समझौतों का प्रलोभन देकर उनको अपने-अपने गुट में मिलाने हेतु लालायित थे।
⦁    गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के संस्थापक सदस्यों में एशिया के पं० जवाहरलाल नेहरू तथा सुकर्णो तथा अफ्रीका के वामे एनक्र्मा थे। ये सभी तीसरी दुनिया के प्रतिनिधि देश थे और इन्होंने परतन्त्रता का स्वाद चखा था।
⦁    शीतयुद्ध के दौरान महाशक्तियों द्वारा पश्चिम के अनेक देशों पर हमले किए गए थे। ऐसी विषम परिस्थितियों में गुटनिरपेक्ष आन्दोलन को अनवरत चलाए रखना स्वयं में काफी चुनौतीपूर्ण कार्य था। ।
⦁    पाँच सदस्य देशों से अपना सफर शुरू करने वाले गुटनिरपेक्ष देशों ने अपनी सदस्य संख्या 120 कर ली है। इतनी बड़ी संख्या में अपने समर्थक बनाना भी अत्यन्त चुनौतीपूर्ण कार्य है।

13.

इस कविता में कवि ने शहरों को किस विडंबना की ओर संकेत किया है?

Answer»

इस कविता में कवि ने शहरों की इस विडंबना की ओर संकेत किया है कि जीवन की सहजता समाप्त होती जा रही है, बनावटी चीज़ों के प्रति लोगों का लगाव बढ़ता जा रहा है। सब आगे निकलना चाहते हैं, आपसी प्रेम, आत्मियता घटती जा रही है। लोगों की और रहने के स्थान की पहचान खोती जा रही है। स्वार्थ केन्द्रित लोगों के पास दूसरे के लिए समय ही नहीं है। आज की चीज़ कल पुरानी पड़ जाती है, कुछ भी स्थाई नहीं है।

14.

शीतयुद्ध को बढ़ावा देने में अमेरिका किस प्रकार जिम्मेदार था?

Answer»

शीतयुद्ध को बढ़ावा देने में अमेरिका निम्नलिखित कारणों से जिम्मेदार था-

⦁    अणु बम का रहस्य गुप्त रखना-अमेरिका ने अणु बम के रहस्य को सोवियत संघ से गुप्त रखा। इस बात से क्षुब्ध होकर सोवियत संघ अस्त्र-शस्त्र बनाने में लग गया तथा कुछ ही वर्षों में अणु बम का आविष्कार कर लिया। इसके बाद तो दोनों में शस्त्रास्त्रों की होड़ लग गई।
⦁    रूस विरोधी प्रचार-युद्ध काल में ही पश्चिमी देशों के सूचना प्रसार के संसाधन रूस विरोधी प्रचार करने लग गए थे। बाद में इन देशों ने खुले आम सोवियत संघ की आलोचना करनी आरम्भ कर दी। उसके विरुद्ध मित्र राष्ट्रों का यह प्रचार शीतयुद्ध को बढ़ावा देने का कारण बना।
⦁    अमेरिका का जापान पर अधिकार ज़माने का कार्यक्रम-जापान पर अमेरिका द्वारा अणु बम के प्रयोग के बाद रूस को शक हो गया कि अमेरिका जापान पर अपना अधिकार जमाए रखना चाहता है। इससे दोनों देशों में तनाव हो गया।

15.

शीतयुद्ध के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?(क) यह संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और उनके साथी देशों के बीच की एक प्रतिस्पर्धा थी।(ख) यह महाशक्तियों के बीच विचारधाराओं को लेकर एक युद्ध था।(ग) शीतयुद्ध ने हथियारों की होड़ शुरू की।(घ) अमेरिका और सोवियत संघ सीधे युद्ध में शामिल थे।

Answer»

(घ) अमेरिका और सोवियत संघ सीधे युद्ध में शामिल थे।

16.

शीतयुद्ध के दौरान भारत की अमेरिका और सोवियत संघ के प्रति विदेश नीति क्या थी? क्या आप मानते हैं कि इस नीति ने भारत के हितों को आगे बढ़ाया?

