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निम्नलिखित पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए(क) बसौ मेरे नैनन में नंद लाल।मोहनि मूरति साँवरी सूरति नैना बनै विसाल।मोर मुकुट मकराकृत कुंडल अरुण तिलक दिये भाल।अधर सुधारस मुरली राजति उर वैजन्ती माल।छुद्र घंटिका कटि तट सोभित नुपूर शब्द रसाल।मीरा प्रभु सन्तन सुखदाई भक्त बछल गोपाल॥

Answer»

कवयित्री अपनी कामना व्यक्त करते हुए कहती है कि हे नंद के पुत्र श्री कृष्ण, आप मेरे नेत्रों में निवास करने की कृपा करो। आपकी मोहित करने वाली आकृति तथा सांवले रंग की सूरत है। आपके नेत्र बहुत बड़े-बड़े हैं। आप ने मोर के पंखों का मुकुट सिर पर और कानों में मकर की आकृति के कुंडल धारण किए हुए हैं। आपके माथे पर लाल रंग का तिलक सुशोभित हो रहा है। आप के होठों पर अमृत समान मधुर स्वर रस की वर्षा करने वाली बाँसुरी तथा हृदय पर वैजंती माला विराजमान है। छोटी-छोटी घंटियाँ आप की कमर पर बंधी हुई हैं तथा पैरों में घुघरू बंधे हैं जिनकी मधुर गुंजार सुनाई दे रही है। मीरा के प्रभु संतों को सुख प्रदान करते हैं तथा अपन भक्तों की सदा रक्षा करते हैं।



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