This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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How much long an essay for class 10 should be for board exam icse |
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Answer»
☞2.5 to 3 pagesA safe bet is to write an essay between 2.5–3 pages. Try not to exceed it beyond 4 pages becausei) it will be time CONSUMINGii) may leave a rather negative impact on the EXAMINER.Also, your essay must DEFINITELY have an introduction and a conclusion and the body must be DIVIDED into several paragraphs.♣️ ♣️ ♣️ |
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मास्क बनाने वाली कंपनी पर विज्ञापन तैयार कीजिए |
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Answer» कुछ ही दिनों में प्रतिबंध लगाना शुरु करेगा फेसबुक कंपनी ने कहा कि इस फैसले के तहत सोशल मीडिया मंच पर विज्ञापनों पर रोक लगने के साथ साथ फेसबुक मार्केटप्लेस पर वाणिज्यिक मकसद से भी पोस्ट डालने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। फेसबुक ने कहा कि वह आगामी कुछ दिनों में प्रतिबंध लगाना शुरू करेगा। कंपनी के उत्पाद प्रबंधन निदेशक रॉब लेदर्न ने शुक्रवार देर रात जारी एक बयान में कहा कि हमारी टीमें कोविड-19 की स्थिति पर निकटता से नजर रख रही हैं और यदि हमें लगता है कि लोग इस सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, तो हम हमारी नीतियों में आवश्यक बदलाव करेंगे।’ |
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2. निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करते हुए शब्द बनाइए:सद्________अन_________अ_____वि______उप_____ |
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Answer» SADD- Nidhi ann-data a-vishvasniye vi-char up-kar |
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सीख का तत्सम रूप लिखिए |
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Answer» sikhlai is the word Explanation: OK U UNDERSTAND gud bye |
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10 सुविचार लिखियें हिंदी में। |
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Answer» 1. "हमारे जीवन का उद्देश्य खुश रहना है।" - दलाई लामा 2. "जीवन तब होता है जब आप अन्य योजनाएं बनाने में व्यस्त होते हैं।" - जॉन लेनन 3. "व्यस्त रहने में व्यस्त हो जाओ या व्यस्त हो जाओ।" - स्टीफन किंग 4. "यदि आप एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं, तो इसे एक लक्ष्य से बांधें, लोगों या चीजों से नहीं।" - अल्बर्ट आइंस्टीन 5. "कभी भी हड़ताली का डर आपको गेम खेलने से नहीं रोकता।" - बेबे रूथ 6."पैसा और सफलता लोगों को नहीं बदलते हैं; वे केवल वही बढ़ाते हैं जो पहले से है। ” - विल स्मिथ 7. आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और का जीवन जीने में बर्बाद न करें। हठधर्मिता से नहीं फँसेंगे - 8."आप केवल एक बार जीते हैं, लेकिन अगर आप इसे सही करते हैं, तो एक बार पर्याप्त है।" - मॅई वेस्ट 9. "जीवन की कई असफलताएं ऐसे लोग हैं जिन्हें यह एहसास नहीं था कि जब उन्होंने हार मान ली तो वे सफलता के कितने करीब थे।" - थॉमस एड 10. "जीवन को हल करने के लिए एक समस्या नहीं है, लेकिन अनुभवी होने के लिए एक वास्तविकता है।" - सोरेन कीर्केगार्ड |
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2. निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करते हुए शब्द बनाइए :सद् __________अन__________ अ____________वि________उप |
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Answer» सदभावना अनपढ़ अधर्म विभाग उपकार |
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वृक्ष की उपयोगिता बताते होए सन्शीप्त anochad लिखो |
