This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.
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बैंकों में खोले जाने वाले विभिन्न बचत खातों का वर्णन करते हुए बैंक में धनराशि को जमा करने के लाभों का वर्णन कीजिए। बैंक में बचत विनियोग के कौन-से साधन उपलब्ध हैं?याबैंक में कितने प्रकार के खाते खोले जा सकते हैं?याबैंक की उपयोगिता लिखिए।बैंक में खोले जाने वाले किन्हीं चार खातों के नाम बताइए। |
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Answer» बैंक देश की मुख्य वित्तीय एवं व्यावसायिक संस्थाएँ हैं जो धन के लेन-देन का कार्य उच्च स्तर पर करती हैं। ये संस्थाएँ सुसंगठित होती हैं और इनका सारे देश में एक जाल-सा बिछा हुआ है। अधिकांश बैंक राष्ट्रीयकृत हैं। इनमें जमा धनराशि पर ब्याज की प्राप्ति होती है। बैंकों द्वारा चेक, ड्राफ्ट आदि के द्वारा भुगतान की सुविधा प्रदान की जाती है। बैंकों से विभिन्न प्रकार के ऋण भी प्राप्त किए । जा सकते हैं। (1) बचत खाता-यह किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में खोला जा सकता है। इसके लिए न्यूनतम धनराशि अवयस्कों के लिए रे 100/- तथा वयस्कों के लिए र 1000/- होती है तथा अधिकतम धनराशि की कोई सीमा नहीं है। इस खाते में इच्छानुसार रुपया जमा कराया जा सकता है, परन्तु वर्ष में 150 बार से अधिक रुपया नहीं निकाला जा सकता। खाताधारक को एक लेखा-पुस्तिका अथवा पास-बुक मिलती है जिसमें खाताधारक का नाम, पता व खाता संख्या अंकित होते हैं। रुपया जमा करने व निकालने का विवरण भी लेखा-पुस्तिका में अंकित किया जाता है। बैंक से रुपया निकासी फाई अथवा चेक के द्वारा निकाला जा सकता है। बैंक से चेक-बुक लेने के पश्चात् वाताधारक को अपने खाते में कम-से-कम 1000/- की धनराशि छोड़नी होती है। बचत खाते में जमा धनराशि पर 4% की दर से वार्षिक ब्याज मिलता है। ब्याज की दर समय-समय पर ‘रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया’ के निर्देशानुसार बदलती रहती है। घरेलू लघु बचत के लिए यह खाता उत्तरा 37 जाता है। इसे खाते में जमा धन सुरक्षित र है तथा उश्यकता पड़ने पर तुरन्त निकाला भी जा सकता है। (2) चालू खाता-इसमें खाताधारक कभी भी रुपया जमा कर सकता है एवं निकाल सकता है। खाताधारक केवल चेक के प्रयोग द्वारा ही रुपया निकाल सकता है। इस खाते में जमा धनराशि पर कोई ब्याज नहीं मिलता, बल्कि खाताधारक को बैंक को सेवा शुल्क अदा करना पड़ता है। सामान्य रूप से व्यापारी वर्ग ही इस प्रकार का खाता खोलता है तथा इस खाते के माध्यम से ही व्यापारिक लेन-देन करता है। घरेलू बचतों के लिए चालू खाता उपयुक्त नहीं माना जाता। (3) घरेलू जमा खाता-यह खाता निम्न एवं मध्यम वर्ग के लिए अत्यन्त लाभकारी है। यह बच्चों तथा गृहिणी में बचत करने की भावना को प्रोत्साहित करता है। इसमें बैंक की ओर से ताला लगी एक गुल्लक दी जाती है जिसमें छोटी-छोटी बचत राशि डाली जाती है। प्रतिमाह यह राशि पास–बुक में जमा हो जाती है। (4) सावधि जमा खाता-इस खाते में एक निश्चित धनराशि एक निश्चित अवधि के लिए जमा की जाती है। जमा की जाने वाली धनराशि पर निर्धारित दर से ब्याज दिया जाता हैं। वर्तमान अधिकतम दर 8% है। (5) आवर्ती जमा खाता- र 5/- या इसके गुणक में एक निश्चित अवधि के लिए यह खाता खोला जाता है। इसमें प्रतिमाह निश्चित की गई धनराशि नियमित रूप से जमा करानी होती है। अवधि पूर्ण होने पर रुपया ब्याज सहित मिल जाता है। अवधि 12 माह से 120 माह तक है। (1) धनराशि पर ब्याज की प्राप्ति-बैंक में जमा धनराशि न केवल अत्यन्त सुरक्षित होती है वरन् उस पर उचित दर से ब्याज की प्राप्ति भी होती रहती है। इस प्रकार बचत, मूलधन वृद्धि के साथ प्राप्त होती है। (2) धनराशि की सुरक्षा–यदि परिवार द्वारा बचाई गई धनराशि को बैंक में जमा करवा दिया। जाता है तो धनराशि सुरक्षित हो जाती है। वास्तव में बैंकों में जमा धनराशि अत्यन्त सुरक्षित मानी जाती है। बैंक बचत के विनियोग का सबसे अधिक विश्वसनीय माध्यम है। इनमें जमा धनराशि के डूबने की सम्भावना तो होती ही नहीं है, बल्कि यह असामाजिक तत्त्वों; जैसे-चोर-डाकुओं आदि; से भी सुरक्षित रहती है। (3) धन निकालने की सुविधा बैंक में जमा धनराशि अपनी सुविधा के अनुसार वापस निकाली जा सकती है। धनराशि को निकालने में किसी भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता है। अब तो ए०टी०एम० की सुविधा ने धन की निकासी को और अधिक सरल एवं सुविधाजनक बना दिया है। |