Answer»

स्वतन्त्रता के पश्चात् तथा शीतयुद्ध के अन्त (1991) तक भारत की अमेरिका और सोवियत संघ के प्रति विदेश नीति अलग-अलग रही।

भारत द्वारा गुटनिरपेक्ष नीति को अपनाने के कारण प्रारम्भ से ही अमेरिका भारत से नाराज रहा और भारत के विरुद्ध पाकिस्तान को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करता था। जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमन्त्री के रूप में कार्यकाल से लेकर विश्वनाथ प्रताप सिंह एवं चन्द्रशेखर के प्रधानमन्त्री के रूप में कार्यकाल तक (शीतयुद्ध की समाप्ति तक) अमेरिका के साथ भारत के विशेष सम्बन्ध नहीं रहे। हालाँकि इस दौरान समय-समय पर अमेरिका ने भारत के साथ सम्बन्धों में थोड़ा-बहुत सुधार अवश्य किया, परन्तु वह पाकिस्तान को निरन्तर सैन्य सहायता देता रहा, यद्यपि अमेरिका ने पाकिस्तान की कश्मीर में घुसपैठ की निन्दा की, परन्तु इसके पीछे भी उसकी सोची-समझी कूटनीतिक चाल थी।

शीतयुद्ध के दौरान भारत और सोवियत संघ के सम्बन्ध मधुर रहे। भारत और सोवियत संघ निरन्तर एकदूसरे को सहयोग करते रहे। सोवियत संघ में बड़े पैमाने पर ‘भारत महोत्सव’ का आयोजन किया गया।

भारत द्वारा अपनाई गई गुटनिरपेक्ष नीति ने भारत के हितों को आगे बढ़ाया। इस नीति के कारण भारत ऐसे निर्णय ले सका जिससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उसके हितों की पूर्ति हो सकी। साथ ही वह सदैव ऐसी स्थिति में रहा कि यदि कोई एक महाशक्ति उसका अथवा उसके हितों का विरोध करे तो दूसरी महाशक्ति उसको सहयोग करती। स्पष्ट है कि शीतयुद्ध के दौरान भारत अपने हितों के लिए लगातार सजग रहा।

17.

शीतयुद्ध से हथियारों की होड़ और हथियारों पर नियन्त्रण ये दोनों ही प्रक्रियाएँ पैदा हुईं। इन दोनों प्रक्रियाओं के क्या कारण थे?

Answer»

शीतयुद्ध के दौरान पूँजीवादी तथा साम्यवादी दोनों ही गुटों के बीच प्रतिस्पर्धा एवं प्रतिद्वन्द्विता समाप्त नहीं हुई थी। इसी वजह से परस्पर अविश्वास की परिस्थितियों में दोनों गठबन्धनों ने हथियारों का भारी भण्डारण करते हुए लगातार युद्ध की तैयारियाँ की। दोनों ही गुट अपने-अपने अस्तित्व की रक्षा हेतु हथियारों के बड़े जखीरे को आवश्यक समझते थे। चूँकि दोनों ही गुट परमाणु हथियारों से लैस थे तथा वे इसके प्रयोग के दुष्परिणामों से भली-भाँति परिचित भी थे। दोनों महाशक्तियाँ जानती थीं कि यदि प्रत्यक्ष युद्ध लड़ा गया तो दोनों को भारी नुकसान होगा और इनमें से किसी के भी विश्व विजेता बनने की सम्भावनाएँ काफी कम हैं। अत: दोनों महाशक्तियों ने हथियारों पर नियन्त्रण के लिए अस्त्र-शस्त्रों की प्रतिस्पर्धा को समाप्त करने के प्रयास किए।

18.

प्रकृति में आए असंतुलन को क्या परिणाम हुआ?

Answer»

प्रकृति में आए असंतुलन का दुष्परिणाम बहुत ही भयंकर हुआ; जैसे- 

• विनाशकारी समुद्री तूफ़ाने आने लगे। 

• अत्यधिक गरमी पड़ने लगी। 

• असमय बरसातें होने से जन-धन और फ़सलें क्षतिग्रस्त होने लगीं। 

• आधियाँ और तूफ़ान आने लगीं। 

• नए-नए रोग उत्पन्न हो गए, जिससे पशु-पक्षी असमय मरने लगे।

19.

लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा?

