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उत्पादन में भूमि का क्या महत्त्व है? भूमि की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। |
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Answer» भूमि का महत्त्व उत्पत्ति के अनिवार्य साधन में भूमि का महत्त्व निम्नलिखित है- ⦁ यातायात के साधनों के विकास का आधार किसी देश के यातायात व संचार के साधनों का विकास उस देश की भूमि के स्वरूप पर आधारित होता है। समतल भूमि पर परिवहन के साधनों का तेजी से विकास किया जा सकता है। ⦁ कृषि का आधार भूमि कृषि का आधार है। कृषि कार्य भूमि के बिना नहीं किया जा सकता है। सभी प्रकार के भोज्य पदार्थ भूमि से ही प्राप्त होते हैं। ⦁ जीवित रहने का आधार मनुष्य भूमि पर चलता-फिरता है, काम करता है, मकान बनाता है, खेती करता है, कारखानों की स्थापना करता है। इस प्रकार, मनुष्य भूमि के बिना एक पल भी जीवित नहीं रह सकता है। ⦁ औद्योगिक विकास का आधार किसी देश का औद्योगिक विकास भूमि पर ही निर्भर करता है, क्योंकि कारखानों के लिए कच्चा माल, खनिज पदार्थ, जल शक्ति, वायु शक्ति, कोयला, आदि की पूर्ति भूमि के द्वारा ही पूर्ण की जाती है। ⦁ प्राथमिक उद्योगों का विकास सभी प्रकार के प्राथमिक उद्योग; जैसे कृषि व खनिज व्यवसाय, मछली व्यवसाय, वन व्यवसाय, आदि भूमि पर ही निर्भर होते हैं। सभी प्रकार के खनिज पदार्थ भी भूमि से ही प्राप्त किए जाते हैं। ⦁ आर्थिक सम्पन्नता का सूचक भूमि आर्थिक सम्पन्नता का सूचक होती है। जिस देश के पास जितनी अधिक प्राकृतिक सम्पदा या भूमि होती है, उस देश को उतना ही अधिक सम्पन्न माना जाता है। ⦁ रोजगार का आधार भूमि मनुष्य को रोजगार प्रदान करने का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। कृषि-प्रधान राष्ट्रों में भूमि का महत्त्व अधिक होता है। ⦁ भूमि सम्पूर्ण उत्पादन कार्यों को आधार है भूमि के बिना किसी भी प्रकार का उत्पादन करना असम्भव है। अत: भूमि प्रत्येक प्रकार की उत्पादन गतिविधियों के लिए अनिवार्य है। ⦁ विभिन्न वैज्ञानिक कार्यों का आधार मनुष्य भूमि से प्राप्त खनिजों, जल, वायु, आदि को विभिन्न अनुपातों में मिलाकर उससे उपयोगी वस्तुएँ; जैसे दवाइयाँ, मशीनरी, यन्त्र व अन्य वैज्ञानिक विकास की वस्तुएँ बनाता है। ⦁ भूमि के द्वारा आय प्राप्ति भूमि के द्वारा आय प्राप्त की जा सकती है। भूमि | के प्रयोगों का विस्तार करके अधिक उत्पादन किया जा सकता है तथा भूमि के वैकल्पिक प्रयोगों द्वारा आय का क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है। भूमि की विशेषताएँ भूमि का अर्थ भूमि उत्पादन का सबसे अनिवार्य व महत्त्वपूर्ण साधन है। साधारण भाषा में, भूमि का अभिप्राय केवल भूमि की ऊपरी सतह से होता है, परन्तु अर्थशास्त्र में भूमि का अभिप्राय उन समस्त प्राकृतिक उपहारों से है जिसके अन्तर्गत भूमि की सतह, वायु, प्रकाश, खनिज, जल, आदि प्रकृति-प्रदत्त पदार्थ सम्मिलित होते हैं। मार्शल