This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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तापमान विलोम क्या है?या तापमान की विलोमता से आप क्या समझते हैं? |
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Answer» ऐसी अवस्था जिसमें धरातल के निकट कम तापमान तथा ऊपर अधिक तापमान हो, उसे ताप की विलोमता कहते हैं। |
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ताप की विलोमता के लिए दो आवश्यक दशाओं का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» · लम्बी रातें तथा · मेघरहित आकाश |
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सूर्यातप को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए। |
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Answer» 1. सूर्य की किरणों का सापेक्ष तिरछापन तथा 2. सूर्य में प्रकाश की अवधि। |
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तापमान विलोमता के लिए प्रमुख अनुकूल दशा क्या होनी चाहिए? |
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Answer» तापमान विलोमता मुख्यतः अन्तरापर्वतीय घाटियों में उत्पन्न होती है, क्योंकि यहाँ जाड़े की ठण्डी । रातों में आकाश साफ तथा वायु शुष्क एवं शान्त होती है। |
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सूर्यामिताप या सूर्यातप से क्या तात्पर्य है? |
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Answer» पृथ्वी को प्राप्त होने वाले सूर्य के ताप को सूर्यातप कहते हैं। |
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निम्न पदों को उसके उचित विवरण के साथ मिलाएँ1. सूर्यातप (अ) सबसे कोष्ण और सबसे शीत महीनों के मध्य तापमान का अन्तर2. एल्बिडो (ब) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा।3. समताप रेखा (स) आने वाला सौर विकिरण ।4. वार्षिक तापान्तर (द) किसी वस्तु के द्वारा परावर्तित दृश्य प्रकाश का प्रतिशत। |
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Answer» सही विकल्प है (1) (स), 2. (द) 3. (ब), 4. (अ) |
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तापान्तर क्या है? |
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Answer» अधिकतम तथा न्यूनतम तापमान के अन्तर को ‘तापान्तर’ कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है- (1) दैनिक तापान्तर तथा (2) वार्षिक तापान्तर। |
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पृथ्वी का एल्बिडो किसे कहते हैं? |
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Answer» पृथ्वी के धरातल पर पहुँचने से पहले ही विकिरण की परावर्तित मात्रा को पृथ्वी का एल्बिडो कहते हैं। यह परावर्तित मात्रा 49 इकाई के रूप में होती है। |
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यान्त्रिक प्रतिलोमन क्या है? इसकी उत्पत्ति के क्या कारण हैं? |
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Answer» यह प्रतिलोमन धरातल से ऊपर वायुमण्डल में होता है। इसकी उत्पत्ति मूलतः वायुमण्डल में वायु के ऊपर-नीचे (लम्बवत्) गतिशील होने से होती है। इसकी उत्पत्ति में निम्न दो प्रक्रियाएँ महत्त्वपूर्ण हैं—(अ) कभी-कभी नीचे की गर्म वायु तीव्र गति से ऊपर उठ जाती है तथा ऊपर की ठण्डी व भारी वायु नीचे धरातल की ओर आ जाती है और प्रतिलोमन की दशा पैदा करी देती है। (ब) मध्य अक्षांशों चक्रवातों के कारण भी यान्त्रिक प्रतिलोमन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। |
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सूर्यातप एवं भौमिक विकिरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» सूर्यातप–सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण ऊर्जा को सूर्यातप कहते हैं। यह ऊर्जा लघु तरंगों के रूप में सूर्य से पृथ्वी पर पहुँचती है। यह पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। यहाँ होने वाली अधिकांश भौतिक एवं जैविक घटनाएँ इसी ऊर्जा से नियन्त्रित होती हैं। भौमिक विकिरण-पृथ्वी द्वारा विकिरित ऊर्जा को भौमिक या पार्थिव विकिरण कहते हैं। वायुमण्डल भौमिक विकिरण द्वारा ही गर्म होता है। यह प्रक्रिया लम्बी तरंगों द्वारा पूरी होती है। |
