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‘क्या तुमने भाषा को सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा’-इस कथन में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» इस कथन द्वारा कवि उन साहित्यकारों पर व्यंग्य कर रहा है जो सीधी-सच्ची बात को कहने के लिए चमत्कारपूर्ण भाषा का सहारा लेते हैं तथा अपने इस प्रयास द्वारा भावों के सौन्दर्य को क्षति पहुँचाते हैं। कवि कहना चाहता है कि अच्छी कविता का गुण सरलता ही होता है। अतः भाषा के चक्कर में उसे हानि नहीं पहुँचानी चाहिए। |
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