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माँ ने बेटी को कैसे सावधान किया है ?

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कवि ने वस्रों तथा आभूषणों की तुलना शाब्दिक भ्रमों से की है। जिस तरह वस्त्रों-आभूषणों को देखकर स्त्री उसे स्नेह समझ बंध जाती है, उसी तरह अपनी शाब्दिक प्रशंसा सुनकर भी वह आत्ममुग्ध बन स्नेहजाल में फंसती है। इसलिए उसे इन दोनों से बचकर रहने की सीख माँ के माध्यम से कवि ने बेटी को दिया है।



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