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Answer» आप सभी जानते हो कि वृक्ष हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी होता है। जहाँ वृक्ष होते हैँ वहाँ का प्राकृतिक वातावरण अलग ही होता है। वृक्ष होने पर वातावरण शुद्ध होता है। ये हमारे द्वारा छोङी गई कार्बन-डाई-ऑक्साईड गैस को ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन गैस छोङते हैं। सोचो, अगर वृक्ष ना हो तो हमारे द्वारा छोङी गई कार्बन-डाई-ऑक्साईड को कौन ग्रहण करेगा? पूरे वातावरण में जब कार्बन-डाइ-ऑक्साइड फैल जाएगी तो हमारे लिए सांस लेना मुश्किल हो जाएगा और हम मर जाएँगे। मानसून भी वृक्षों पर ही निर्भर करता है। जहाँ ज्यादा मात्रा में वृक्ष होते हैं वहाँ बरसात भी ज्यादा होती है और जहाँ कम मात्रा मेँ वृक्ष होते हैं वहाँ बरसात भी कम होती है। वृक्षों से बहुत सी जीवनोपयोगी वस्तुएँ मिलती हैं, जैसे – इमारती लकङी, जलावन, चारा, फर्निचर, फल, औषधि, छाया आदि। वृक्षों से ही पर्यावरण का निर्माण होता है। पहले हर गाँव के आस पास जंगल होता था और उसी जंगल को बचाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पङती है। जिनके कंधों के ऊपर जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है वे ही जँगलों को कटवाने में सहायक हो रहे हैँ। जंगलों की कटाई करके वहाँ उद्योग धन्धे लगाये जा रहे हैं, खदानें खोदी जा रही हैं, रेलमार्ग व सङक मार्ग विकसित किए जा रहे हैं। ज्यादा खेती योग्य भूमि बनाने के लिए वृक्षों की कटाई की जा रही है। जलावन व फर्निचर के लिए अन्धाधुंध वृक्ष काटे जा रहे हैं लेकिन उनके बदले कोई भी एक वृक्ष लगाने को तैयार नहीं है। किसी को मारना बहुत आसान होता है पर किसी पालना बहुत मुश्किल होता है, इसीलिए लोग वृक्षों को काट तो लेते हैं पर उसकी जगह एक वृक्ष लगा नहीं सकते। आज शहरों में जिस तरह से निर्माण कार्य चल रहा है उससे प्रकृति को नुकसान ही हो रहा है। आधुनिक विकास की नींव प्रकृति के विनाश पर ही रखी जाती है। बङी-बङी इमारतें बनाने के लिए खेती की जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे वहाँ खङे पेङ-पौधे भी काटे जा रहे हैं। अब शहरों में लोग अपने-अपने घरों में गमलों में छोटे पौधे लगा रहे हैं। लेकिन इन छोटे पौधों से क्या होता है। छोटे पौधे सिर्फ सजावट कर सकते हैं पर आपके स्वास्थ्य की रक्षा नहीं कर सकते। आज आम शहरियों में बङी बङी बिमारियाँ घर कर गई हैं जो पर्यावरणीय नुकसान के कारण ही है। जब हमें स्वच्छ प्राण वायु नहीं मिलेगी तो बिमारी तो लगेगी ही। बरसों पहले राजस्थान के खेजङली गाँव में पेङों को ठेकेदारों से बचाने के लिए गाँव वालों नें पेङों के साथ लिपटकर अपनी कुर्बानी दी थी। आज सिर्फ वही विश्नोई समाज पेङों के संरक्षण की बात करता है, बाकि को इससे कोई मतलब नहीं है। पेङ कटे या बचे पर उनका विकास होना चाहिए। हमारे प्राचीन मनीषियों नें भी पेङों के संरक्षण की पुरजोर वकालत की है। हमारे प्राचीन विद्वान इस बात को जानते थे कि वृक्षों के बिना जीवन संभव नहीं है। तभी तो उन्होंने हमारे जीवन में हर व्रत या पर्वों को वृक्षों से जोङा है। |
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कंकाल-हड्डियों का ढाँचा- |
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Answer» MARK me as the brainiest Explanation: मानव कंकाल मानव कंकाल शरीर की आन्तरिक संरचना होती है। यह जन्म के समय 306 हड्डियों से बना होता है ,शिशुओं में 270 हड्डियाँ पायी जाती है और युवावस्था में कुछ हड्डियों के संगलित होने से यह 206 तक सीमित हो जाती है। तंत्रिका में हड्डियों का द्रव्यमान ३० वर्ष की आयु के लगभग अपने अधिकतम घनत्व पर पहुँचती है। |
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अपने मित्र या संबंधी (नाना-नानी, दादा-दादी, मामा-मामी आदि) को अपनी किसी कला का वर्णनकरते हुए (जो आपने इस लॉकडौन में सीखी हो ) पत्र लिखिए। |
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Answer» दिनांक =7 मई 2020 प्रिय मित्र, मैं यहां कुशल रहते हुए तुम्हारी कुशलता की मंगलकामना करती हूँ। आज मेरे अचानक से पत्र लिखने का कारण यह है कि मैं तुम्हें लॉकडाउन में अपने दिनचर्या के बारे में बताना चाहती हूँ। मैं रोज़ सुबह 5:00 बजे उठती हूँ। फिर मैं अपने बाल्कनी या छत पर जा कर दो घंटे योग करती हूँ। फिर मैं दातुन से निपटकर नहा लेती हूँ। नहाने के बाद भोजन करती हूँ। फिर मै आराम करने के बाद पढ़ती हूँ। फिर खेलती हूँ। फिर कुछ देर पढ़ने के बाद भोजन कर सो जाती हूँ। तुम्हारी मित्र ABC |
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Which is the mool shabd and prataya in ज़मीनदार |
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Answer» ZAMEEN is mool shabd and DAAR is pratyay zameen + daar |
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Apne Chhote Bhai Bahan ko Corona Savdhan va bchav ke liye Patra likhe |
