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‘मेरा जीवन’ को “आत्मकथा” के रूप में लिखिए। |
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Answer» मेरा जीवन : मैं ने हँसना सीखा है। मैं रोना नहीं जानती है | मेरे जीवन में हर क्षण सोना बरसा करता है। “पीडा कैसी होती है”? – इसे मैं अब तक जान न पाई हूँ। मेरे हँस-हँस जीवन में चिंता क्रीडा कैसी करती है? मैं इस जग के बारे में असार सुनती हूँ। लेकिन यह जग मुझे सुख – सार दिखाता है। सदा मेरे आँखों के सामने सुख का सागर ही लहराता है। मेरे जीवन में उत्साह और उमंग सदा (निरंतर) रहते हैं। मेरे मतवाले मन में उल्लास और विजय हँसते रहते हैं। मेरे जीवन को प्रतिक्षण आशा से आलोकित करती रहती हूँ। हमेशा मुझे सुख भरे सुनहरे बादल घेरे रहते हैं। मेरे जीवन का साथी हैं – विश्वास, प्रमे और साहस। |
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