के अनुसार, “भूमि का अर्थ केवल भूमि की ऊपरी सतह से नहीं है, वरन् उन समस्त भौतिक पदार्थों एवं शक्तियों से है, जो प्रकृति ने मनुष्य की सहायतार्थ नि:शुल्क रूप से जल, वायु और प्रकाश के रूप में प्रदान की हैं।” स्मिथ एवं पैटरसन के अनुसार, “प्रकृति की कोई भी भेट, जिसे हम आवश्यकता की सन्तुष्टि के लिए प्रयोग में लाते हैं, प्राकृतिक साधन या भूमि एस. के. रुद्र के अनुसार, “भूमि में वे समस्त शक्तियाँ सम्मिलित हैं, जिन्हें प्रकृति निःशुल्क उपहारों के रूप में प्रदान करती है।” भूमि की विशेषताएँ या लक्षण भूमि की विशेषताएँ या लक्षण निम्नलिखित ⦁ भूमि प्रकृति का निःशुल्क उपहार है भूमि को प्रकृति का एक नि:शुल्क उपहार बताया गया है। भूमि के अन्तर्गत भूमि की सतह, जंगल, पहाड़, पठार, नदी-नाले, खनिज, समुद्र, आदि प्रकृति से प्राप्त पदार्थ सम्मिलित हैं, जो हमें नि:शुल्क प्राप्त होते हैं। ⦁ भूमि निष्क्रिय होती है भूमि उत्पत्ति का एक अनिवार्य साधन है। लेकिन यह एक निर्जीव साधन है। भूमि उत्पत्ति की क्रिया में सक्रिय रूप से भाग नहीं लेती है। इसमें किसी व्यक्ति द्वारा श्रम लगाकर उत्पादन कार्य किया जा सकता है। मनुष्य द्वारा भूमि पर श्रम करके उत्पादन सम्भव किया जाता है। ⦁ भूमि में विविधता पाई जाती है प्रत्येक स्थान का भू-तले अपनी स्थिति व उर्वरा शक्ति के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है; जैसे-कहीं पर उपजाऊ भूमि पाई जाती है, तो कही पर बंजर, कहीं पर लाल मिट्टी पाई जाती है, तो कहीं पर काली मिट्टी। ⦁ भूमि सीमित है भूमि की पूर्ति सीमित होती है तथा इसे बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता है। केवल भूमि पर गहन कृषि कार्य करके प्रभावी पूर्ति को बढ़ाया जा सकता है। ⦁ भूमि स्थिर है भूमि अपने स्थान पर स्थिर रहती है। यह अपने स्थान को छोड़कर कहीं नहीं जा सकती है; जैसे-हिमालय पर्वत को उठाकर अमेरिका नहीं ले जाया जा सकता है। ⦁ भूमि नाशवान नहीं है निरन्तर खेती करने से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती है, परन्तु भूमि नष्ट नहीं हो सकती है। ⦁ भूमि के विभिन्न उपयोग भूमि के विभिन्न उपयोग; जैसे-खेती, मकान बनाना, कारखाने लगाना, सड़कें बनाना, आदि हो सकते हैं। ⦁ भूमि उत्पादन का अनिवार्य साधन भूमि उत्पादन का एक महत्त्वपूर्ण व अनिवार्य साधन है। इसके बिना उत्पादन कार्य करना सम्भव नहीं होता है। ⦁ भूमि का मूल्य उसकी स्थिति पर निर्भर करता है भूमि का मूल्य उसकी स्थिति अर्थात् शहर से दूरी, उपजाऊपन, दुर्गम या सुगम स्थान, आदि पर निर्भर करता है; जैसे-शहर के निकट वाली भूमि का मूल्य अधिक होगा, जबकि शहर से दूर स्थित भूमि का मूल्य कम होगा। ⦁ भूमि जीवन का आधार भूमि मानव जीवन का आधार है। मानव इसका विभिन्न रूपों में प्रयोग करके अपने जीवन का निर्वाह करता है। जीवन-स्तर की विभिन्न क्रियाओं का आधार ही भूमि है। |
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