Answer»

लेखक की माँ धार्मिक विचारों वाली महिला थी। वे मनुष्य से ही नहीं पशु-पक्षियों तक से प्रेम करती थीं। उनके घर की दालान में कबूतर ने दो अंडे दिए थे। उनमें से एक अंडा बिल्ली ने गिराकर फोड़ दिया था। दूसरा अंडा सँभालते समय उनके हाथ से टूट गया। अंडा टूटने का पछतावा करने के लिए उन्होंने पूरे दिन का रोज़ा रखा।

20.

डेरा डालने से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

Answer»

डेरा डालने का आशय है-अपने रहने की व्यवस्था करना। जिस तरह मनुष्य जब कहीं बाहर जाता है तो अपने रहने का ठिकाना बनाता है। इसी प्रकार पक्षी भी रहने और अंडे देने तथा बच्चों की देखभाल के लिए डेरा डालते हैं।

21.

जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।

Answer»

इतिहास गवाह रहा है कि बड़े लोग प्रायः शांत स्वभाव वाले उदार और महान होते हैं। वे क्रोध से दूर ही रहते हैं। उनकी सहनशीलता भी अधिक होती है परंतु जब उन्हें क्रोध आता है तो यह क्रोध विनाशकारी होता है। यही स्थिति विशालाकार समुद्र की होती है जो पहले तो सहता जाता है, सहता जाता है परंतु क्रोधित होने पर भारी तबाही मचाता है।

22.

लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

Answer»

लेखक ने ग्वालियर से मुंबई तक अनेक बदलाव देखे-

• उसके देखते-देखते बहुत सारे पेड़ कट गए। 

• नई-नई बस्तियाँ बस गईं। 

• चौड़ी सड़कें बन गईं। 

• पशु-पक्षी शहर छोड़कर भाग गए। जो बच गए उन्होंने जैसे-तैसे यहाँ-वहाँ घोंसला बना लिया।

23.

नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।

Answer»

प्रकृति अत्यंत सहनशील और उदार स्वभाववाली है। वह मनुष्य की ज्यादतियों और छेड़छाड़ को एक सीमा तक सहन करती है पर जब पानी सिर के ऊपर हो जाता है तब प्रकृति अपनी विनाशलीला दिखाना शुरू करती है। इस क्रोध में जो भी उसके सामने आता है, वह किसी को नहीं छोड़ती है। प्रकृति ने समुद्री तूफ़ान का रूप धारण कर अपने सीने पर तैरते तीन जहाजों को उठाकर समुद्र से बाहर फेंक दिया।

24.

‘मट्टी से मट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान’ इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।

Answer»

इन पंक्तियों के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि सब प्राणियों की रचना अनेक तरह की मिट्टियों से हुई है, पर ये मिट्टियाँ आपस में मिलकर अपनी स्वाभाविकता रंग-गंध आदि खो चुकी हैं। अब वे सब मिलकर एक हो चुकी हैं। अब किस व्यक्ति में कौन-सी किस्म की मिट्टी कितनी है, इसकी पहचान कैसे की जाए। इसी तरह मनुष्य में भी सद्गुणों और दुर्गुणों का मेल है। किसमें कितना सद्गुण है और कितना दुर्गुण है यह कह पाना कठिन है।

25.

गांधी जी ने समाजवाद का सबसे बड़ा विद्वान किसको माना?

Answer»

गांधी जी ने समाजवाद का सबसे बड़ा विद्वान जयप्रकाश नारायण को माना।

26.

जयप्रकाश नारायण के माता-पिता का नाम बताइए।

Answer»

जयप्रकाश नारायण के माता का नाम श्री मति फूलरानी तथा पिता का नाम हरसूदयाल था।

27.

जयप्रकाश नारायण का जन्म कब और कहाँ हुआ?

Answer»

जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर, 1902 को बिहार के सिताबदिलारा गाँव, (अब उ०प्र०) में हुआ था।

28.

इन्दिरा जी के किन गुणों ने आपको सर्वाधिक प्रभावित किया?

Answer»

इन्दिरा जी के प्रमुख गुण-निर्भीकता, आत्मविश्वास, धैर्य, साहस और राजनैतिक कुशलता ने हमें बहुत प्रभावित किया है।

29.

