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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

चुंबक है धरती हमारी पाठ का सारांश अंग्रेज़ी में लिखिए ।

Answer»

This lesson describes how Newton proved that Earth itself is a big magnet. He observed an apple falling from a tree. He started listing reasons for this cause. And after analysing it, concluded that earth has magnetic properties. There was once a boy. He was very intelligent. His name was Isaac Newton. One day while he was sitting in the garden, he noticed an apple falling down from the tree. He took the apple and threw it up. He noticed that it again dropped down. He started thinking about this. After much research he concluded that earth has magnetic properties.

2.

वाक्यों को सही क्रम से लिखिए :1. एक था युवक बुद्धिमान।2. सेब से गिरा पेड़ एक लाल।3. फिर फेंका से को सेब उसने।4. कर देख-देख लगा सोचने।5. कर लगाया सोच-सोच पता।

Answer»

1. एक बुद्धिमान युवक था ।

2. एक लाल सेव पेड़ से गिरा ।

3. सेब को उसने फिर से फेंका

4. देख-देख कर लगा सोचने ।

5. सोच-सोच कर पता लगाया ।

3.

अन्य वचन रूप लिखिए :1.    पेड़ 2.    वस्तु3.    बच्चा 

Answer»

1.    पेड़ – पेड़

2.    वस्तु – वस्तुएँ

3.    बच्चा – बच्चे

4.

विलोम शब्द लिखिए :1.    सगुण 2.    धरती3.    दिन4.    ऊपर 5.    आखिर 6.    पता 

Answer»

1.    सगुण x निर्गुण

2.    धरती x आसमान 

3.    दिन x रात

4.    ऊपर x नीचे

5.    आखिर x आरंभ

6.    पता x नापता

5.

युवक कहाँ बैठा था?

Answer»

युवक बगीचे में बैठा था।

6.

सेब ऊपर से नीचे क्यों गिरा? न्यूटन ने खोज-बीन करके क्या समझाया?

Answer»

धरती में चुंबकीय गुण होता है|इसलिए सेब ऊपर से नीचे गिरा और न्यूटन ने खोजबीनकरा समझाया चुंबक बनकर धरती हमारी वस्तुएँ खींचे समझाया हैं।

7.

पेड़ से गिरे सेब को देखकर न्यूटन ने क्या सोचा?

Answer»

पेड़ से गिरे सेब को देखकर न्यूटन ने सोचा पेड़ को देखा, ऊपर देखा, नीचे देखा, फिर सेब को उसने फेंका सेब नीचे आया तब पता लगाया कि धरती में चुंबकीय गुण होता है ।

8.

पेड़ से क्या गिरा?

Answer»

पेड़ से एक सेब गिरा ।

9.

युवक का क्या नाम था?

Answer»

युवक का नाम आइज़क न्यूटन ।

10.

युवक कैसा था?

Answer»

युवक बुद्धिमान था।

11.

“बाहर निकले तो सामान भी गायब लड़का भी गायब” इस वाक्य की तुलना पाठ में आये किस वाक्य से की जा सकती है?

Answer»

वह शख्स जो कल आपके चरण छूता था; आपका वोट लेकर गायब हो गया है।

12.

वाक्य शुद्ध कीजिए-(क) वहीं जिसके मामा हैं हम।(ख) वोटों की भाग गया लेकर पूरी पेटी।(ग) पहुँचे वाराणसी सज्जन एका(घ) माधव विद्यालय गया से घर।(ङ) शैली है गाना रही गा।

Answer»

(क) वहीं जिसके मामा हैं हम।                                        वही जिसके हम मामा हैं।
(ख) वोटों की भाग गया लेकर पूरी पेटी।                         वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया।
(ग) पहुँचे वाराणसी सज्जन एका                                      एक सज्जन वाराणसी पहुँचे।
(घ) माधव विद्यालय गया से घर।                                      माधव घर से विद्यालय गया।
(ङ) शैली है गाना रही गा।।                                              शैली गाना गा रही है।

13.

नीचे दिये गये वाक्यों के रूप कोष्ठक में दिये गये निर्देशों के अनुसार बदलिए-(क) मैं आजकल यहीं हूँ। (नकारात्मक)(ख) वे तौलिया लपेटे यहाँ से वहाँ दौड़ते रहे। (प्रश्नवाचक)(ग) तुमने इतनी देर से मुझे नहीं पहचाना। (विस्मयबोधक)

Answer»

(क) मैं आजकल यहीं नहीं हैं।

(ख) वे तौलिया लपेटे यहाँ से वहाँ क्यों दौड़ते रहे?

(ग) तुमने इतनी देर से मुझे नहीं पहचाना?

14.

“क्यों साहब वह कहीं आपको नजर आया” इस वाक्य से लेखक को क्या आशय है?

Answer»

इस वाक्य से लेखक का आशय है कि विधायक, सांसद आदि वोट लेकर चुनाव जीतने के बाद भारतीय नागरिकों और भारतीय वोटरों की कोई सुध नहीं लेते।

15.

भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी कैसी स्थिति है?

Answer»

भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी स्थिति उस सज्जन की तरह वाराणसी में तौलिया लपेटे यहाँ से वहाँ दौड़ रहा था।

16.

