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भूमि की उत्पादकता से क्या आशय है? भूमि की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले तत्त्वों का वर्णन कीजिए। 

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भूमि की उत्पादकता/कार्यक्षमता

भूमि की कार्यक्षमता भूमि का प्रयोग जिस कार्य के लिए होता है, उसके लिए भूमि की उपयुक्तता को भूमि की कार्यक्षमता’ (Efficiency of Land) कहते हैं; जैसे- उपजाऊ मैदानों में बहने वाली नदियाँ बिजली उत्पादन के लिए उपयुक्त होती हैं। भूमि की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले तत्त्व भूमि की कार्यक्षमता निम्नलिखित तत्त्वों पर निर्भर करती है

1. भूमि सम्बन्धी कानून भूमि के सम्बन्ध में सरकार की नीति एवं भूमि सम्बन्धी कानून का भी भूमि की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है। जहाँ किसानों का भूमि पर पूर्ण स्वामित्व सम्बन्धी कानून होता है, वहाँ किसान | भूमि पर अथक परिश्रम करके भूमि की कार्यक्षमता को बढ़ाता है।

2. भूमि की स्थिति भूमि की स्थिति से भी भूमि की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ता है। शहर से दूर या मुख्य मार्ग से हटकर स्थित भूमि शहर के निकट की भूमि से कम कार्यक्षमता वाली मानी जाती है। शहर के मुख्य मार्ग की भूमि मकान के लिए तथा अल्पविकसित या ग्रामीण  क्षेत्रों की भूमि कृषि के लिए उत्तम होती है। ऐसी स्थिति में यातायात व्यय भी कम होते हैं।

3. प्राकृतिक तत्त्व भूमि के प्राकृतिक गुण; जैसे-उर्वरा शक्ति, जलवायु, सर्य का प्रकाश, मिटटी, वर्षा, भमि की सतह की बनावट आदि से भमि की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। जो भमि जिस कार्य के लिए उपयोगी होती है, उस भूमि पर वही कार्य किया जाए, तो उससे भूमि की कार्यक्षमता अधिक बनी रहती है; जैसे-काली मिट्टी में कपास और भुरभुरी मिट्टी में गेहूं बोने पर भूमि की उत्पादकता में वृद्धि होती है। भूमि की उत्पादन शक्ति प्राकृतिक तत्त्वों पर भी निर्भर करती है।

4. आर्थिक तत्त्व भूमि की कार्यक्षमता पूँजी की मात्रा, भूमि को स्वामित्व, संगठन की योग्यता, कुशलता, आदि से भी प्रभावित होती है।

5. मानवीय प्रयास द्वारा किया गया भूमि सुधार भूमि पर कार्य करने वाले मनुष्यों के प्रयत्नों का भूमि की कार्यक्षमता पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। मनुष्य भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए उर्वरकों का प्रयोग करते हैं तथा सिंचाई के साधनों का विकास करके भूमि के प्रति सुधारात्मक कार्य करते हैं, परन्तु ये कार्य भूमि की उपजाऊ शक्ति को कम करते हैं तथा भूमि का कटाव करते हैं।

6. भूमि को उपजाऊपन भूमि की कार्यक्षमता भूमि की उर्वरा शक्ति से भी प्रभावित होती है।

7. संगठनकर्ता की योग्यता भूमि की कार्यक्षमता एक कुशल संगठनकर्ता पर भी निर्भर करती है। किस भूमि के लिए किस अनुपात में बीज तथा खाद या उर्वरक का प्रयोग किया जाना चाहिए, यह संगठनकर्ता की योग्यता पर ही निर्भर करता है।
भूमि की उत्पादकता को प्रभावित करने वाले तत्त्वं भूमि की उत्पादकता को निम्नलिखित तत्त्व प्रभावित करते हैं-

1. सरकारी नीति सरकार द्वारा उचित नीतियाँ अपनाकर भी भूमि की कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सकता है। सरकार द्वारा किसानों को साख-सुविधाएँ, सिंचाई सुविधाएँ, आदि प्रदान की जाती हैं, जिससे किसान उन्नत खाद-बीज खरीदकर भूमि की उत्पादकता को बढ़ाता है।

2. सामाजिक तथा राजनीतिक तत्त्व देश की सामाजिक तथा राजनीतिक परिस्थितियाँ भी भूमि की उत्पादकता पर अपना प्रभाव डालती हैं। भारत में भूमि का उपविभाजन, उपखण्डन की समस्याएँ उत्तराधिकार के नियमों के चलते पनप रही हैं, जिससे भूमि की उत्पादकता घट रही है। साथ ही राजनीतिक अस्थिरता भी भूमि की उत्पादन क्षमता पर अपना प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

3. उन्नत तकनीक उत्पादन में वैज्ञानिक तथा आधुनिक तकनीकों  का प्रयोग कर उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। अत: भूमि की उत्पादन-क्षमता पर उन्नत तकनीकों का प्रयोग अपना प्रभाव डालता है।



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