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बैंक के कार्य लिखिए। |
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Answer» बैंक विश्वव्यापी मुख्य वित्तीय व व्यावसायिक संस्थाएँ हैं।ये धन के लेन-देन का कार्य उच्च स्तर पर करते हैं। हम यहाँ अपनी बचत का धन जमा भी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर ऋण भी ले सकते हैं। |
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पारिवारिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए गृहिणी को क्या करना चाहिए? |
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Answer» पारिवारिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए गृहिणी को- ⦁ पारिवारिक आय का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। ⦁ आवश्यकताओं की प्राथमिकता के क्रम में धन का व्यय करना चाहिए। ⦁ अधिक मूल्य वाले खाद्य-पदार्थों के स्थान पर समान पौष्टिक गुणों वाले कम मूल्य के खाद्य-पदार्थ खरीदने चाहिए। ⦁ फसल के समय अनाज खरीदकर उनका संरक्षण कर लेना चाहिए। ⦁ पारिवारिक आय में वृद्धि के उपाय अपनाने चाहिए, क्योंकि अधिक आय एवं बचत द्वारा ही पारिवारिक स्तर ऊँचा उठाया जा सकता है। |
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वाहक चेक किसे कहते हैं? इसका लाभ बताइए। |
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Answer» वाहक चेक उस चेक को कहते हैं जिसे ले जाकर कोई भी व्यक्ति बैंक से नकद राशि ले सकता है। इस प्रकार का चेक अपने किसी भी विश्वसनीय व्यक्ति को देकर बैंक से धन निकलवाया जा सकता है। |
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चेक भरते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? |
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Answer» चेक भरते समय निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए 1. दिनांक-चेक पर दिनांक लिखना अत्यावश्यक है। साधारणत: जिस दिन चेक लिखा जाता है, वही दिनांक चेक पर लिखी जाती है। कभी-कभी चेक पर आगे की दिनांक डाल दी जाती है। ऐसा प्रायः उस दशा में किया जाता है, जब लेखक भविष्य में किसी निश्चित दिनांक को ही रुपया अदा करना चाहता है। इस दशा में जब तक वह दिनांक नहीं आती है, तब तक चेक का भुगतान प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस प्रकार के चेक को ‘आगामी दिनांक का चेक’ (Post-dated Cheque) कहते हैं। कभी-कभी कुछ चेकों पर पिछली (पूर्व की) दिनांक भी डाल दी जाती है। इस प्रकार के चेक को ‘पिछली दिनांक का चेक’ (Ante-dated Cheque) कहते हैं। संक्षेप में किसी भी चेक का रुपया चेक पर अंकित दिनांक से 3 माह के अन्दर लिया जा सकता है। इस नियत अवधि से अधिक दिन हो जाने पर बैंक चेक का भुगतान नहीं करता। 3 माह से अधिक पुराना चेक ‘बासी चेक’ (Stale Cheque) कहलाता है। 2. पाने वाले का नाम-चेक में प्राप्तकर्ता का नाम स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए। प्राप्तकर्ता का नाम लिखते समय आदरसूचक शब्द एवं डिग्री; जैसे-श्री, श्रीमान, पण्डित, श्रीयुत्, डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर आदि नहीं लिखा जाता। यदि चेक का लेखक स्वयं रुपया निकालना चाहता है तो उसे नाम के स्थान पर ‘स्वयं’ (Self) शब्द लिख देना चाहिए। ऐसे चेक का भुगतान लेखक को या उसके आदेशानुसार किसी भी अन्य व्यक्ति को दे दिया जाता है। 