1.

निम्न लिखित पद्यांश पढ़कर दिये गये प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए।मैं ने हँसना सीखा है, मैं नहीं जानती रोना।बरसा करता पल – पल पर मेरे जीवन में सोना।मैं अब तक जान न पाई कैसी होती है पीड़ा।हँस – हँस जीवन में कैसे करती हैं चिंता क्रीड़ा।आशा आलोकित करती मेरे जीवन को प्रतिक्षण|है स्वर्णसूत्र से वलयित मेरी असफलता के धन।सुख भरे सुनहरे बादल रहते हैं मुझको घेरे।विश्वास, प्रेम, साहस जीवन के साथी मेरे।प्रश्न :1. किसके जीवन में आशा आलोकित करती है?2. मैं ने हँसना सीखा है’ – यहाँ “मैं ने” कौन है?3. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर क्या बरसा करता है?4. यह पद्यांश किस पाठ से दिया गया है?5. प्रेम – शब्द का पर्याय लिखिए।

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  1. कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान जी के जीवन में आशा आलोकित करती है।
  2. मैं ने हँसना सीखा है। यहाँ “मैं ने” सुभद्रा कुमारी चौहान (कवयित्री) जी है।
  3. कवयित्री के जीवन में पल – पल पर सोना बरसा करता है।
  4. ये पद्यांश “मेरा जीवन” नामक पद्य पाठ से दिये गये हैं।
  5. प्रेम शब्द का पर्याय है – प्यार / मोहब्बत


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