प्रधानमंत्री के रूप में इन्दिरा जी की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

प्रधानमंत्री के रूप में इन्दिरा जी अनेक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम चलाए। उन्होंने देश की दुखती रग को समझा और गरीबी हटाओ का नारा दिया। बीस सूत्रीय कार्यक्रमों द्वारा उन्होंने अनेक उपलब्धियाँ अर्जित कीं। विज्ञान और तकनीकी विकास के साथ परमाणु शक्ति का विकास हुआ तथा देश अन्तरिक्ष युग में पहुँचा।

30.

“वानर सेना’ किस प्रकार स्वतन्त्रता सेनानियों की सहायता करती थी?

Answer»

‘वानर सेना के बालक स्वतन्त्रता सेनानियों को संदेश पहुँचाकर, प्राथमिक सहायता देकर, खाने की व्यवस्था करके तथा झण्डा फहराकर सहायता करते थे।

31.

जयप्रकाश नारायण के राष्ट्रवाद पर क्या विचार थे? वर्णन कीजिए।

Answer»

वे सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र के आमूल परिवर्तन के पक्षधर थे। वे समाजवाद के समर्थक थे। उनकी दृष्टि में समाजवाद का उद्देश समाज को समन्वित विकास करना था। समाजवाद के संबंध में उनके विचार थे कि भारतीय संस्कृति के मूल्लों को सुरक्षित रखते हुए भी हम देश में समाजवाद ला सकते हैं क्योंकि भारतीय पंरपराएँ कभी भी शोषणवादी नहीं रहीं हैं।

जय प्रकाश नारायण के समग्र जीवन दर्शन से स्पस्ट है कि वे ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के वास्तविक पोषक थे।

32.

पं० नेहरू, इन्दिरा जी को किस प्रकार की शिक्षा देना चाहते थे? इसके लिए उन्होंने क्या किया?

Answer»

पं० नेहरू, इन्दिरा जी को ऐसी शिक्षा देना चाहते थे, जिससे उनका बहुमुखी विकास हो। इसके लिए उन्होंने अपनी पुत्री से पत्रों द्वारा सम्पर्क बनाए रखा और उस पर अपने व्यक्तित्व की छाप छोड़ी।

33.

कला-सम्बद्ध स्रोतों से आप क्या समझते हैं? 

Answer»

ऐसे दो स्रोतों को जिनके बीच कलान्तर सदैव नियत रहता है, कला-सम्बद्ध स्रोत (coherent sources) कहते हैं। दो कला-सम्बद्ध स्रोतों से हम स्थायी (sustained) व्यतिकरण प्रतिरूप प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे स्रोत किसी युक्ति द्वारा एक ही स्रोत से प्राप्त किये जाते हैं।

34.

ऐसी दो भौतिक घटनाओं का उल्लेख कीजिए जो प्रकाश की तरंग प्रकृति की पुष्टि करती हैं।

Answer»

व्यतिकरण तथा विवर्तन।

35.

सुचालक तथा कुचालक पदार्थों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Answer»
  • जिन पदार्थों से ऊष्मा का संचरण सुगमतापूर्वक होता है, उन्हें ऊष्मा का सुचालक कहते हैं; जैसे- लोहा, ऐलुमिनियम, ताँबा आदि।
  • जिन पदार्थों में ऊष्मा का संचरण सुगमता से नहीं होता, उन्हें ऊष्मा का कुचालक कहते हैं। जैसे-लकड़ी, कागज, ऊन, पोर्सिलीन, वायु आदि।
36.

गैसों के प्रसार को एक क्रियाकलाप द्वारा स्पष्ट कीजिए?

Answer»

गैसों के प्रकार को स्पष्ट करने के लिए निम्नांकित क्रियाकलाप को देखेंकाँच की एक खाली तथा स्वच्छ छोटी बोतल के मुँह पर एक बिना फूला हुआ गुब्बारा बाँध देंगे।
अब बोतल को चौड़े मुँह के बर्तन में रखेंगे और इस बर्तन में गर्म पानी डालेंगे। ऐसा करने पर गुब्बारा फूल जाएगा क्योंकि गर्म जल के करण बोतल के अंदर की हवा गर्म होकर फैलती है और बोतल के मुँह पर लगे गुब्बारे में प्रवेश करती है और गुब्बारा फूल जाता है। बोतल को गर्म जल से निकालकर ठंडा करने पर गुब्बारा पुनः पिचक जाता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि गैसों में प्रसार होता है। गर्म करने पर गैसें फैलती हैं और ठंडा करने पर सिकुड़ती हैं।

37.