व्यंग्य में मामाजी और मुन्ना किसके-किसके लिए प्रयोग किया गया है?

Answer»

व्यंग्य में मामा जी शब्द भारतीय नागरिक अथवा वोटर तथा मुन्ना शब्द एम०पी० (सांसद) को कहा गया है।

17.

कारगिल युद्ध में किन सैनिकों को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया?

Answer»

कारगिल युद्ध में कैप्टन मनोज पाण्डेय, ग्रेनेडियर कैप्टन योगेन्द्र सिंह, राइफलमैन संजय कुमार तथा विक्रम बत्रा को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

18.

भारत ने किन-किन देशों के साथ युद्ध लड़ा, पता करके लिखिए।

Answer»

भारत को 1947 में आजादी पाने के बाद दो देशों के साथ युद्ध करना पड़ा जिनमें चीन और पाकिस्तान है। चीन के साथ 1962 में भारत को तब युद्ध करना पड़ा जब चीन ने अचानक भारत पर हमला कर दिया। इस युद्ध में भारत की पराजय हुई थी।पाकिस्तान से भारत को चार बार युद्ध करना पड़ा। पहला युद्ध 1947 में, दूसरा युद्ध 1965, तीसरा युद्ध 1971 में और चौथा युद्ध 1999 में लड़ा गया। चारों युद्ध में पाकिस्तान की हार हुई।

19.

युद्ध के दौरान सर्वोच्च वीरता का प्रदर्शन करने वाले सैनिक को किस पदक से सम्मानित करने का प्रावधान है?

Answer»

युद्ध के दौरान सर्वोच्च वीरता का प्रदर्शन करने वाले सैनिक को परमवीर चक्र से सम्मानित करने का प्रावधान है।

20.

रमेश के मित्र उसके घर क्यों जाना चाहते थे?

Answer»

रमेश के मित्र उसके घर इसलिए जाना चाहते थे ताकि वे उसके दादाजी से मिल सकें और उनसे युद्ध संबंधी ढेरों जानकारियाँ प्राप्त कर सकें। रमेश के दादाजी भारतीय सेना में सूबेदार मेजर पद से हाल ही में अवकाश ग्रहण कर घर आए थे।

21.

कैप्टन विक्रम बत्रा ने 20 जून, 1999 को क्या कामयाबी हासिल की?

Answer»

कैप्टन विक्रम बत्रा को श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्वपूर्ण चोटी- 5140 को पाक सेना से मुक्त करवाने का जिम्मा दिया गया। वह क्षेत्र बहुत ही दुर्गम था फिर भी विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को सुबह 3 : 30 बजे तक उस चोटी को अपने कब्जे में ले लिया।

22.

दिये गये शब्दों का वर्ण-विच्छेद कीजिए-(i) चक्र(ii) युद्ध(iii) सैनिक(iv) पदक

Answer»

(i) चक्र = च् + अ + क् + र + अ
(i) युद्ध = य् + उ +द् + ध् + अ
(ii) सैनिक = स् + ऐ + ने + ई + क् + अ
(iv) पदक = पू + अ + द् + अ +क् + अ

23.

सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र विजेता बनने का गौरव किसे प्राप्त है?

Answer»

सबसे कम उम्र में परमवीर विजेता बनने का गौरव ब्रिगेडियर योगेन्द्र सिंह यादव (मात्र 19 वर्ष की आयु में) को प्राप्त है।

24.

खाली जगह भरिए :1.    सेब आया ……. से नीचे।2.    आखिर यह ………….. क्यों नीचे3.    सोच – सोचकर ……….. लगाया4.    खोज-बीनकर यह ……………..

Answer»

1.    सेब आया पेड़ से नीचे।

2.    आखिर यह गिरा क्यों नीचे

3.    सोच – सोचकर पता  लगाया

4.    खोज-बीनकर यह समझाया

25.

समाचार पहुँचाने के नवीन साधन कौन-कौन से हैं ?

Answer»

समाचार पहुँचाने के नवीन साधन, रेडियो, टेलीफोन, दूरदर्शन, कंप्यूटर आदि है ।

26.

आजकल प्रचलित कन्नड़, अंग्रेजी और हिंदी के दैनिक अखबारों की सूची तैयार कीजिए

Answer»
  • कन्नड – संयुक्त कर्नाटका, विजय कर्नाटका, प्रजावाणी, उदयवाणी।
  • अंग्रेजी – हिन्दुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, डेक्कन हेराल्ड, इंडियन एक्सप्रेस, नवभारत टाम्स.
  • हिंदी – दैनिक जागरण, राजस्थान पत्रिका, जनसत्ता, उदंत मार्तड आदि।
27.

कन्नड़ का पहला समाचार पत्र कौन-सा है ?

Answer»

कन्नड का पहला समाचार पत्र ‘मंगलूरू समाचार’ हैं।

28.

हिन्दी का पहला समाचार पत्र कौन-सा है?

Answer»

हिन्दी का पहला समाचार पत्र ‘उदंत मार्तड़’ है।

29.

भारत में स्त्री-शिक्षा की मुख्य समस्याओं का उल्लेख कीजिए।याभारत में बालिकाओं की शिक्षा की मुख्य समस्याएँ क्या हैं? इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? याबालिकाओं की शिक्षा के प्रसार में आने वाली कठिनाइयाँ बताइए। इनके समाधान हेतु सुझाव दीजिए।यास्त्री शिक्षा का क्या महत्त्व है? स्त्री-शिक्षा के विकास में क्या-क्या समस्याएँ हैं?याभारत में स्त्री-शिक्षा प्रसार में आने वाली बाधाओं का उल्लेख कीजिए। 

Answer»

स्त्री-शिक्षा का महत्त्व
समाज तथा घर में स्त्री का स्थान महत्त्वपूर्ण होता है। अतः स्त्रियों का शिक्षित होना जरूरी है। आज की बालिका कल की स्त्री है, जिस पर पूरे परिवार का दायित्व होता है। अत: बालिका शिक्षा (स्त्री) भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है, जितनी बालक की शिक्षा। स्त्री-शिक्षा के महत्त्व का विवरण निम्नलिखित है।

1. पारिवारिक उन्नति :
शिक्षित स्त्री अपने परिवार में विभिन्न मूल्यों का विकास तथा बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे सकती है।
2. सामाजिक उत्थान :
समाज के सतत् उत्थान के लिए भी शिक्षित नारियों का सहयोग आवश्यक है।
3. सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना :
सती प्रथा, पर्दा प्रथा, छुआछूत, अन्धविश्वास, दहेज प्रथा आदि को समाप्त करने के लिए स्त्री-शिक्षा आवश्यक है।
4. प्रजातन्त्र को सफल बनाना :
पुरुषों के समान अधिकार एवं कर्तव्य प्राप्त कराने तथा उनके प्रति चेतना जाग्रत कर प्रजातन्त्र को सफल बनाने की दृष्टि से स्त्री-शिक्षा का प्रसार आवश्यक है।

स्त्री-शिक्षा की समस्याएँ
इसमें सन्देह नहीं कि स्वाधीन भारत में स्त्री-शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त प्रगति हुई है, लेकिन कुछ समस्याएँ तथा कठिनाइयाँ स्त्री-शिक्षा के मार्ग में बाधक बनी हुई हैं। इन समस्याओं/कठिनाइयों/बाधाओं का विवरण निम्नलिखित है।

1. सामाजिक कुप्रथाएँ एवं अन्धविश्वास :
भारतीय समाज अनेक सामाजिक रूढ़ियों एवं अन्धविश्वासों से ग्रस्त है। शिक्षा के अभाव में आज भी अधिकांश लोग प्राचीन परम्पराओं एवं विचारों के कट्टर समर्थक हैं। उनका विचार है कि बालिकाओं को पढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उन्हें विवाह करके पति के घर ही जाना है। वह शिक्षित और स्वच्छन्द बालिकाओं को चरित्रहीन भी समझते हैं। कुछ परिवारों में आज भी बाल-विवाह और परदा-प्रथा विद्यमान है, जिनके कारण स्त्री-शिक्षा के प्रसार में बाधा उत्पन्न हो रही है।
2. जनसाधारण में शिक्षा का कम प्रसार :
आज भी देश की अधिकांश जनता अशिक्षित है और शिक्षा के सामाजिक तथा सांस्कृतिक महत्त्व से अनभिज्ञ है। अधिकांश लोग शिक्षा को निरर्थक और समय का अपव्यय समझते हैं। उनका विचार है कि शिक्षा केवल व्यावसायिक या राजनीतिक लाभ के लिए ही ग्रहण की जाती है। इस दृष्टि से केवल लड़कों को ही शिक्षित करना उचित है।
3. निर्धनता तथा पिछडापन :
वर्तमान समय में भारत की अधिकांश जनता निर्धन है और उसका जीवन-स्तर काफी पिछड़ा हुआ है। हमारे ग्रामीण क्षेत्र आज भी अविकसित दशा में हैं और वहाँ जीवन की अनिवार्य आवश्यकताएँ भी सुलभ नहीं हो पाती हैं। धन के अभाव के कारण वे अपने बालकों को ही शिक्षा नहीं दिला पाते हैं, फिर बालिकाओं को विद्यालय भेजना तो एक असम्भव बात है।
4. संकीर्ण दृष्टिकोण :
भारत में लोगों का स्त्रियों के प्रति बहुत संकीर्ण दृष्टिकोण पाया जाता है। अशिक्षा के कारण अधिकांश व्यक्ति यह कहते हैं कि स्त्रियों को केवल घर-गृहस्थी का कार्य भार सँभालना है, इसलिए अधिक पढ़ाने-लिखाने की आवश्यकता नहीं है। शिक्षा प्राप्त करने पर स्त्रियाँ घर के काम नहीं कर सकेंगी। इस प्रकार के संकीर्ण दृष्टिकोण स्त्री-शिक्षा के प्रसार में बाधक सिद्ध हो रहे हैं।
5. बालिका-शिक्षा के प्रति अनुचित दृष्टिकोण :
भारत में अधिकांश लोग अपने बालकों को शिक्षा नौकरी प्राप्त करने के सामाजिक कुप्रथाएँ एवं उद्देश्य से दिलाते हैं और लड़कियों को शिक्षा इसलिए देते हैं, अन्धविश्वास जिससे उनका विवाह अच्छे परिवार में हो जाए। इस अनुचित दृष्टिकोण के कारण विवाह होते ही लड़कियों की पढ़ाई बन्द करा दी जाती है।
6. शिक्षा में अपव्यय :
शिक्षा सम्बन्धी आँकड़ों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि बालकों की अपेक्षा बालिकाओं की शिक्षा पर अधिक अपव्यय होता है। वस्तुत: अधिकांश अभिभावक, के पास धनाभाव और पूर्ण सुविधाओं के उपलब्ध न होने के कारण अधिकांश छात्राएँ निर्धारित अवधि से पूर्व ही पढ़ना छोड़ देती हैं। इस कारण अनेक बालिकाएँ समुचित शिक्षा प्राप्त करने से वंचित तथा रह जाती हैं।
7. पाठ्यक्रम का उपयुक्त न होना :
हमारे देश में शिक्षा के सभी स्तरों पर बालक-बालिकाओं के लिए समान पाठ्यक्रम, पुस्तकें और परीक्षाएँ हैं। अत: अधिकांश लोग इस प्रकार की शिक्षा के विरोधी हैं, क्योंकि उनका विचार है कि बालिकाओं की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक आवश्यकताएँ बालकों से भिन्न होती हैं। अतः एक-समान पाठ्यक्रम बालिकाओं के लिए उपयुक्त नहीं होता। इस ज्ञान-प्रधान और पुस्तक-प्रधान पाठ्यक्रम का बालिकाओं के वास्तविक जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं होता।
8. बालिका विद्यालयों तथा अध्यापिकाओं की कमी :
शिक्षा के सभी स्तरों पर हमारे देश में बालिका विद्यालयों की कमी है। देश में लगभग दो-तिहाई ग्राम ऐसे हैं, जहाँ प्राथमिक शिक्षा के लिए ही कोई व्यवस्था नहीं है। शेष एक-तिहाई ग्रामों में से अधिकांश में बालिकाओं को बालकों के साथ ही प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती है। यही स्थिति माध्यमिक और उच्च शिक्षा के स्तरों पर भी है। अतः सहशिक्षा के कारण भी स्त्री-शिक्षा के प्रसार में बाधा पहुँच रही है। इसी प्रकार प्रशिक्षित अध्यापिकाओं की भी कमी है। अनेक शिक्षित स्त्रियाँ अपने अभिभावकों और पति की अनिच्छा के कारण चाहते हुए भी नौकरी नहीं कर पातीं।
9. दोषपूर्ण शैक्षिक प्रशासन :
भारत में लगभग सभी राज्यों में स्त्री-शिक्षा का प्रशासन पुरुष अधिकारियों के हाथ में है, परन्तु स्त्री-शिक्षा की समस्याओं से पूर्णतया अवगत न होने के कारण और अरुचि के कारण स्त्री-शिक्षा का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है।
10. सरकार की उदासीनता :
सरकार स्त्री-शिक्षा के प्रति उतनी जागरूक नहीं है, जितनी कि बालकों की शिक्षा के प्रति है। इस कारण ही स्त्री-शिक्षा के विकास पर बहुत कम धन व्यय किया जा रहा है। सरकार की इस उपेक्षापूर्ण नीति के कारण स्त्री-शिक्षा का वांछित विकास नहीं हो पा रहा है।

30.

स्त्री-शिक्षा से सम्बन्धित समृस्याओं के समाधान के उपायों का उल्लेख कीजिए।याबालिकाओं की शिक्षा में बाधक तत्त्वों का निराकरण किस प्रकार किया जा सकता है?यामहिला शिक्षा की प्रगति हेतु किये गये प्रयासों का वर्णन कीजिए।

Answer»

स्त्री-शिक्षा की समस्याओं का समाधान
स्त्री-शिक्षा के विकास में यद्यपि अनेक बाधाएँ हैं, परन्तु यदि धैर्यपूर्वक इन बाधाओं का सामना किया जाए तो इन पर विजय प्राप्त की जा सकती है। यहाँ हम स्त्री-शिक्षा की समस्याओं को हल करने के लिए निम्नांकित सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं।

1. रूढ़िवादिता का उन्मूलन :
जब तक समाज में रूढ़िवादिता का उन्मूलने नहीं किया जाएगा, तब तक स्त्री-शिक्षा का विकास सम्भव नहीं है। इसलिए निम्नलिखित कदम उठाये जाने चाहिए।

⦁    बाल-विवाह के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया जाए तथा इसकी हानियों से जनसाधारण को अवगत कराया जाए।
⦁    सामाजिक रूढ़ियों को समाप्त करने के लिए समाज शिक्षा का प्रसार प्रभावशाली ढंग से किया जाए।
⦁    स्त्रियों के प्रति आदर की भावना उत्पन्न करने तथा परदा-प्रथा की निरर्थकता सिद्ध करने के प्रयास किये जाएँ।
⦁    ऐसा सचित्र साहित्य प्रचारित किया जाए, जिसमें देश-विदेश की महिलाओं की सामाजिक गतिविधियों का उल्लेख हो।
⦁    ऐसी फिल्मों का प्रदर्शन किया जाए, जिनमें सामाजिक रूढ़ियों का विरोध किया गया हो।

2. अपव्यय और अवरोधन का उपचार :
स्त्री-शिक्षा में अपव्यय और अवरोधन को समाप्त करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जाएँ

⦁    विद्यालय के वातावरण को आकर्षक बनाया जाए।
⦁    पाठ्यक्रम को यथासम्भव रोचक तथा उपयोगी बनाया जाए।
⦁    रोचक और मनोवैज्ञानिक शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जाए।
⦁    परीक्षा प्रणाली में सुधार किया जाए।
⦁    अंशकालीन शिक्षा का प्रबन्ध किया जाए।
⦁    शिक्षण में खेल विधियों का उपयोग किया जाए।
⦁    स्त्री-शिक्षा के प्रति अभिभावकों के दृष्टिकोण में परिवर्तन लाया जाए।

3. भिन्न पाठ्यक्रम की व्यवस्था :
बालिकाओं के पाठ्यक्रम में भी पर्याप्त परिवर्तन की आवश्यकता है। यह बात ध्यान में रखने की है कि बालक और बालिकाओं की व्यक्तिगत क्षमताओं, अभिवृत्तियों और रुचियों में भिन्नता होती है। अतः पाठ्यक्रम के निर्धारण में इस तथ्य की उपेक्षा न की जाए। बालिकाओं के पाठ्यक्रम सम्बन्धी प्रमुख सुझाव निम्नलिखित हैं

⦁    प्राथमिक स्तर पर बालक-बालिकाओं के पाठ्यक्रम में समानता रखी जा सकती है।
⦁    माध्यमिक स्तर पर पाकशास्त्र, गृहविज्ञान, सिलाई, कताई, बुनाई आदि की शिक्षा प्रदान की जाए।
⦁    उच्च स्तर पर गृह अर्थशास्त्र, गृह प्रबन्ध, गृह शिल्प आदि की शिक्षा का प्रबन्ध किया जाए। उन्हें संगीत तथा चित्रकला की शिक्षा विशेष रूप से दी जाए।
⦁    प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के लिए।

4. ग्रामीण दृष्टिकोण में परिवर्तन :
ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर समाज शिक्षा का प्रसार किया जाए तथा विभिन्न गोष्ठियों और आन्र्दोलनों के द्वारा ग्रामीण दृष्टिकोण में परिवर्तन करने का प्रयास किया जाए। ग्रामवासियों को शिक्षा का महत्त्व समझाया जाए तथा स्त्री-शिक्षा के प्रति जो उनकी परम्परागत विचारधाराएँ हैं, उनका उन्मूलन किया जाए।
5. आर्थिक समस्या का समाधान :
आर्थिक समस्या को हल करने के लिए केन्द्र सरकार का कर्तव्य है कि वह राज्य सरकारों को पर्याप्त अनुदान दे। राज्य सरकारों का कर्तव्य है कि वे अनुदान उचित मात्रा में उचित स्त्री-शिक्षा के लिए करें तथा बालिका विद्यालयों को इतनी आर्थिक सहायता दें कि वे अपने यहाँ अधिक-से-अधिक बालिकाओं को प्रवेश दे सकें।
6. जनसाधारण के दृष्टिकोण में परिवर्तन :
स्त्री-शिक्षा के विकास के लिए जनसाधारण को शिक्षा के वास्तविक अर्थ बताये जाएँ तथा उनके उद्देश्यों पर व्यापक दृष्टि से प्रकाश डाला जाए। शिक्षा को केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन न माना जाए। शिक्षा के महत्त्व और लाभों का ज्ञान कराने के लिए फिल्मों, प्रदर्शनियों तथा व्याख्यानों आदि का प्रयोग प्रचुर मात्रा में किया जाए। जब हमारे देश के पुरुष वर्ग का शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण बदल जाएगा और वह यह समझने लगेगा कि सुयोग्य नागरिकों का निर्माण सुयोग्य व शिक्षित माताओं द्वारा ही सम्भव है, तो स्त्री-शिक्षा के मार्ग में आने वाली समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाएगा।
7. बालिका विद्यालयों की स्थापना :
सरकार का कर्तव्य है कि यथासम्भव अधिक-से-अधिक बालिका-विद्यालयों की स्थापना करे। माध्यमिक स्तर पर अधिक-से-अधिक विद्यालय खोलने की आवश्यकता है। जो बालिका विद्यालय अमान्य हैं, उन्हें सरकार द्वारा शीघ्र ही मान्यता दी जाए। धनी और सम्पन्न व्यक्तियों को बालिका विद्यालयों की स्थापना हेतु अधिक-से-अधिक आर्थिक सहायता के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
8. अध्यापिकाओं की पूर्ति :
बालिका विद्यालयों में अध्यापिकाओं की पूर्ति के लिए निम्नलिखित बातों पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है

⦁    अध्यापन कार्य के प्रति अधिक-से-अधिक महिलाएँ आकर्षित हों, इसके लिए अध्यापिकाओं के वेतन में वृद्धि की जाए।
⦁    जिन अध्यापिकाओं के पति भी अध्यापक हैं, उन्हें एक-साथ रहने की सुविधाएँ प्रदान करना तथा उनका स्थानान्तरण भी एक स्थान पर ही करना।
⦁    ग्रामीण क्षेत्रों में अध्यापिकाओं को भी आवश्यकता पड़ने पर नियुक्त करना।
⦁    अप्रशिक्षित अध्यापिकाओं को भी आवश्यकता पड़ने पर नियुक्त करना।
⦁    महिलाओं को आयु सम्बन्धी छूट प्रदान करना।
⦁    शिक्षण कार्य में रुचि रखने वाली बालिकाओं को पर्याप्त आर्थिक सहायता प्रदान करना।
⦁    वर्तमान प्रशिक्षण संस्थाओं का विस्तार करना तथा नवीन महिला प्रशिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना।

9. शिक्षा प्रशासन में सुधार :
स्त्री-शिक्षा का सम्पूर्ण प्रशासन पुरुष वर्ग के हाथ में न होकर स्त्री वर्ग के हाथ में होना चाहिए। सरकार का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य में एक उपशिक्षा संचालिका तथा उसकी अधीनता में विद्यालय निरीक्षिकाओं की नियुक्ति करे। स्त्री निरीक्षिकाओं द्वारा ही बालिका विद्यालयों का निरीक्षण किया जाए। बालिकाओं के लिए पाठ्यक्रम तथा शिक्षा नीति का निर्धारण भी महिला शिक्षार्थियों द्वारा किया जाए।
10. शिक्षा की उदार नीति :
सरकार का कर्तव्य है कि वह स्त्री-शिक्षा के प्रति उदार नीति अपनाये। स्त्री-शिक्षा की उपेक्षा न करके उसे राष्ट्रीय हित की योजना माना जाए तथा विभिन्न साधनों द्वारा स्त्री-शिक्षा के प्रसार में योगदान प्रदान किया जाए।

31.

“नारी सशक्तिकरण के लिए शिक्षा आवश्यक है।” इस कथन के सन्दर्भ में अपने विचार व्यक्त कीजिए। याभारत में नारी शिक्षा के विकास पर टिप्पणी कीजिए।

Answer»

पारस्परिक रूप से हमारा समाज पुरुष-प्रधान रहा है तथा समाज में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को कम अधिकार प्राप्त रहे। महिलाओं को कम स्वतन्त्रता प्राप्त थी तथा उन्हें समाज़ में अबला ही माना जाता था। परन्तु अब स्थिति एवं सोच परिवर्तित हो चुकी है। अब यह माना जाने लगा है कि समाज एवं देश की प्रगति के लिए समाज में महिलाओं को भी समान अधिकार, अवसर एवं सत्ता प्राप्त होनी चाहिए। इसीलिए हर ओर नारी सशक्तिकरण की बात कही जा रही है। नारी सशक्तिकरण की अवधारणा को स्वीकार कर लेने पर यह भी अनुभव किया गया कि “नारी सशक्तिकरण के लिए शिक्षा आवश्यक है।
वास्तव में जब समाज में स्त्रियाँ शिक्षित होंगी तो उनमें जागरूकता आएगी तथा वे अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को भी समझ सकेंगी। इसके अतिरिक्त शिक्षित नारी पारम्परिक रूढ़ियों एवं अन्धविश्वासों से भी मुक्त हो पाएँगी। शिक्षा प्राप्त नारियाँ विभिन्न व्यवसायों एवं नौकरियों में पदार्पण करके आर्थिक रूप से भी स्वतन्त्र होंगी। इससे जहाँ एक ओर वे पुरुषों की आर्थिक निर्भरता से मुक्त होंगी वहीं उनमें एक विशेष प्रकार का आत्म-विश्वास जाग्रत होगा। इस स्थिति में न तो उन्हें अबला माना जाएगा और न ही उनका शोषण ही हो पाएगा। इन समस्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कहा जा सकता है। कि नारी सशक्तिकरण के लिए शिक्षा आवश्यक है।

32.

दूसरों की क्षमताओं को कम नहीं समझना चाहिए-इस शीर्षक को ध्यान में रखते हुए एक कहानी लिखिए।

Answer»

वन में बरगद का घना-सा पेड़ था। उसकी छाया में मधुमक्खियों ने छत्ता बना रखा था। उस पेड़ पर एक कबूतर भी रहता था। वह अक्सर मधुमक्खियों को नीचा, हीन और तुच्छ प्राणी समझकर सदा उनकी उपेक्षा किया करता था। उसकी बातों से एक मधुमक्खी तो रोनी-सी सूरत बना लेती थी और कबूतर से जान बचाती फिरती। वह मधुमक्खियों को बेकार का प्राणी मानता था। एक दिन एक शिकारी दोपहर में उसी पेड़ के नीचे आराम करने के लिए रुका। पेड़ पर बैठे कबूतर को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। वह धनुषबाण उठाकर कबूतर पर निशाना लगाकर बाण चलाने वाला ही था कि एक मधुमक्खी ने उसकी बाजू पर डंक मार दिया। शिकारी का तीर कबूतर के पास से दूर निकल गया। उसने बाजू पकड़कर बैठे शिकारी को देखकर बाकी का अनुमान लगा लिया। उस मधुमक्खी के छत्ते में लौटते ही उसने सबसे पहले सारी मधुमक्खियों से क्षमा माँगी और भविष्य में किसी की क्षमता को कम न समझने की कसम खाई। अब कबूतर उन मधुमक्खियों का मित्र बन चुका था।

33.

निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचानकर लिखिए (क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही। (ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा। (ग) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।। बार बार मोहि लागि बोलावा ॥ (घ) लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु। बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु॥

Answer»

(क) ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार। 

(ख) कोटि-कुलिस – उपमा अलंकार। कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा। – उपमा अलंकार। 

(ग) तुम्ह तौ काल हाँक जनु लावा – उत्प्रेक्षा अलंकार। बार-बार मोहि लाग बोलावा – पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार। 

(घ) लखन उतर आहुति सरिस, जल सम वचन – उपमा अलंकार। भृगुवर कोप कृसानु – रूपक अलंकार।

34.

संकलित अंश में राम का व्यवहार विनयपूर्ण और संयन्न है, लक्ष्मण लगातार व्यंग्य बाणों का उपयोग करते हैं और परशुराम का व्यवहार क्रोध से भरा हुआ है। आप अपने आपको इस परिस्थिति में रखकर लिखें कि आपका व्यवहार कैसा होता?

Answer»

राम, लक्ष्मण और परशुराम जैसी परिस्थितियाँ होने पर मैं राम और लक्ष्मण के मध्य का व्यवहार करूंगा। मैं श्रीराम जैसा नम्र-विनम्र हो नहीं सकता और लक्ष्मण जितनी उग्रता भी न करूंगा। मैं परशुराम को वस्तुस्थिति से अवगत कराकर उनकी बातों का साहस से भरपूर जवाब देंगा परंतु उनका उपहास न करूंगा।

35.

राज्यपाल को वापस बुलाने का अधिकार किसे है?

Answer»

राज्यपाल को वापस बुलाने का अधिकार राष्ट्रपति को है।

36.

मुख्यमन्त्री अपने सहयोगियों के चयन में किन-किन बातों का ध्यान रखता है?

Answer»

मुख्यमन्त्री अपने सहयोगियों के चयन में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखता है.

⦁    सहयोगी प्रभावशाली, अनुभवी एवं विश्वासपात्र व्यक्ति हो।
⦁    सहयोगी में उच्च नेतृत्व क्षमता हो।
⦁    उत्तम चरित्र एवं अपराधी न हो।
⦁    प्रमुख क्षेत्रों एवं वर्गों का प्रतिनिधित्व करता हो।

37.

राज्य का संवैधानिक प्रधान कौन होता है?

Answer»

राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रधान होता है।

38.

राज्य के प्रमुख महाधिवक्ता का प्रमुख कार्य क्या है?

Answer»

वह राज्य का सर्वप्रथम विधि अधिकारी है तथा उसका प्रमुख कार्य राज्य को विधि सम्बन्धी ऐसे विषयों पर सलाह देना और विधिक स्वरूप के ऐसे अन्य कार्य करना है जो राज्यपाल उसे समय-समय पर निर्देशित करे।

39.

राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?

Answer»

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

40.

राज्य विधान परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता कौन करता है?

Answer»

राज्य विधान परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता राज्यपाल करता है।

41.

भाव स्पष्ट कीजिए (क)बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥ पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु। चहत उड़ावन पूँकि पहारू। (ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं ।। देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना।। (ग) गाधिसूनु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ। अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ ।।

Answer»

कवि कहना चाहता है कि राधिका की सुंदरता और उज्ज्वलता अपरंपार है। स्वयं चाँद भी उसके सामने इतना तुच्छ और छोटा है कि वह उसकी परछाईं-सा है। इसमें व्यतिरेक अलंकार है। व्यतिरेक में उपमान को उपमेय के सामने बहुत हीन और तुच्छ दिखाया जाता है।

42.

इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

Answer»

पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की निम्नलिखित विशेषताएँ सामने आती हैं- 

(क) देव दरबारी कवि थे। उन्होंने अपने आश्रयदाताओं, उनके परिवारजनों तथा दरबारी समाज को प्रसन्न करने के लिए जगमगाते हुए सुंदर चित्रण किए। उन्होंने जीवन के दुखों के नहीं, अपितु वैभव-विलास और सौंदर्य के चित्र खींचे। उनके सवैये में कृष्ण का दूल्हा-रूप है तो कवित्तों में वसंत और चाँदनी को भी राजसी वैभव-विलास से भरा-पूरा दिखाया गया है। 

(ख) देव में कल्पना-शक्ति का विलास देखने को मिलता है। वे नई-नई कल्पनाएँ करते हैं। वृक्षों को पालना, पत्तों को बिछौना, फूलों को झिंगूला, वसंत को बालक, चाँदनी रात को आकाश में बना ‘सुधा-मंदिर’ आदि कहना उनकी उर्वर कल्पना शक्ति का परिचायक है। 

(ग) देव ने सवैया और कवित्त छंदों का प्रयोग किया है। ये दोनों ही छंद वर्णिक हैं। छंद की कसौटी पर देव खरे उतरते हैं। 

(घ) देव की भाषा संगीत, प्रवाह और लय की दृष्टि से बहुत मनोरम है। 

(ङ) देव अनुप्रास, उपमा, रूपक आदि अलंकारों का सहज स्वाभाविक प्रयोग करते हैं। 

(च) उनकी भाषा में कोमल और मधुर शब्दावली का प्रयोग हुआ है।

43.