3. चेक की राशि-चेक में लिखी जाने वाली रकम में किसी भी प्रकार की काट-छांट या उपरिलेख (Cutting or Overwriting) नहीं होनी चाहिए। यदि कोई कटिंग (काट-छाँट) हो तो उस पर अपने नमूने के हस्ताक्षर कर देने चाहिए। चेक में शब्दों एवं अंकों में लिखी जाने वाली रकम में भी अन्तर नहीं होना चाहिए। शब्दों में रकम लिखने के पश्चात् केवल’ (Only) शब्द का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। जालसाजी से बचने के लिए आजकल चेक संरक्षक यन्त्र’ (Cheque Protector) का प्रयोग किया जाता है। 4. लेखक के हस्ताक्षर-चेक पर लेखक के हस्ताक्षर होना आवश्यक है। हस्ताक्षर सावधानी से करने चाहिए तथा वही हस्ताक्षर करने चाहिए जो नमूने के हस्ताक्षर के रूप में बैंक की ‘हस्ताक्षर-पुस्तिका’ में हैं। हस्ताक्षर न मिलने पर बैंक चेक का भुगतान नहीं करता! हस्ताक्षर पेंसिल से या मुहर लगाकर कभी भी नहीं करने चाहिए 5. प्रतिपर्ण भरना-चेक के बाईं ओर वाले भाग को ‘प्रतिपर्ण’ कहते हैं। लेखक को चेक के प्रतिपर्ण को भी सावधानी से भरना चाहिए। इस पर दिनांक, प्राप्तकर्ता का नाम, रकम एवं भुगतान करने का उद्देश्य अवश्य भर लेना चाहिए। इससे भावी सन्दर्भ में सुविधा रहती है। |
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‘बचत तथा ‘धन के संचय’ में अन्तर स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» सामान्य रूप से कुछ लोग बचत तथा धन के संचय के मध्य अन्तर नहीं समझते। यदि धन को भविष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति में व्यय न करके घर पर ही एकत्र करके रख लिया जाता है तो उसे धन का संचय कहा जाता है। यदि बचाए गए धन का समुचित विनियोग किया जाए तो उसे बचत कहा जाता है। उचित विनियोग द्वारा बचाए गए धन में निरन्तर वृद्धि होती है, जब कि संचित धन का क्रमशः मूल्य घटता जाता है तथा साथ ही चोरी आदि की चिन्ता भी बनी रहती है। अतः पारिवारिक बचत का समुचित विनियोग किया जाना चाहिए। |
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चेक कितने प्रकार के होते हैं? |
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Answer» चेक प्राय: तीन प्रकार के होते हैं ⦁ साधारण चेक ⦁ उपहार चेक ⦁ ट्रैवलर चेक |
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पास बुक की उपयोगिता बताइए। |
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Answer» पास बुक में दिए गए विवरण से व्यक्ति को अपने खाते में हुए समस्त लेन-देन तथा ब्याज आदि की सही जानकारी प्राप्त हो जाती है। |
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बैंक में धन रखना क्यों अच्छा माना जाता है?याबैंक में बचत खाता खोलने के क्या लाभ हैं? |
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Answer» बैंक में बचत खाता खोलने के निम्नलिखित लाभ हैं ⦁ धन पूर्ण रूप से सुरक्षित रहता है। ⦁ धन सरलतापूर्वक जमा किया व निकाला जा सकता है। ⦁ चेक की सुविधा उपलब्ध होती है। ⦁ जमा धनराशि पर ब्याज भी मिलता है। ⦁ ए०टी०एम तथा ई बैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। |
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चेक-बुक की क्या उपयोगिता है?याचेक-बुक रखने से क्या लाभ है? |
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Answer» बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई चेक-बुक के माध्यम से धन का लेन-देन सरल एवं सुरक्षित हो जाता है। एक नगर से दूसरे नगर तक धन को भेजना भी सम्भव हो जाता है। |
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यूनिट ट्रस्ट ऑफ इण्डिया से आप क्या समझती हैं? |
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Answer» यह योजना 1964 ई० में आरम्भ की गई थी। इसमें पारिवारिक बचत को एकत्रित कर विभिन्न उद्योगों में लगाया जाता है। लाभांश यूनिट धारकों के मध्य वितरित कर दिया जाता है। |
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आय-व्यय क्या है ? आय-व्यय में सन्तुलन रखने के लिए क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए? |