रेल की पटरी जोड़ते समय उनके बीच थोड़ी जगह क्यों छोड़ते हैं।

Answer»

रेल की पटरियों को जोड़ते समय उनके बीच कुछ जगह छोड़ी जाती है ताकि गर्म होकर फैलने पर पटरी टेढ़ी न हो जाए।

38.

What is sustainable management ? Why is reuse considered better in comparison to recycle?

Answer»

Since natural resources are limited, if they are over exploited for short term gains, future generation will suffer heavily.

Reuse does not consume energy.

Detailed Answer:

Sustainable management is a resource management technique which aims to conserve the resources, use them efficiently and avoid their misuse for individual Purpose such that they are conserved for future. 

Reuse is better than recycle because: 

(i) Reuse saves energy by using material again without any changes 

(ii) Reuse prevents environmental pollution. 

(iii) Reuse saves time as same material is used again.

39.

“हम ऐसा क्यों कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ? नेता झगड़े और सेनाओं के बीच युद्ध हुआ। ज्यादातर आम नागरिकों को इनसे कुछ लेना-देना न था।”

Answer»

पाकिस्तान भारत का ऐसा पड़ोसी राष्ट्र है जो सबसे निकट होते हुए भी सबसे दूर है। सजातीय संस्कृति एवं ऐतिहासिक अनुभूतियों की दृष्टि से यह सबसे निकट है, लेकिन इन दोनों देशों के मध्य आपसी कटुता व संघर्ष के पीछे राजनीतिक दलों की सत्ता प्राप्ति की महत्त्वाकांक्षा सबसे अधिक जिम्मेदार है। राजनीतिक दल सत्ता प्राप्ति हेतु आम जनता को गुमराह करते हैं और साम्प्रदायिक दुष्प्रचार की नीति अपनाते हैं।

भारत और पाकिस्तान के सम्बन्धों में कटुता और वैमनस्य कई बार पाकिस्तान के राजनेताओं के साम्प्रदायिक दृष्टिकोण से उत्पन्न हुए हैं। धार्मिक और साम्प्रदायिक वैमनस्य पाकिस्तान के शासक जान-बूझकर बनाए रखना चाहते हैं। वे साम्प्रदायिक विष को अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और संगठनों में अभिव्यक्त करते रहे हैं। इसके अलावा उत्तर-भारत-सोवियत मैत्री की सन्धि से गुटनिरपेक्षता के सिद्धान्तों का उल्लंघन नहीं हुआ, क्योंकि इस सन्धि के बाद भी भारत गुटनिरपेक्षता के मौलिक सिद्धान्तों पर कायम रहा। वह वारसा गुट में शामिल नहीं हुआ था। उसे अपनी प्रतिरक्षा के लिए बढ़ रहे खतरे, अमेरिका तथा पाकिस्तान में बढ़ रही घनिष्ठता व सहायता के कारण रूस से 20 वर्षीय सन्धि की थी। उसने सन्धि के बावजूद गुटनिरपेक्षता की नीति पर अमल किया। यही कारण है कि जब सोवियत संघ की सेनाएँ अफगानिस्तान में पहुँची तो भारत ने इसकी आलोचना की।

इसलिए यह कहना कि सोवियत मैत्री सन्धि पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत ने गुटनिरपेक्षता की नीति पर अमल नहीं किया, गलत है।

40.

