This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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r के विभिन्न मापों +1, -1 तथा 0 की व्याख्या कीजिए। |
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Answer» ⦁ r का धनात्मक मान दर्शाता है कि दोनों चर एक ही दिशा में गतिमान होते हैं। |
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कुछ ऐसे चरों की सूची बनाएँ जिनका परिशुद्ध मापन कठिन हो? |
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Answer» ऐसे चर जिनका परिशुद्ध मापन कठिन है ⦁ तापमान एवं आइसक्रीम की बिक्री। |
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| 3. |
दो चर मूल्यों के मध्य परिवर्तन का अनुपात समान हो तो उनमें सहसंबंध पाया जाता है(क) सरल(ख) रेखीय(ग) अरेखीय(घ) धनात्मक |
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Answer» सही विकल्प है (ख) रेखीय |
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| 4. |
सहसंबंध गुणांक का मान …………. के बीच होता है।(क) +2 तथा -2(ख) +1 तथा -1(ग) +3 तथा -3(घ) +0 तथा -1 |
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Answer» सही विकल्प है (ख) +1 तथा -1 |
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कद (फुटों में) तथा वजन (किलोग्राम में) के बीच सहसंबंध गुणांक की इकाई है(क) किग्रा/फुट(ख) प्रतिशत(ग) अविद्यमान |
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Answer» सही विकल्प है (ग) अविद्यमान |
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| 6. |
सरल सहसंबंध गुणांक का परास निम्नलिखित होगा(क) 0 से अनन्त तक(ख) -1 से +1 तक(ग) ऋणात्मक अनन्त (infinity) से धनात्मक अनन्त तक |
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Answer» सही विकल्प है (ख) -1 से +1 तक |
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| 7. |
सहसंबंध के प्रकार हैं-(क) दो(ख) तीन(ग) चार(घ) पाँच |
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Answer» सही विकल्प है (ख) तीन |
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क्या शून्य सहसंबंध का अर्थ स्वतंत्रता है? |
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Answer» यदि r = 0, तो दो चर असहसंबंधित होते हैं। यद्यपि इनके बीच कोई रेखीय संबंध नहीं होता। तथापि इनके बीच दूसरे प्रकार के सहसंबंध हो सकते हैं। अत: शून्य सहसंबंध का अर्थ सदैव स्वतंत्रता नहीं |
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सहसम्बन्ध का महत्त्व बताइए। |
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Answer» सहसम्बन्ध का महत्त्व सांख्यिकी में सहसम्बन्ध का सिद्धान्त अत्यधिक उपयोगी है। इस सिद्धान्त का विकास फ्रांसिस गाल्टन व कार्ल पियर्सन ने प्राणिशास्त्र तथा जनन-विद्या की अनेक समस्याओं के आधार पर किया है। सहसम्वन्ध के द्वारा ही अनेक वैज्ञानिक, सामाजिक तथा आर्थिक क्षेत्रों में दो-या-दो से अधिक घटनाओं के आपसी सम्बन्धों को स्पष्टीकरण मिलता है। इसकी सहायता से इस बात का आभास होता है कि विभिन्न समस्याओं के कारण तथा परिणाम में कितना और किस प्रकार का सम्बन्ध है। प्रतीपगमन (Regression), विचरण अनुपात (Ratio of Variation), आन्तरगणन (Interpolation), बाह्यगणन (Extrapolation) आदि अनेक सांख्यिकीय धारणाएँ सहसम्बन्ध सिद्धान्त पर आधारित हैं। सांख्यिकी के अतिरिक्त; मनोविज्ञान, शिक्षा, कृषि, अर्थशास्त्र आदि के क्षेत्रों में भी सहसम्बन्ध का विशेष महत्त्व है। अर्थशास्त्र में सहसम्बन्ध के उपयोग के बारे में नीसवेंजर लिखते हैं-“सहसम्बन्ध विश्लेषण आर्थिक व्यवहार को समझने में योग देता है, विशेष महत्त्वपूर्ण चरों, जिन पर अन्य चर निर्भर करते हैं, को खोजने में सहायता देता है, अर्थशास्त्री को उन सुझावों को स्पष्ट करता है जिनसे गड़बड़ी फैलती है तथा उसे उन उपायों का सुझाव देता है जिनके द्वारा स्थिरता लाने वाली शक्तियाँ प्रभावित हो सकती हैं।” |
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| 10. |
स्पियरमैन की कोटि अन्तर विधि का प्रयोग किन परिस्थितियों में उपयुक्त है? |
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Answer» यह विधि उन परिस्थितियों में उपयुक्त है जहाँ तथ्यों का प्रत्यक्ष संख्यात्मक माप सम्भव न हो तथा उन्हें एक निश्चित क्रम के अनुसार रखा जा सके। |
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कार्ल पियर्सन के सहसम्बन्ध गुणांक की दो मान्यताएँ बताइए। |
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Answer» ⦁ दो घटनाओं के मध्य परस्पर कारण और परिणाम का सम्बन्ध पाया जाता है। |
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कार्ल पियर्सन द्वारा प्रतिपादित सहसम्बन्ध गुणांक एक आदर्श माप क्यों है? |
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Answer» यह माप समान्तर माध्य और प्रमाप विचलन पर आधारित है। इसलिए यह एक आदर्श माप है। |
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स्पियरमैन कोटि अन्तर विधि का सूत्र बताइए। |
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Answer» स्पियरमैन कोटि अन्तर विधि का सूत्र: -rk = \(1-\frac{6\sum D^2}{N(N^2-1)}\) |
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कार्ल पियर्सन के सहसम्बन्ध गुणांक का प्रमुख गुण क्या है? |
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Answer» इस विधि के द्वारा केवल दिशा व मात्रा का अनुमान ही नहीं बल्कि उसका परिमाणात्मक माप भी प्राप्त होता है। |
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निम्नलिखित तीन मापों में, कौन-सा माप किसी भी प्रकार के संबंध की माप कर सकता(क) कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक(ख) स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध(ग) प्रकीर्ण आरेख |
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Answer» (क) कार्ल पियर्सन सहसंबंध गुणांक |
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कोटि अन्तर सहसम्बन्ध गुणांक के गुण व दोष बताइए। |
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Answer» गुण- |
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सहसम्बन्ध गुणांक के प्रमुख गुण बताइए। |
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Answer» सहसम्बन्ध गुणांक के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं ⦁ r की कोई इकाई नहीं होती, यह एक संख्या मात्र है। |
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