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Answer» पारिवारिक आय एवं व्यय गृह अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक महत्त्व पारिवारिक आय का होता है। पारिवारिक आय से आशय उस धनराशि से है, जो किसी परिवार द्वारा एक निश्चित अवधि में अर्जित की जाती है। आय अर्जित करने के लिए कुछ-न-कुछ आर्थिक प्रयास करने पड़ते हैं। व्यापक अर्थ में पारिवारिक आय में आर्थिक प्रयासों के बदले में मिलने वाली धनराशि के अतिरिक्त उन सुविधाओं को भी सम्मिलित किया जाता है, जो इन प्रयासों के बदले में उपलब्ध होती हैं। प्रो० ग्रास तथा प्रो० केण्डल ने पारिवारिक आय की परिभाषा इन शब्दों में प्रतिपादित की है, ‘पारिवारिक आय मुद्रा, वस्तुओं, सेवाओं तथा सन्तोष का वह प्रवाह है जो परिवार के अधिकार में उसकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को पूर्ण करने तथा उत्तरदायित्वों के निर्वाह हेतु आता है। पारिवारिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जिस धन को व्यय किया जाता है उसे ही पारिवारिक व्यय कहा जाता है। सामान्य रूप से, परिवार के लिए मासिक अथवा वार्षिक अवधि में होने वाले व्यय को ही पारिवारिक व्यय के रूप में स्वीकार किया जाता है। व्यय वास्तव में आवश्यकताओं की पूर्ति का एक साधन है। आय-व्यय में सन्तुलन बनाने के लिए सावधानियाँ (1) विवेकपूर्ण व्यय-जो व्यक्ति प्रत्येक आवश्यकता के महत्त्व को समझकर उसी के अनुरूप अपने विवेक से धन का व्यय निश्चित करता है वही आय का पूर्ण और उचित लाभ उठाता है। (2) दैनिक व्यय के आधार पर बजट में संशोधन–बजट के अनुसार व्यय के लिए दैनिक हिसाब रखना आवश्यक है। यदि किसी महीने में किसी कारणवश महीना पूरा होने से पहले ही धन समाप्त होने लगता है तब हम बजट के आधार पर यह देख सकते हैं कि हमारा धन कौन-सी आवश्यकता पर अधिक व्यय हुआ है, जिससे उस मास के व्यय में धन की कमी पड़ रही है। इससे सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि अगले महीने के बजट में उचित सुधार किया जा सकता है। (3) बजट से अधिक व्यय हो जाने पर समायोजन—कुछ उत्सवों; जैसे-दीपावली, दशहरा तथा जन्मदिन; पर अधिक धन खर्च हो जाता है, तब बजट के अनुसार हम अगले महीने में खर्च हुए धन के व्यय में उचित समायोजन कर सकते हैं। (4) बचत करना–गृहिणी को शुरू से ही आवश्यक बचत करते रहने की आदत डालनी चाहिए तथा ऋण लेने की बात कभी नहीं सोचनी चाहिए। भविष्य की आकस्मिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन की बचत करना गृहिणी का प्रमुख कर्तव्य है। यदि वह बचत करने की अपेक्षा हर महीने होने वाली आमदनी का सारा पैसा खर्च करती रहती है तो भविष्य में जरूरत पड़ने पर एक भयंकर समस्या सामने आती है तथा इस समय उसे दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ेगा और जिसे वह काफी समय तक चुकता करने में असमर्थ रहेगी। (5) नियन्त्रित व्यय–बजट बनाने से मनुष्य अपनी सीमित आय से सभी आवश्यकताओं की पूर्ति मितव्ययिता के साथ करता है तथा अनावश्यक व्यय से बच जाता है। बजट बनाकर व्यय करने से व्यक्ति अपनी आय के अन्दर व्यय करने का अभ्यस्त हो जाती है। (6) वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं के बीच उचित वितरण-अपनी सीमित आय के अन्दर व्यक्ति वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य में आने वाली आकस्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति भी चाहता है; जैसे—दुर्घटना, बीमारी, शादी आदि। इनके लिए भी धन की बचत की आवश्यकता होती है। जीवन बीमा आदि कराना भी इसी मनोवृत्ति का परिणाम है। (7) आवश्यकता के आधार पर बजट में व्यय के प्रावधान में अन्तर करना—बजट के अन्तर्गत आने वाली आवश्यकताओं के महत्त्व को जानकर यह निश्चित किया जाता है कि किस आवश्यकता को पहले पूरा किया जाए तथा किसे बाद में। यदि किसी अनिवार्य आवश्यकता की पूर्ति में धन की कमी पड़ रही है, तब गृहिणी को मनोरंजन एवं विलासिता सम्बन्धी आवश्यकताओं के व्यय में कमी करनी पड़ती है, इस विधि को सम-सीमान्त उपयोगिता का नियम कहते हैं। |