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Answer» Answer: DEAR brother i hope you are quite well in the dangerous time of Covid 19 . you have to don't worry because it can be defeated by creating SOCIAL AWARENESS and also wash your hands till 20 second .if you van dont GO outside . your's EVER ............ |
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धरती के बारे में वाक्य बनाओ |
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Answer» ये धरती गोल है please FOLLOW me and mark as BRAINLIEST PLZ plz |
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पक्षियों का ाज उद्विकार |
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Answer» प्रारम्भिक व आदिम जीवों में लाखों-करोड़ों वर्षों के दौरान क्रमिक रूप से कुछ ऐसे परिवर्तन आ जाते हैं कि प्रारम्भिक प्रजाति से अलग एक नयी प्रजाति उत्पन्न हो जाती है, इस प्रक्रिया को ही उद्विकास (EVOLUTION) कहा जाता है | जीवों के संबंध में इसे ‘जैव उद्विकास’ का नाम दिया जाता है | वर्तमान में पृथ्वी पर पाये जाने वाले सभी पादपों व जंतुओं का वर्तमान विकास बहुत समय पहले पृथ्वी पर पाये जाने वाले उनके पूर्वजों से क्रमिक परिवर्तन के द्वारा हुआ है | दो प्रजातियों की विशेषताओं में जितनी अधिक समानता पायी जाती है, वे जैव उद्विकास के संदर्भ में उतनी ही अधिक गहराई से आपस में जुड़े होते हैं | जैव उद्विकास को ‘पिटेरोसोर्स ( PTEROSAUR)’ पक्षी के उदाहरण से से समझा जा सकता है| यह एक उड़ने वाला सरीसृप (REPTILE) है, जो लगभग 150 मिलियन वर्ष पहले पृथ्वी पर पाया जाता था | इसका जीवन की शुरुआत प्रारम्भ में स्थल पर रहने वाली एक बड़ी छिपकली के रूप में हुआ था | कई मिलियन वर्षों के दौरान इसके पैरों के मध्य त्वचा की परतें विकसित हो गईं जिसने इसे छोटी-मोटी दूरी तक उड़ने योग्य बना दिया | बाद के कुछ और मिलियन वर्षों के दौरान इसके पैरों के बीच की त्वचा की परतों और उसे सहयोग करने वाली हड्डियों और माँसपेशियों का विकास पंखों के रूप में हो गया जिसने इसे लंबी दूरी तक उड़ान भरने योग्य पक्षी के रूप में विकसित कर दिया | इस तरह जमीन पर रहने वाला एक जीव उड़ने वाले पक्षी में बदल गया और एक नयी प्रजाति (उड़ने वाले सरीसृप) का जन्म हो गया | |
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पक्षियों का उद्विकास |
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Answer» परिवार की उत्पत्ति का उद्विकासीय सिद्धांत सर्वप्रथम अमरीकी मानवशास्त्री एलएच मॉर्गन ने प्रतिपादित किया था। इस संबंध में उन्होंने कहा कि समाज की प्रारंभिक अवस्था में परिवार एवं विवाह नाम की कोई संस्था नहीं थी। आरंभिक काल में यौन साम्यवाद की स्थिति थी। विवाह एवं परिवार का विकास इसके बाद के युगों में क्रमश: हुआ। मॉर्गन ने अपने विचारों की पुष्टि के लिए त्योहारों के अवसर पर स्वेच्छाचार, पत्नी विनिमय, अतिथि सत्कार के निमित्त पत्नी भेंट, आदि तथ्यों का उल्लेख किया। मॉर्गन ने कहा कि आरंभिक अवस्था में बहन पत्नी बनी और यही समाज का नियम था। मॉर्गन ने परिवार के उद्विकास के पांच स्तरों का उल्लेख किया है। जो निम्नलिखित हैं। 1 समरक्त परिवार परिवार के उद्विकास का यह पहला चरण माना जाता है। इस अवस्था में यौन संबंध के स्थापित नियमों का सर्वथा अभाव था। इस स्तर में भाई-बहन के बीच भी यौन संबंध होते थे। मॉर्गन ने उदाहरण के रूप में पॉलीनीजियन समाज का विशेष रूप से उल्लेख किया है। 2. समूह विवाह परिवार इस चरण में परिवार में समूह विवाह का प््राचलन हुआ। एक परिवार के सभी भाइयों का संबंध, सभी बहनों के साथ होने की स्थितियां थी।ं पुनालुअन परिवार को मॉर्गन ने इस चरण में रखा। 3.सिस्माण्डियन परिवार यह परिवार के विकास का तीसरा स्तर माना जाता है। इस परिवार के अंतर्गत एक पुरुष का विवाह एक स्त्री से होता था, लेकिन परिवार परिवार के सभी पुरुष सभी विवाहित स्त्रियों के साथ समान रूप से यौन संबंध स्थापित कर सकते थे। 4.पितृसत्तात्मक परिवार इस चरण में परिवार में पुरुष की श्रेष्ठता होती थी। वह एक से अधिक पत्नियां रख सकता है। पुरुष के अधिकार स्त्रियों की तुलना में अधिक थे।हर कार्य पुरुष की मर्जी से होता था। मध्य एवं दक्षिण एशिया के देशों में इस प्रकार के परिवारों की आज भी प्रधानता है। 5. एक विवाही परिवार परिवार के उद्विकास का अंतिम और आधुनिक स्तर एक विवाही परिवार है। इसके अंतर्गत एक पुरुष किसी भी एक स्त्री से विवाह करता है। हालांकि मॉर्गन के मुताबिक, एक विवाही परिवार भी समाज की अंतिम स्थिति नहीं है, इस किस्म के परिवार में भी परिवर्तन की संभावना रहेगी। मॉर्गन के उपर्युक्त सिद्धांत की आलोचना यह कहकर की जाती है कि कई पशु-पक्षियों में भी हमें नर-मादा जोड़े के रूप में देखने को मिलते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि जब उनमें यौन साम्यवाद नहीं है तो मनुष्य जैसे विकसित प्राणी में यौन साम्यवाद को कैसे सही माना जा सकता है। |
