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आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहां तक उचित हैं?

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‘दान’ शब्द को कन्या के साथ जोड़ देने पर कन्या वस्तु को आभास देने लगती है, वह भी दान को वस्तु बन जाती है। कन्या कोई वस्तु नहीं है, जिसे दान दिया जा सके। एक दृष्टि से यह अर्थ दोषपूर्ण है। दूसरी तरफ कन्या को देते समय मां-बाप अपनी एक कीमती धरोहर वर को सौंपते हैं। इस अर्थ में वह एक पुण्यकर्म है, किन्तु आज की सामाजिक परिस्थितियों में कन्यादान की बात मूल अर्थ में दोषपूर्ण लगती है।



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