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गृह-व्यय में मितव्ययिता के लिए किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है? |
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Answer» गृह-व्यय में मितव्ययिता के लिए सुझाव सुचारु गृह-अर्थव्यवस्था तथा पारिवारिक बजट की सफलता के लिए सर्वाधिक आवश्यक है-गृह-व्यय में मितव्ययिता को अपनाना। मितव्ययिता कंजूसी नहीं है, यह अपव्यय से बचने का एक उपाय है। मितव्ययिता में परिवार की आवश्यकताओं की अवहेलना नहीं की जाती, वरन् उन्हें सूझ-बूझ द्वारा रूपान्तरित किया जाता है। मितव्ययिता के लिए वस्तुओं की कीमतों की पूर्ण जानकारी, कीमतों की तुलना, विभिन्न वस्तुओं के गुण-दोष की जानकारी तथा उनके कम कीमत में उपलब्ध होने वाले स्थान की जानकारी आवश्यक होती है। मितव्ययिता के लिए निम्नलिखित बातों को अनिवार्य रूप से ध्यान में रखना चाहिए । (1) आवश्यकतानुसार खरीद-खरीद आवश्यकतानुसार ही करनी चाहिए। कुछ गृहिणियाँ प्रत्येक वस्तु को थोक में खरीदती हैं। यह आदत जहाँ कुछ बचत करती है, वहीं वस्तु के प्रयोग में लापरवाही होने के कारण उससे हानि भी होती है। (2) नकद भुगतान-मितव्ययिता की धारणा के अनुसार समस्त घरेलू वस्तुएँ यथासम्भव नकद भुगतान द्वारा ही खरीदनी चाहिए। आजकल बहुत-सी वस्तुएँ किस्तों पर भी मिलने लगी हैं। इन वस्तुओं को किस्तों पर लेने पर ब्याज भी चुकाना पड़ता है। उधार अथवा किस्तों पर सामान लेने की आदत विकसित हो जाने पर अनावश्यक वस्तुएँ भी खरीद ली जाती हैं जिससे पारिवारिक बजट बिगड़ जाता है। (3) सही स्थान से खरीदारी–घर का प्रत्येक सामान, चाहे वह खाने का हो या पहनने का, सदैव विश्वसनीय दुकान से ही खरीदना चाहिए। इससे उचित कीमत पर अच्छा सामान मिलेगा। (4) गुणों की पहचान-गृहिणी को अच्छी, शुद्ध एवं ताजी वस्तुओं की पहचान होनी चाहिए। उसे सस्ते व पौष्टिक गुणों वाले खाद्य पदार्थों का ही प्रयोग करना चाहिए। (5) कुछ वस्तुएँ थोक में खरीदना-कुछ वस्तुएँ ऐसी होती हैं, जिनकी वर्ष भर आवश्यकता बनी रती है; उदाहरण के लिए-गेहूँ एवं चावल। इस प्रकार की वस्तुओं को फसल की कटाई के अवसर पर आवश्यकतानुसार खरीद लेना चाहिए। इस अवसर पर ये सस्ती मिल जाती हैं तथा इससे मितव्ययिता में योगदान प्राप्त होता है। (6) संरक्षण विधि का ज्ञान-यदि गृहिणी को खाद्य-सामग्री के संरक्षण का ज्ञान है तो वह घर पर ही अचार, मुरब्बे, टमाटर की चटनी आदि तैयार कर सकती है। मितव्ययिता के दृष्टिकोण से इन वस्तुओं को घर पर ही तैयार कर लेना चाहिए। (7) गृह-कार्यों के लिए कम-से-कम सेवक रखना–घर के आवश्यक कार्यः जैसे-खाना बनाना, कपड़े धोना, घर की सफाई आदि; गृहिणी को स्वयं ही करने चाहिए। इससे धन की काफी बचत हो जाती है। यह तथ्य कामकाजी महिलाओं पर लागू नहीं होता। (8) बालकों को स्वयं पढ़ाना-बालकों को स्वयं पढ़ाना भी गृहिणी के लिए अति आवश्यक है। इससे रुपये की बचत के साथ-साथ बालकों को स्वयं पढ़ने की आदत डाली जा सकेगी। (9) घर की वस्तुओं की देखभाल तथा मरम्मत करना–मितव्ययिता के लिए आवश्यक है। कि समस्त घरेलू वस्तुओं एवं उपकरणों की अच्छी तरह से देखभाल की जाए तथा इनके उत्तम रख-रखाव और मरम्मत की उचित व्यवस्था की जाए। इससे इनके अपव्यय से भी बचा जा सकता है। (10) जरूरी वस्तुओं का सावधानीपूर्वक प्रयोग–पानी, ईंधन व प्रकाश (बिजली) जैसी जरूरी वस्तुओं का सावधानीपूर्वक प्रयोग करना चाहिए। आवश्यकता न होने पर इनका खर्च रोक देना चाहिए। |
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पारिवारिक आय में वृद्धि के उपाय बताइए। या यह बताइए कि पारिवारिक आय का विवेकपूर्ण व्यय क्यों आवश्यक है? |