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राजगुरु का जीवन परिचय पर टिप्पणी करो |
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Answer» HEY mate Explanation: शहीद राजगुरू का पूरा नाम शिवराम हरि राजगुरू था. राजगुरू का जन्म 24 अगस्त, 1908 को पुणे ज़िले के खेड़ा गाँव में हुआ था. उनके पिता का नाम श्री हरि नारायण और उनकी माता का नाम पार्वती बाई था. अपने जीवन के शुरुआती दिनों से ही राजगुरू का रुझान क्रांतिकारी गतिविधियों की तरफ होने लगा था |
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Does ac produce sound after raining |
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Answer» No, AC doesn't PRODUCE SOUND after raining follow me thank you |
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Agar apne kisi ki madad ki hai to apni bahaduri ke bare mein panch sha vakya likiye |
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Write 2 nare on bharat |
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Answer» I did not UNDERSTAND your QUESTION |
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आदिकाल का समय बताइए ? |
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Answer» आदिकाल का समय 1050 से 1375 तक का माना जाता है। hope it will HELP you |
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4. सही कथनों पर (V) का चिह्न लगाइए(Tick (V) the, correct statement)(क) मूर्धन्य वर्ण के उच्चारण के समय जिह्वा दाँतों के ऊपरी भाग को स्पर्श करती है।(ख) 'लु' वर्ण का उच्चारण स्थान दंत नहीं है।(ग) स्' वर्ण का उच्चारण स्थान कंठ है।(घ) 'ए', 'ऐ' वर्ण का उच्चारण स्थान कंठ-तालव्य है।(ङ) 'य्' वर्ण का उच्चारण स्थान ओष्ठ्य है।G |
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Answer» 4.is WRIGHT answer
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Please answer the questions which are written below the blue line.. fast.. |
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Answer» Answer: 1. Jo badha aane PAR BHI nahi ghabrate. 2. Nidar, veer , chanchal . Explanation: Please mark me as brainliest. |
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संधि विच्छेद, करे-5-1.मूल्य+अक्नसततजन2सुन आगत3 |
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Answer» Answer: Explanation: |
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Q2, COVID-19 का हमारे जीवन में प्रभाव' इस विषय पर 150 शब्दों में निबंध लिखिए। |
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Answer» कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है। स्वास्थ्य के साथ साथ इस समय पूरी दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की तरफ भी बढ़ रही है जिसकी वजह से वैश्विक मंदी स्पष्ट रूप से दिख रही है। पिछले एक महीनें में ही दुनिया भर के शेयर बाजार धराशायी हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में कोरोना की महामारी 2.5 करोड़ लोगों का रोजगार छीन लेगी। यह पहले से जारी वैश्विक आर्थिक संकट में कोढ़ में खाज की तरह साबित होगी। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को 3.6 लाख करोड़ डॉलर का झटका लगेगा। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इससे आर्थिक और श्रम संकट गहराएगा। कोरोना वायरस का दुनिया पर प्रभाव अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने भी एक अध्ययन में कहा है कि वैश्विक स्तर पर एक समन्वित नीति बनती है तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। चीन में जनवरी-फरवरी माह में 50 लाख लोगों ने कोरोना के आर्थिक दुष्प्रभाव के चलते नौकरी गंवा दी। वुहान, शंघाई समेत तमाम शहरों में कामबंदी और व्यापारिक गतिविधियां ठप हो जाने से यह नुकसान हुआ। चीन में बेरोजगारी दर भी जनवरी में 5.3 फीसदी के मुकाबले फरवरी में 6.2 फीसदी हो गई है। इसका असर चीन की विकास दर पर भी दिख सकता है। दुनियाभर में तेजी के साथ फैल रहे घातक कोरोना वायरस ने वैश्विक अर्थव्यस्था को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसके चलते वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ा है। तेल की बढ़ी आपूर्ति और मांग में कमी के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से कोरोना पर 24 जनवरी को हुई पहली बैठक के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। कोरोना का दुनिया के व्यवसायों पर असर साफतौर पर देखा जा सकता है, जहां कंपनियां अपने ऑपरेशंस कम कर रही हैं, कर्मचारियों से यह कहा जा रहा है कि वे घरों से काम करें और उत्पादन के लक्ष्य को कम किया जा रहा है। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकॉनोमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) ने अंतरिम आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में मार्च के पहले हफ्ते में कोविड के चलते वैश्विक जीडीपी में 50 बेसिस प्वाइंट (2019 में 2.9 प्रतिशत से 2.4 प्रतिशत) का अनुमान लगाया है। गौरतलब है कि 100 बेसिस प्वाइंट एक प्रतिशत प्वाइंट के बराबर है। इसमे से आप काट काट के लिख सकते हैं please mark me as brainliest and please FOLLOW me |
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(ग) स्वामी विवेकानंद के जीवन से आपको क्या शिक्षा मिलती है? |
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Answer» sabhi dharmo ka ghan rakho saman KARO PAR apne dharma KO mat bhulo asambhav kuch bhi NAHI hai |
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Please write correct answerDo question 6 |
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Answer» Answer: Is chitra ko dekh kar mujhe aisa lagta hai ki HAMEN bujurg logo pe hasna nahi CHAHIYE balki unka aadar samman karna chahiye. Agar ham unka anadar KARENGE to jab HUM bade honge to hamara bhi koi aadar nahi karega kyunki baache jo dekhte hai vaise hi karte hai. Explanation: Please mark me as brainliest. |
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Vividh bhashaon mein abhivadan karne ke liye kin shabdon ka prayog Kiya jata hai pata karke likhiye |
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Answer» अंग्रेज़ी में "गुड डे" (GOOD DAY), अरबी में "अस-सलाम-आलेकुम" (السلام عليكم), इब्रानी में "शालोम" (שָׁלוֹם) और इतालवी में "च्याओ" (CIAO)। सिर-झुकाना और हाथ मिलाना भी मिलने व विदा करने दोनों के लिये प्रयोगित हैं। |
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चिथियों की अनूठी दुनिया शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए। Please immediatelyIt's urgent |
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Answer» चिट्ठियों की अनूठी दुनिया अरविन्द कुमार सिंह जी द्वारा लिखा गया एक प्रसिद्ध निबंध है ,जिसमें आपने पत्रों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला है . लेखक के अनुसार पत्र जो काम कर सकते हैं ,वह काम फोन या एसएमएस नहीं कर सकता है।26-Mar-2019 |
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पद्य किसे कहते है ? |
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Answer» काव्य, कविता या पद्य, साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी कहानी या मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। भारत में कविता का इतिहास और कविता का दर्शन बहुत पुराना है। इसका प्रारंभ भरतमुनि से समझा जा सकता है। ⏫⏫⏫⏫⏫⏫⏫⏫⏫↫↫↫↫↫ HOPE it HELPS youPlz MARK me BRAINLIST ↬↬↬↬↬
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गिल्लूगिलहरी के घायल बच्चे का उपचार किस तरह किया गया |
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Answer» येह तुम्हरा बुक मै होगा |
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Plz do into hindiplz it is to important |