“मैंने सुना है कि 1962 के युद्ध के बाद जब लता मंगेशकर ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों …..’ गाया तो नेहरू भरी सभा में रो पड़े थे। बड़ा अजीब लगता है यह सोचकर कि इतने बड़े लोग भी किसी भावुक लम्हे में रो पड़ते हैं।”

Answer»

यह बिलकुल सत्य है कि जिन लोगों में राष्ट्रवाद व देशप्रेम की भावना कूट-कूट कर भरी हुई हो और उनके सामने राष्ट्र का गुण-ज्ञान किया जाए तो ऐसे लोगों का भावुक होना स्वाभाविक है। जहाँ तक पण्डित नेहरू का सवाल है, वे महान राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने जीवन-पर्यन्त राष्ट्र की सेवा की। इस गीत को सुनकर उनके आँसू इसलिए छलक पड़े क्योंकि इस गीत में देश के उन शहीदों की कुर्बानी की बात कही गयी थी जिन्होंने हँसते-हँसते अपनी जान न्यौछावर कर दी थी। उन्हीं की कुर्बानी ने देश को स्वतन्त्रता दिलवायी थी।

41.

मोहन का चरित्र चित्रण कीजिए।

Answer»

मोहन बी.ए. पास एक सुशिक्षित युवक है। उसकी आकर्षक और अपनेपन से भरी वाणी परायों को भी अपना बना लेती है। वह धन से अधिक आत्मीय संबंधों को महत्त्व देता है। संकट में पड़ी एक लड़की को अपनाकर वह अपने साहस और मानवता का परिचय देता है। उसे अपनाने में वह अपने पारिवारिक रिश्ते की बलि देने में भी संकोच नहीं करता। अपने इन्हीं गुणों के कारण मोहन लेखक की नजरों में बहुत ऊँचा उठ जाता है।

42.

लेखक यात्रा से क्यों डरते थे?

Answer»

लेखक यात्राप्रिय नहीं थे। यात्रा पर निकलते समय वे सोचते कि रास्ते में न जाने कैसे-कैसे लोग मिलेंगे। नए शहर के लोगों का कैसा व्यवहार होगा। सबसे अधिक परेशानी उने ऑटोवालों के बारे में सोचकर होती थी। नए शहर के ऑटोवाले मनमाना किराया मांगेंगे। इन्हीं कारणों से लेखक यात्रा से डरते थे।

43.

थानेदार की क्या विशेषता थी?

Answer»

थानेदार की यह विशेषता थी कि वह कवि भी था और उसकी कविताएँ मानवीय संवेदना से भरी होती थीं।

44.

मोहन लडकी से विवाह करने क्यों तैयार हो गया?

Answer»

लड़की सुंदर और परिचित थी। शादी न करे तो उसकी जिंदगी खतरे में पड़ने की संभावना थी। इसलिए मोहन उससे विवाह करने के लिए तैयार हो गया।

45.

लेखक को ग्वालियर क्यों जाना पड़ा?

Answer»

लेखक को एक डॉक्टर से मिलने के लिए ग्वालियर जाना पड़ा।

46.

लडकीने मोहन से घिघियाते हुए क्या कहा?

Answer»

लड़की ने घिधिवाते हुए मोहन से कहा, “मुझे बचा लो।”

47.

लेखक मोहन को बहुत बड़ा क्यों बताते हैं.?

Answer»

बड़े-बड़े लोग नारी-हित की बातें करते हैं, पर उन्हें व्यवहार में नहीं लाते। इसके बदले मोहन ने एक लड़की को पत्नी बनाकर उसे दर्दशाग्रस्त होने से बचा लिया। इसी मानवतापूर्ण साहस के कारण लेखक उसे ‘बहुत बड़ा’ बताते हैं।

48.

निम्नलिखित विधान किसने किससे और क्यों कहा?“इससे विवाह करना प्रीतिकर भी होगा और मानवीय भी।”

Answer»

यह विधान मोहन ने थानेदार से कहा, क्योंकि लड़की सुंदर और परिचित थी।

49.

निम्नलिखित शब्दों के विरोधी शब्द दीजिए :वांछितपरिचितसमस्यामसीहाप्रीतिसंतोषशोषण

Answer»

1. अवांछित

2. अपरिचित

3. समाधान

4. शैतान

5. नफ़रत

6. असंतोष

7. पोषण

50.

लड़की किस बात के लिए तैयार नहीं थी? क्यों?

Answer»

लड़की के माँ-बाप उसे एक अधेड़ के हाथ बेच रहे थे। लड़की उस खूसट के साथ जाने को तैयार नहीं थी, क्योंकि इससे उसकी जिंदगी बरबाद होने की संभावना थी।