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सूर्यातप पर टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» ‘सूर्यातप’ अंग्रेजी भाषा के Insolation शब्द का हिन्दी रूपान्तरण है। Insolation से तात्पर्य In Coming Solar Radiation है। वास्तव में, सूर्य से निरन्तर तरंगों के रूप में ताप शक्ति प्रसारित होती रहती है। यही ताप शक्ति धरातल तक पहुँचकर उसे ऊष्मा प्रदान करती है। सूर्य से प्राप्त होने वाली यही ऊर्जा सूर्यातप कहलाती है। सूर्यातप विद्युत चुम्बकीय तरंगों द्वारा वायुमण्डल की 32,000 किमी मोटी परत को पार कर लघु तरंगों के रूप में धरातल पर आती हैं, जिसे सौर विकिरण (Solar Radiation) की प्रक्रिया कहते हैं। अत: वायुमण्डल अधिकतर सीधे सूर्य की किरणों से ऊष्मा प्राप्त नहीं कर पाता है। वह इन किरणों से केवल 19% ताप ही जल-वाष्प एवं धूलकणों के माध्यम से प्राप्त कर पाता है। वस्तुत: गर्म होती हुई पृथ्वी को स्पर्श करके ही वायुमण्डल गर्म हो जाता है, जिसे वायुमण्डल का परोक्ष रूप से गर्म होना कहते हैं। |
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लम्बवत तापमान या तापमान विलोमता की क्या आर्थिक उपयोगिता है? |
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Answer» वस्तुतः तापमान का लम्बवत् वितरण एवं तापमान की विलोम दशाएँ वायुमण्डलीय देशाओं और आर्थिक दृष्टि से क्शेिष महत्त्व रखती हैं। मेघों का स्वरूप, वर्षा की मात्रा, वायुमण्डल की दृश्यता आदि पर तापमान विलोमता का स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। पर्वतीय ढालों पर कृषि तथा मानव बसाव की आदर्श दशाएँ भी तापमान विलोमता के कारण ही उत्पन्न होती हैं। तापमान विलोमती के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में एक ही ऋतु में विभिन्न प्रकार की कृषि उपजें उत्पन्न होती हैं। जो वर्तमान में आर्थिक दृष्टि से विशेष महत्त्वपूर्ण है। अतः लम्बवत् तापमान की असमानताएँ प्राकृतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से उपयोगी हैं। |
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अभिवहन तथा संवहन की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए। |
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Answer» अभिवहन–अभिवहन ऊष्मा का क्षैतिज दिशा में स्थानान्तरण है। इस प्रक्रिया में जब ठण्डे प्रदेशों में गर्म वायुराशि जाती है तो उनको गर्म कर देती है। इससे ऊष्मा का संचार निम्न अक्षांशीय क्षेत्रों से उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों में भी होता है। इसके अतिरिक्त वायु द्वारा संचालित समुद्री धाराएँ भी उष्ण कटिबन्धों से ध्रुवीय क्षेत्रों में ऊष्मा का संचार करती हैं। संवहन-जब पृथ्वी को स्पर्श करके वायु के कणगर्म होते हैं तो वह हल्के होकर ऊपर उठते हैं और फिर ऊपर से ठण्डे होकर नीचे आते हैं। इस प्रक्रिया से संवहन धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। इन धाराओं की प्रकृति गैसीय या तरल पदार्थों में जाने की होती है। इससे ऊष्मा का संचार होता है जो संवहन कहलाता है। |
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निम्नलिखित के लिए एक उपयुक्त शब्द चुनिए(i) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा,(ii) लघु तरंगों में सूर्य से आने वाला विकिरण,(iii) ऊष्मा का आने वाला एवं जाने वाला तापान्तर,(iv) सूर्य की किरणों का कोण जब वे पृथ्वी पर आती हैं। |
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Answer» (i) समताप रेखा (ii) सूर्यातप (iii) ऊष्मा सन्तुलन (iv) आपतन कोण |
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विषुवत रेखा पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं|(क) तिरछी(ख) लम्बवत्(ग) समानान्तर(घ) इनमें से किसी प्रकार की नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) लम्बवत् |
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निम्न में से किस अक्षांश पर 21 जून की दोपहर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं?(क) विषुवत् वृत्त पर(ख) 23.5° उ०(ग) 66.5° द०(घ) 66.5° उ० |
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Answer» सही विकल्प है (ख) 23.5° उ० |
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