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Answer» Answer: good idea ✌️ I can get the other I I I r or Adobe r reader r can be found at or near of trees and FOLLOW Adobe o o o o o o ekta to o log Explanation: Jai world of idiomatic the other day please see ATTACHED for your name and follow I am late reply I am ALSO ATTACHING my resume is attached to this page was empire the KEYS and not ghar me ek Patra and I would be found on I I am also a good idea to the i i the i i i i o o i i I i I am on my mobile is possible for you are very nice and follow |
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Tush prakarna ko apne sabdon mai bataiye |
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Answer» तूश प्रकरण विवरण - लेखक की पत्नी अपनी पडोस से एक शाल मन्गती है जो उस्से किसी पार्टी में चटनी गिरने के कारण गंदा हो गया था । किसी तरह यह बात उसकी पडोसन को पता चल गयी तो दोनो में लड़ाई हो गयी । इसे समभालने के चक्कर में लेखक को देड़ सौ की चपत खानी पड़ी । |
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चिथियों की अनूठी दुनिया शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए. Fast it's urgent. |
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Answer» चिडियों की प्यारी दुनिया |
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वीरगाथा काल को चारण काल क्यों कहा जाता है? |
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Answer» हिंद की भाषाओं के प्रारंभिक काल को चारण काल सर्वप्रथम अंग्रेज भाषा विज्ञानी सर जॉर्ज ग्रियर्सन ने कहा। उन्होंने ही भारत की सम्पूर्ण भाषाओं का वैज्ञानिक अध्ययन और सर्वेक्षण किया था। चूंकि चारण जाति के कवि वीर रस के कवि थे इसे वीर गाथा काल भी कहा गया। वीर रस की कविताओं का सृजन एक भाषा विशेष में किया जाता था जिसे डिंगल कहते थे। इसका अर्थ होता है भारी। ये एक विशिष्ट तरीके से बोली जाती थी और बेहद भारी , जोशीली और वीर रस से भरी हुई ओजपूर्ण वाणी में होती थी। इसके लिए विशिष्ट अभ्यास और व्यक्ति की जरूरत पड़ती थी। डिंगल भी प्राचीन हिंद की भाषा है और ये संस्कृत के बाद और हिंदी से पहले आयी। follow me and MARK ME AS BRAINLIEST ANSWER |
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धरती को हरा भरा रखने में छात्रों की भूमिका दो मित्रों के बीच संवाद लेखन |
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Answer» Answer: पेड़ पौधों के महत्व के विषय में दों मित्रों के बीच का संवाद। आदित्य : हेल्लो विशाल कैसे हो? विशाल : मैं ठीक हूँ , तुम सुनाओ | आदित्य : विशाल मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है| विशाल : हाँ आदित्य बोलो | आदित्य : पेड़ पौधों के महत्व के बारे में बताओ | विशाल : पेड़ों की सहायता से हम प्रदूषित वातावरण को ठीक कर सकते है | आदित्य : और अगर पेड़ नहीं होते तो पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं होता | विशाल : पेड़-पौधे जानवरों और छोटे जीवों के लिए घर का काम भी करते है। आदित्य : पेड़ पौधों के बिना हमारा जीवन मुश्किल है| पौधे हमें आक्सीजन प्रदान करते हैं जो कि हमारे जीवन जीने के लिए ज़रूरी है | विशाल : ऐसे बहुत से पेड़ पौधे है जिनसे दवाएँ बनती है जो कि हमारे लिए बहुत ही उपयोगी हैं | आदित्य : पेड़ पौधे का जीवित रहना हमारे लिए बहुत जरूरी है हमें इनकी रक्षा करनी चाहिए | |
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Hindi anuched lekhan on स्वच्छता और स्वस्थ का सम्बंध |
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Answer» Explanation: |
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Please help me in this OUESTION |
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Answer»
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् । कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मणः ॥ यज्ञार्थात्कर्मणोऽन्यत्र लोकोऽयं कर्मबंधनः । तदर्थं कर्म कौन्तेय मुक्तसंगः समाचर ॥ देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः । परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ ॥ इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः । तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुंक्ते स्तेन एव सः ॥ न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङि्गनाम् । जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन् ॥