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Answer» पारिवारिक आय में वृद्धि के उपाय आज के भौतिक युग में यदि आवश्यकताएँ अनेक हैं तो व्यय असीमित। परिणामस्वरूप सामाजिक स्तर के अनुसार जीवन-यापन के लिए प्रायः पति-पत्नी दोनों को धन अर्जित करने के लिए कार्य करने पड़ते हैं। यह सब होने के पश्चात् भी आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती ही रहती हैं। अतः इनके निराकरण के लिए आय में वृद्धि के उपाय अपनाने आवश्यक हो जाते हैं। कुछ ऐसे उपयोगी उपाय निम्नलिखित हैं (1) परस्पर प्रेम एवं सहयोग-परिवार में परस्पर प्रेम और सहयोग का वातावरण होना चाहिए। परिवार के सभी योग्य सदस्यों को साहचर्य भाव से धन अर्जित करने के प्रयास करने चाहिए। (2) घरेलू उद्योग-धन्धे अपनाना–सिलाई-कढ़ाई, सौन्दर्य प्रसाधन केन्द्र,बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना, कचरी-पापड़ आदि बनाना कुछ ऐसे कार्य हैं जिनसे पारिवारिक आय में सहज ही वृद्धि की जा सकती है। (3) मितव्ययिता के आवश्यक तत्त्वों का ज्ञान-फिजूलखर्ची एवं धन का अविवेकपूर्ण व्यय परिवार के लिए सदैव घातक सिद्ध होते हैं। धन के विवेकपूर्ण उपयोग से आय-व्यय में सन्तुलन बना रहता है। मितव्ययिता के सिद्धान्तों का पालन करने से कम धन का व्यय करके अधिकतम आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाना सम्भव हो पाता है। आय, व्यय और बचत 25 पारिवारिक आय का विवेकपूर्ण व्यय मितव्ययिता सफलता की कुंजी है। जिस परिवार के सदस्य परिवार की आय का विवेकपूर्ण व्यय नहीं करते, वह परिवार कभी भी अधिकतम सन्तोष प्राप्त नहीं कर सकता। वास्तव में, फिजूलखर्ची जोवन को नष्ट कर देती हैं। अत: परिवार के प्रत्येक सदस्य को धन का महत्त्व समझना चाहिए और वर्तमान महँगाई के युग में परिवार की आय में से अधिक-से-अधिक बचत करने का प्रयास करना चाहिए। आज की बचत कल के सुख का आधार बनती है, परन्तु बचत करना आय के विवेकपूर्ण व्यय पर भी निर्भर करता है। पानी की एक-एक बूंद से समुद्र तैयार होता है। अत: प्रत्येक व्यय में से यदि गृहिणी कुछ भी अपने विवेक से बचा सकने में सफल हो जाती है तो वह पर्याप्त बचत कर सकती है, जो परिवार के सुखदायी भविष्य का निर्माण करती है। |
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ट्रैवलर चेक से आप क्या समझती हैं?याट्रैवलर चेक की उपयोगिता लिखिए। |
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Answer» बैंक में धन जमा कर ट्रैवलर चेक प्राप्त किए जा सकते हैं। ये प्रायः र 50/-, र 100/- एवं र 1000/- के होते हैं। ये देश के किसी भी शहर में, जहाँ पर जारीकर्ता बैंक की शाखा है, भुनाए जा सकते हैं। यात्रा आदि में धन सुरक्षित ले जाने का ये उपयुक्त माध्यम हैं। |
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उपहार चेक किसे कहते हैं? |
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Answer» उपहार चेक र 21, 51, 101 तथा 151 तक की धनराशि के होते हैं तथा जन्म-दिन, विवाह आदि शुभ अवसरों पर भेंट किए जाते हैं। |
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निम्नलिखित में से कौन-सी वस्तु पूँजी नहीं है ?(क) दस का नोट(ख) फैक्टरी भवन(ग) टैक्सी(घ) औजार |
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Answer» सही विकल्प है (घ) औजार |
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आय-व्यय में सन्तुलन हेतु निम्नलिखित में से कौन-सा साधन उपयुक्त होगा?(क) वार्षिक बजट(ख) मासिक बजेट(ग) साप्ताहिक बजट(घ) दैनिक बजट |
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Answer» सही विकल्प है (ख) मासिक बजट |
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बैंक के दो प्रकार के खातों के नाम लिखिए। |
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Answer» ⦁ बचत खाता |
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आय के साधन लिखिए। |
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Answer» पारिवारिक आय के सम्भावित साधन हैं-वेतन, पेंशन, दैनिक मजदूरी, कृषि, व्यापार या व्यवसाय, घरेलू उद्योग-धन्धे, पशुपालन, ब्याज, उपहार तथा कुछ अन्य स्रोत। |
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बचत को सुरक्षित रखने का प्रमुख साधन है।(क) बॉक्स में रखना।(ख) बैंक में जमा करना(ग) पड़ोसियों के घर रखना(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) बैंक में जमा करना |
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बचत आर्थिक सुरक्षा का साधन है।(क) स्कूली बच्चों के लिए।(ख) पड़ोसियों के लिए(ग) स्वयं तथा आश्रितों के लिए(घ) मेहमानों के लिए |
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Answer» सही विकल्प है (ग) स्वयं तथा आश्रितों के लिए |
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उपहार चेक की राशि होती है ।(क) र 25(ख) र 21(ग) र 30(घ) र 50 |
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Answer» सही विकल्प है (ख) र 21 |
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किसी शुभ अवसर पर दिया जाने वाला चेक कहलाता है।(क) ट्रैवलर चेक(ख) क्रॉस चेक(ग) उपहार चेक(घ) ऑर्डर चेक |
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Answer» सही विकल्प है (ग) उपहार चेक |
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जीवन बीमा मुख्य रूप से सुरक्षा का साधन है।(क) स्वयं के लिए।(ख) पड़ोसियों के लिए(ग) आश्रितों के लिए(घ) किसी के लिए नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ग) आश्रितों के लिए |
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बैंक में कम-से-कम कितनी राशि से खाता खोला जा सकता है?(क) र 1,000(ख) र 200(ग) र 100(घ) र 500 |
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Answer» सही विकल्प है (ग) र 100 |
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बचत का मुख्य प्रयोजन है (क) भविष्य के आवश्यक और आकस्मिक व्यय के लिए(ख) मनोरंजन के लिए(ग) विलासात्मक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए(घ) सुख-प्राप्ति के लिए । |
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Answer» सही विकल्प है (क) भविष्य के आवश्यक और आकस्मिक व्यय के लिए |
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किसान विकास-पत्र योजना है।(क) जीवन बीमा की(ख) डाकखाने की(ग) बैंक की(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) डाकखाने की |
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जीवन बीमा का मुख्य उद्देश्य है।(क) शादी विवाह के लिए धन उपलब्ध कराना(ख) बीमाधारक को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना(ग) अधिक ब्याज देना(घ) बीमा धारक के आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना |
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Answer» सही विकल्प है (घ) बीमा धारक के आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना |
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बचत की आवश्यकता है।(क) मनोरंजन के लिए।(ख) बँगला खरीदने के लिए।(ग) भविष्य के आकस्मिक खर्चे के लिए(घ) ये सभी |
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Answer» सही विकल्प है (घ) ये सभी |
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सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के उपरान्त प्राप्त होता है।(क) वेतन(ख) पेंशन(ग) बोनस(घ) इनमें से कुछ नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ख) पेंशन |
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दैनिक जीवन में किसकी बचत अति आवश्यक है ?(क) समय(ख) धन(ग) श्रम(घ) इन सभी की |
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Answer» सही विकल्प है (घ) इन सभी की |
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‘किसान विकास-पत्र के विषय में आप क्या जानती हैं? |
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Answer» घरेलू बचतों के विनियोग के लिए एक उत्तम योजना किसान विकास–पत्र भी है। यह योजना डाकघर के माध्यम से चलाई जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत जमा की गई धनराशि 9 वर्ष 5 माह में दोगुनी हो जाती है। किसान विकास-पत्र को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में गिरवी रखकर ऋण प्राप्त किया जा सकता है। इस योजना के अन्तर्गत की गई बचत पर किसी प्रकार की आयकर सम्बन्धी छूट नहीं मिलती। |
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पूर्ण प्रतियोगिता की अवस्था में फर्म होती है(क) कीमत ग्रहण करने वाली एवं कीमत-निर्धारित करने वाली(ख) कीमत ग्रहण करने वाली, कीमत निर्धारित करने वाली नहीं(ग) कीमत ग्रहण करने वाली नहीं, परन्तु कीमत निर्धारित करने वाली(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं |
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Answer» (ख) कीमत ग्रहण करने वाली, कीमत निर्धारित करने वाली नहीं। |
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सीमान्त आय किसे कहते हैं ? |
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Answer» सीमान्त आय अन्तिम इकाई की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय होती है। किसी वस्तु की अधिक अथवा एक़ कम इकाई बेचने से कुल आय में जो वृद्धि अथवा कमी होती है, वह उस वस्तु से प्राप्त होने वाली सीमान्त आय कहलाती हैं। |
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औसत उत्पादकता क्या है? |
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Answer» कुल उत्पादकता को साधन की संख्या से भाग देकर औसत आय प्राप्त कर ली जाती है। |
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कुल आय बराबर है(क) वस्तु की बेची गयी इकाइयों की संख्या x कीमत(ख) वस्तु की बेची गयी इकाइयों की संख्या + कीमत(ग) वस्तु की बेची गयी इकाइयों की संख्या – कीमत(घ) वस्तु की बेची गयी इकाइयों की संख्या + कीमत |
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Answer» (क) वस्तु की बेची गयी इकाइयों की संख्या x कीमत। |
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| 38. |
यदि किसी वस्तु की 1 इकाई का बाजार मूल्य ₹16 है, तो उसकी 25 इकाइयों की कुल आय कितनी होगी ? |
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Answer» कुल आय = 25 x 16 = ₹ 400. |
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| 39. |
सीमान्त एवं औसत आगम में सम्बन्ध बताइए। याकुल आय, सीमान्त आय और औसत आय में सम्बन्ध बताइए। |
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Answer» जैसे-जैसे कोई फर्म अतिरिक्त इकाइयों का उत्पादन करती है, कुल आगम में वृद्धि होती जाती है। धीरे-धीरे कुल आगम में वृद्धि की दर में कमी आने लगती है और एक सीमा के बाद इसमें वृद्धि होनी समाप्त हो जाती है। इस बिन्दु पर उत्पादक उत्पादन कार्य समाप्त कर देगा। औसत आय एवं सीमान्त आय में आरम्भ से ही धीरे-धीरे कमी आने लगती है किन्तु सीमान्त आय के घटने की गति औसत आय की तुलना में तीव्र होती है। |
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| 40. |
सीमान्त आय बराबर है(क) कुल आय x पिछली इकाइयों की आय(ख) सीमान्त आय + पिछली इकाइयों की आय(ग) कुल आय – पिछली इकाइयों की आय(घ) उपर्युक्त (ख) एवं (ग) |
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Answer» (ग) कुल आय – पिछली इकाइयों की आय। |
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| 41. |
आगम से तात्पर्य है।(क) वस्तु की बिक्री से होने वाली आय(ख) साधनों की बिक्री से होने वाली आय(ग) सीमान्त आय(घ) औसत आगम |
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Answer» सही विकल्प है (क) वस्तु की बिक्री से होने वाली आय। |
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| 42. |
पूर्ण प्रतियोगिता में सीमान्त आय रेखा और औसत आय रेखा का स्वरूप होता है(क) नीचे गिरती हुई(ख) ऊपर उठती हुई(ग) बराबर व क्षैतिज(घ) इनमें से कोई नहीं |
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Answer» सही विकल्प है (ग) बराबर व क्षैतिज। |
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