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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ कविता के बहाने।कविता एक खेल है बच्चों के बहानेबाहर भीतरयह घर, वह घरसब घर एक कर देने के मानेबच्चा ही जाने।

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कठिन-शब्दार्थ-एक कर देना = भेद-भाव मिटा देना।

संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक में संकलित कवि कुँवर नारायण की कविता ‘कविता के बहाने’ से लिया गया है। कवि कविता की तुलना बच्चों के खेल से कर रही है।

व्याख्या-कवि कहता है कि कविता बच्चों के खेल के समान है। बच्चे घर के बाहर तथा अन्दर एक घर से दूसरे घर तक बेरोक-टोक खेलते हैं। वे अपने खेल द्वारा सभी घरों को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। खेल द्वारा सभी भेदभावों को मिटाकर सच्ची एकता पैदा करने की क्षमता बच्चों में ही होती है। कविता भी बच्चों के खेल की तरह ही है। कवि अनेक भावों और विचारों की कल्पना करके उनके साथ खेलता है। उसकी कविता का प्रभाव सभी श्रोताओं तथा पाठकों पर होता है। कविता का आनन्द देश-काल की सीमाओं में नहीं बँधता। सच्ची कविता सभी कालों में तथा सभी देशों में लोगों को प्रभावित करती है। दूरियाँ मिटाकर संसार में वास्तविक एकता कविता ही ला सकती है।

विशेष-
(i) कविता की तुलना बच्चों के खेल से करते हुए कवि संदेश देना चाहता है कि जैसे बच्चे निष्पक्ष भाव से ५.. घर से दूसरे में खेलने चले जाते हैं, इसी प्रकार, एक अच्छी कविता भी बिना किसी पक्षपात के सभी का मनोरंजन करती है।
(ii) बच्चे जिस प्रकार अपने खेलों से एक घर को दूसरे से जोड़ते हैं, कवि भी उसी प्रकार अपनी कविता से समाजों और देशों का एक-दूसरे को समझने का अवसर देता है। उन्हें परस्पर मिलाता है।
(iii) काव्यांश की भाषा सरल है और प्रवाहपूर्ण है। गहरे भावों को सहजता से व्यक्त करती है।
(iv) ‘बाहर-भीतर’, ‘यह घर वह घर’ तथा ‘बच्चों के बहाने’ में अनुप्रास अलंकार है।
(v) काव्यांश पाठकों को सभी भाषाओं के काव्यों के अनुशीलन के लिए प्रेरित करता है।



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