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात् । स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ॥
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः । अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ॥ यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः । स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥
यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन् । इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते ॥ यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन । कर्मेन्द्रियैः कर्मयोगमसक्तः स विशिष्यते ॥ सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत । कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम् ॥ इन्द्रियस्येन्द्रियस्यार्थे रागद्वेषौ व्यवस्थितौ । तयोर्न वशमागच्छेत्तौ ह्यस्य परिपन्थिनौ ॥
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Plz solve it fast i will surely mark ur answer brainlist. |
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Answer» Answer: 1 SUSHIL kanya 2 ADHIK chaturai Explanation: |
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दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर दो मित्रीके बीच संवाद |
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Answer» मोहन वह देख वह व्यक्ति किस तरह घायल हो गया। हां, सोहन चलो उसकी मदद करें हां, चलो। मगर यह व्यक्ति तो बेहोश है। चलो एम्बूलैंस बुलाएं मगर पुलिस केस है यह। हां, तुम सही कह रहे। मगर कोई भी कानून किसी व्यक्ति के जान से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हो सकता। चलो हम खुद ले चले इनको अस्पताल और मानवता के खातिर इनकी जान बचाएं Read more on Brainly.in - brainly.in/question/8008208#readmore |
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Sarthak or nirpak shabdo mai kya antar hai ? udharan ke sath |
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Answer» सार्थक शब्द (व्याकरण) किसी निश्चित अर्थ का बोध कराने वाले शब्दों को सार्थक शब्द कहा जाता है। जिस प्रकार मोहन, घर, रात, आना, नीचे, ऊपर आदि सार्थक शब्द हैं। शब्द भेद व्याकरण के अनुसार सार्थक शब्दों के आठ भेद होते हैं- इनमें से प्रथम चार प्रकार के शब्द- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया विकारी होते हैं, क्योंकि ये शब्द लिंग, वचन, कारक आदि से विकृत हो जाते हैं। संज्ञा मुख्य लेख : संज्ञा (व्याकरण) किसी व्यक्ति, स्थान, पदार्थ और भाव का बोध कराने वाले शब्दों को 'संज्ञा' कहते हैं। संज्ञा के तीन भेद होते हैं- व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक। सर्वनाम मुख्य लेख : सर्वनाम जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयोग में आते हैं, उन्हें 'सर्वनाम' कहते हैं। सर्वनाम के छ: भेद होते हैं- पुरुषवाचक, निजवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चवाचक, प्रश्नवाचक और सम्बन्धवाचक। विशेषण मुख्य लेख : विशेषण जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता प्रकट करते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं। विशेषण के चार प्रमुख भेद होते हैं- गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक, संकेतवाचक। क्रिया मुख्य लेख : क्रिया जिन शब्दों में से किसी कार्य या व्यापार के होने या किये जाने का बोध होता है, उन्हें क्रिया कहते हैं। जैसे, उठना, बैठना, सोना, जागना, आना, जाना, खाना, पीना आदि। सामान्य रूप से क्रिया के दो भेद होते हैं- सकर्मक क्रिया और अकर्मक क्रिया। परन्तु इसके अलावा पाँच और भेद होते हैं- संयुक्त क्रिया, अपूर्ण क्रिया, प्रेरणार्थक क्रिया, सहायक क्रिया और पूर्वकालिक क्रिया। इनके अतिरिक्त शेष चार प्रकार के शब्द- क्रियाविशेषण, सम्बन्धबोधक, समुच्यबोधक और विस्मयादिबोधक अविकारी होते हैं, क्योंकि ये लिंग, वचन, कारक आदि से कभी विकृत नहीं होते हैं। इनको 'अव्यय' भी कहा जाता है। क्रियाविशेषण मुख्य लेख : क्रियाविशेषण जिन अविकारी शब्दों से क्रिया की विशेषता का बोध होता है, वे क्रियाविशेषण