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कक्षा में बालकों के अवधान को केन्द्रित करने के मुख्य उपायों का सामान्य विवरण प्रस्तुत कीजिए।

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बालकों का अवधान केन्द्रित करने के उपाय
शिक्षण को उत्तम एवं प्रभावकारी बनाने के लिए बालकों के अवधान को पाठ्य विषय पर केन्द्रित होना आवश्यक माना जाता है। कक्षा में बालकों को अवधान केन्द्रित करने के लिए निम्नांकित उपाय काम में लाये जा सकते हैं

1. शान्त वातावरण :
ध्यान की एकाग्रता के लिए शान्त वातावरण का होना अत्यन्त आवश्यक है। शोरगुल बालकों के ध्यान को विचलित कर देता है। अतः अध्यापक का कर्तव्य है कि वह कक्षा में सदा शान्ति बनाये रखने का प्रयत्न करें।
2. विषय के प्रति रुचि जाग्रत करना :
यह बात सर्वमान्य है। कि जिस विषय में बालक की रुचि होती है, उसे वह कम समय में और कुशलता से सीख लेता है। अतः रुचि उत्पन्न करना अध्यापक का एक आवश्यक कार्य हो जाता है। वास्तव में विषय में रुचि उत्पन्न हो जाने पर छात्रों के ध्यान के भटकने को प्रश्न ही नहीं उठता।
3. बालकों की रुचियों का ध्यान :
विषय के प्रति रुचि जाग्रत करने के साथ-साथ अध्यापक को बालकों की रुचियों का भी ध्यान अतः शिक्षण के समय बालकों की रुचियों का ध्यान रखा जाए।
4. जिज्ञासा प्रवृत्ति का उपयोग :
बालकों का ध्यान पाठ पर केन्द्रित करने के लिए उनमें जिज्ञासा जाग्रत करना भी अत्यन्त आवश्यक है।
5. विषय में परिवर्तन :
ध्यान स्वभाव से चंचल होता है। अतः बालक अधिक काल तक किसी विषय पर अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर सकते। अत: एक विषय को अधिक समय तक न पढ़ाकर किसी दूसरे विषय का शिक्षण प्रारम्भ करना चाहिए।
6. सहायक सामग्री का प्रयोग :
सहायक सामग्री बालक के ध्यान को विषय पर केन्द्रित करने में विशेष योग देती है। ऐसी दशा में यथासम्भव सहायक सामग्री का प्रयोग अवश्य करना चाहिए।
7. उचित शिक्षण विधियों का प्रयोग :
व्याख्यान विधि जैसी परम्परागत शिक्षण विधियाँ छात्रों का ध्यान अधिक देर तक विषय पर केन्द्रित नहीं रख पातीं। अतः बालक को ध्यान आकर्षित करने के लिए। अध्यापक को चाहिए कि वह खेल विधि, निरीक्षण विधि तथा प्रयोगात्मक विधि आदि का उपयोग भी करें।
8. पूर्व ज्ञान का नवीन ज्ञान से सम्बन्ध :
बालकों के पूर्व ज्ञान से नवीन ज्ञान को सम्बन्धित करना आवश्यक है। जब नवीन ज्ञान पूर्व ज्ञान से सम्बन्धित हो जाता है तो बालक का ध्यान सरलता से केन्द्रित हो। जाता है।
9. उचित वातावरण :
अनुचित वातावरण बालकों के ध्यान की एकाग्रता में सहायक नहीं होता है। यदि प्रकाश का अभाव है, बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है तथा आसपास बदबू आती है तो छात्रों को। अपना ध्यान केन्द्रित करने में कठिनाई होगी। अत: कक्षा के वातावरण को अनुकूल बनाना चाहिए।
10. बालक का स्वास्थ्य :
कमजोर बालक, जिसके सिर में दर्द रहता है, जिनकी आँखें कमजोर हैं। तथा जो कम सुनते हैं, वे पाठ पर अपना ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। अतः बालक के स्वास्थ्य के विषय में अध्यापक को अभिभावकों से सम्पर्क स्थापित करना चाहिए।
11. सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार :
अध्यापक को बालकों के ध्यान को विषय के प्रति आकर्षित करने के लिए उनके साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। कठोर व्यवहार से बालक ध्यान को एकाग्र नहीं कर पाते हैं।
12. पर्याप्त विश्राम :
थकान ध्यान को विचलित करने में सहायक होती है। अत: प्रधानाचार्य को कर्तव्य है कि वह विद्यालय की समय-सारणी का निर्माण इस ढंग से करे कि बालकों को पर्याप्त विश्राम मिल सके तथा उन्हें कम-से-कम थकान का अनुभव हो।



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