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मत घबराना कविता का भावार्थ लिखें। |
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Answer» 1) बाधाओं से मत घबराना। कवि कहता है कि बाधाओं से बिना डरे आगे बढ़ते जाना चाहिए। साथ कोई हो न हो, आगे बढ़ते जाना चाहिए। चाँद-सितारे तुम्हारा दर्द बाँट लेंगे। उन्हें सच्चा साथी मानकर अपनी व्यथा सुनाएँ। 2) वीराने में नदियाँ-निर्झर, कवि कहते हैं- नदियाँ व झरने हँसते-गाते हुए बढ़ते है। उनका कोई साथी नहीं रहता। वैसे ही तुम भी अकेले जाना। तुम अपने साथी स्वयं ही हो। उनको अपना सच्चा साथी समझकर वैसे तुम भी आगे बढ़ो। 3) पथ क्या वह बाधाएँ जिसमें कवि कहते हैं- पथ में कई बाधाएँ आती हैं। तितलियाँ रोककर तुम्हें ललचाएगी, परन्तु तुम न डरते हुए और न ललचाते हुए बीच राह में न रूकते हुए आगे बढ़ना चाहिए। 4) मंजिल सदा उसी को मिलती कवि अन्त में कहते हैं कि मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो धैर्य के साथ आगे बढ़ते हैं, जो काँटों को भी फूल समझकर पार करते हैं, जो विपत्तियों से हाथ मिलाते हैं। कायर तो घबराते हैं और वे डरने का बहाना बनाते हैं। वीर कभी बहाना नहीं बनाते। आगे बढ़ते रहते हैं। |
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