कहलाते हैं। सम्बन्धबोधक मुख्य लेख : सम्बन्धबोधक जो अविकारी शब्द संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के पहले या पीछे आकर उसका सम्बन्ध वाक्य के किसी अन्य शब्द से कराते हैं, उन्हें सम्बन्धबोधक कहते हैं। समुच्यबोधक मुख्य लेख : समुच्यबोधक जो अविकारी शब्द दो शब्दो, दो वाक्यों अथवा दो वाक्य खण्डों को जोड़ते हैं, उन्हें समुच्यबोधक कहते हैं। विस्मयादिबोधक मुख्य लेख : विस्मयादिबोधक जो अविकारी शब्द हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, क्रोध, तिरस्कार आदि भावों का बोध कराते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक कहते हैं। Explanation: |
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lekhak sri ram varma ka jivan parichaye dijiye . Avom unle sahitya yogdabn ka ulekh kijiye. [In hindi] |
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Answer» श्रीराम वर्मा (जन्म १९३५) प्रमुख कवि, कथाकार एवं सम्पादक हैं। निराला पुरस्कार से सम्मानित एवं चौथा सप्तक में शामिल हैं। संशय की रात, अभिव्यक्ति का स्वरूप इनकी प्रमुख आलोचना पुस्तकें हैं। इन्होंने नयी कविता एवं विवेकानन्द साहित्य के सम्पादक का कार्य भी किया है। |
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Make sentence with 1. प्राणदायक 2.स्पर्श 3.पल्लवित 4.दुर्दशा 5.सतत |
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Answer» here is your answer so MARK me as BRILLIANT |
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Give me this answer |
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Answer» what is ur q we have to GIVE ANS about what PLEASE tell the APPROPRIATE question |
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Application in Hindi Apne Kshetra Mein badhti Hui choriyon ke liye sampadak ko Patra likho |
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Answer» कार्तिक कीर्ति पाटील जॉन्जगिर जॉन्जगिर, जिला दिनांक – 1 जुन 2020 सेवा में, श्रीमान संपादक महोदय, दैनिक टाइम्स, नेताजी रोड, दापोली | विषय: क्षेअपने क्षेत्र में बढ़ते चोरी रोकने के लिए शिकायत पत्र | महोदय, मैं आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से अपने क्षेत्र में व्याप्त अपराध सरकार के अधिकारियों का ध्यान में बढ़ती हुई चोरी वृत्ति की ओर दिलाना चाहती हूं। आशा है कि आप मेरे पत्र को अपने लोकप्रिय समाचार पत्र में प्रकाशित करेंगे। 1 माह से इस क्षेत्र में चोरी प्रवृत्ति बढ़ गई है। आजकल गुंडागर्दी ,हत्याएं ,लूटपाट, बलात्कार जैसी आपराधिक घटनाएं लगातार हो रही हैं। आए दिन घरों के ताले तोड़कर चोर घरों में घुसकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। लुटेरों की हिम्मत भी इतनी इतना बढ़ गयी है कि राह चलती महिलाओं के गले से चेन खींचने की घटनाएं भी आम बात हो गई है। बढ़ते अपराधों से महिलाएं डर के कारण घर से अकेले आने जाने का भी साहस नहीं जुटा पाती हैं। महोदय दुख तो इस बात का है कि अनेक राजनीतिक दल गैर सरकारी संस्थाओं तथा छात्र संगठनों के द्वारा कई बार इस और ध्यान रख दिलाए जाने के बावजूद केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही है। वह संबंधित पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी नहीं करती। मेरा केंद्र सरकार तथा पुलिस के अधिकारियों से अनुरोध है कि वे इस संबंध में कठोर कार्यवाही करें, जिससे अपराधियों के मन में डर उत्पन्न हो और अपराध करने से पहले सौ बार सोचे। धन्यवाद! भवदीय, घनश्याम गौरव |
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आराधना का वर्ण विच्छेद |
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Answer» आराधना :- आ + र् + आ + ध् + अ + न् + आ |
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2. गोपियों ने उधव को किन किन उदाहरणों से तुलना किया है? |
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Answer» गोपियों ने उद्धव को अनेक उदाहरणों के माध्यम से उलाहने दिए थे। उन्होंने उसे 'बड़भागी' कह कर प्रेम से रहित माना था जो श्रीकृष्ण के निकट रहकर भी प्रेम का अर्थ नहीं समझ पाया था। उद्धव के द्वारा दिए जाने वाले योग के संदेशों के कारण वे वियोग में जलने लगी थीं। |
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