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ससंदर्भ भाव स्पष्ट कीजिए:मंजिल सदा उसी को मिलतीधीर-वीर जो बढ़ता जाता।काँटों को भी फूल समझता,विपदाओं से हाथ मिलाता।कायर तो घबराते वे ही,वीर न करते कभी बहाना। |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ के ‘मत घबराना’ नामक कविता से ली गई हैं जिसके रचयिता डॉ. रामनिवास ‘मानव’ हैं। |
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