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‘कन्यादान’ कविता में किसे दुःख बाँचना नहीं आता और क्यों ? |
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Answer» ‘कन्यादान’ कविता में बेटी को दुःख बाचना नहीं आता क्योंकि अभी वह सयानी नहीं है। उसे सामाजिक छल-छद्म, वंचना तथा प्रपंच का ज्ञान नहीं है। वह चुपचाप दुःखों को सहन करना ही जानती है। |
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