1.

अवधान और रुचि के सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।

Answer»

मनोवैज्ञानिकों में अवधान और रुचि के विषय में परस्पर मतभेद है। रुचि और अवधान के परस्पर सम्बन्ध में तीन मत प्रचलित हैं

1. अवधान रुचि पर आधारित है :
इस मत के प्रतिपादकों का कहना है कि व्यक्ति उन्हीं बातों पर ध्यान देता है, जिनमें उसकी रुचि होती है। दूसरे शब्दों में, अवधान रुचि पर आधारित है। जिसे वस्तु में हमारी रुचि नहीं होगी, उस पर हमारी चेतना केन्द्रित नहीं होगी।
2.रुचि अवधान पर आधारित है-कुछ मनोवैज्ञानिकों का मत है कि रुचि का आधार ध्यान है। जब हम किसी वस्तु पर ध्यान देंगे ही नहीं तो हमारी उस वस्तु के प्रति रुचि उत्पन्न होगी ही नहीं। रुचि की। जागृति तभी होती है, जब हम किसी वस्तु पर ध्यान देते हैं।
3. समन्वयवादी मत :
यह मत उक्त दोनों मतों का समन्वय करता है। इस मत के समर्थकों के अनुसार अवधान और रुचि दोनों ही एक-दूसरे पर आधारित हैं। रॉस (Ross) के अनुसार, “अवधान तथा रुचि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यदि रुचि के कारण कोई व्यक्ति किसी वस्तु पर ध्यान देता है तो अवधान के कारण उस वस्तु में उसकी रुचि उत्पन्न हो जाएगी।” मैक्डूगल ने भी लिखा है, “रुचि गुप्त अवधान है और अवधान सक्रिय रुचि है।”



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions