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निम्न लिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।मैं ने हँसना सीखा है, मैं नहीं जानती रोना।बरसा करता पल – पल पर मेरे जीवन में सोना।मैं अब तक जान न पाई कैसी होती है पीड़ा।हँस – हँस जीवन में कैसे करती हैं चिंता क्रीड़ा।आशा आलोकित करती मेरे जीवन को प्रतिक्षण|है स्वर्णसूत्र से वलयित मेरी असफलता के धन।सुख भरे सुनहरे बादल रहते हैं मुझको घेरे।विश्वास, प्रेम, साहस जीवन के साथी मेरे।प्रश्न :1. किसके जीवन में आशा आलोकित करती है?2. मैं ने हँसना सीखा है’ – यहाँ “मैं ने” कौन है?3. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर क्या बरसा करता है?4. यह पद्यांश किस पाठ से दिया गया है?5. प्रेम – शब्द का पर्याय लिखिए। |
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