राज्यों में महाधिवक्ता की नियुक्ति कौन करता है?

Answer»

राज्यों में महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल करता है।

44.

राज्यपाल को उसके पद से कौन हटा सकता है? याराज्यपाल को पदच्युत करने का अधिकार किसको है? 

Answer»

राज्यपाल को उसके पद से राष्ट्रपति हटा सकता है।

45.

पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

Answer»

तुलसी की भाषा सरल, सरस, सहज और अत्यंत लोकप्रिय भाषा है। वे रस सिद्ध और अलंकारप्रिय कवि हैं। उन्हें अवधी और ब्रजे दोनों भाषाओं पर समान अधिकार है। रामचरितमानस की अवधी भाषा तो इतनी लोकप्रिय है कि वह जन-जन की कंठहार बनी हुई है। इसमें चौपाई छंदों के प्रयोग से गेयता और संगीतात्मकता बढ़ गई है। इसके अलावा उन्होंने दोहा, सोरठा, छंदों का भी प्रयोग किया है। उन्होंने भाषा को कंठहार बनाने के लिए कोमल शब्दों के प्रयोग पर बल दिया है तथा वर्गों में बदलाव किया है; जैसे 

• का छति लाभु जून धनु तोरें । 

• गुरुहि उरिन होतेउँ श्रम थोरे 

तुलसी के काव्य में वीर रस एवं हास्य रस की सहज अभिव्यक्ति हुई है; जैसे 

बालकु बोलि बधौं नहि तोहीं। केवल मुनिजड़ जानहि मोही।। 

इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाही। जे तरजनी देखि मर जाही।। 

अलंकार – तुलसी अलंकार प्रिय कवि हैं। उनके काव्य में अनुप्रास, उपमा, रूपक जैसे अलंकारों की छटा देखते ही बनती है; जैसे 

अनुप्रास – बालकु बोलि बधौं नहिं तोही। 

उपमा – कोटि कुलिस सम वचन तुम्हारा। 

रूपक – भानुवंश राकेश कलंकू। निपट निरंकुश अबुध अशंकू।। 

उत्प्रेक्षा – तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।। 

वक्रोक्ति – अहो मुनीसु महाभट मानी। 

यमक – अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहु न बूझ, अबूझ 

पुनरुक्ति प्रकाश – पुनि-पुनि मोह देखाव कुठारू। इस तरह तुलसी की भाषा भावों की तरह भाषा की दृष्टि से भी उत्तम है।

46.

विश्व की सर्वाधिक आबादी वाला देश कौन-सा है ?

Answer»

विश्व में सर्वाधिक आबादी वाला देश चीन है।

47.

महिला मुख्यमन्त्रियों के नाम लिखिए।

Answer»

सुश्री जयललिता-तमिलनाडु; सुश्री मायावती, श्रीमती सुचेता कृपलानी-उत्तर प्रदेश।

48.

विकसित देशों की प्रमुख विशेषताओं (लक्षणों) का वर्णन कीजिए।याविकसित देशों की किन्हीं तीन विशेषताओं की विवेचना कीजिए।याविकसित देशों में यातायात एवं संचार-व्यवस्था पर टिप्पणी लिखिए।

Answer»

विकसित देशों की प्रमुख विशेषताएँ (लक्षण)

जिन राष्ट्रों ने प्राकृतिक संसाधनों तथा तकनीकी ज्ञान के बल पर पर्याप्त आर्थिक विकास कर लिया है, वे विकसित राष्ट्र कहलाते हैं; उदाहरणार्थ-ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान व जर्मनी। विकसित राष्ट्रों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1. उन्नत विज्ञान तथा तकनीकी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग प्राकृतिक संसाधन किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास की आधारशिला होते हैं। पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन राष्ट्र के आर्थिक विकास की कुंजी हैं। विकसित देश उन्नत विज्ञान तथा तकनीकी द्वारा प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होते हैं। जापान तथा इंग्लैण्ड ने बड़ी मात्रा में कच्चे माले का आयात करके मात्र विज्ञान एवं उन्नत तकनीकी का समुचित उपयोग करके तीव्रता से विकास किया है।

2. वृहत् स्तर पर औद्योगीकरण – सभी विकसित राष्ट्रों ने आर्थिक स्तर को प्राप्त करने की दृष्टि से बड़े पैमाने के उद्योगों की स्थापना विशाल स्तर पर कर ली है। ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, जर्मनी आदि देशों ने औद्योगीकरण की ओर विशेष ध्यान दिया है। इन देशों में लोहा-इस्पात उद्योग, रसायन उद्योग, इन्जीनियरिंग उद्योग, मोटरगाड़ी निर्माण उद्योग, पोत व वायुयान निर्माण उद्योग आदि का तीव्र गति से विकास हुआ है।

3. कृषि का यन्त्रीकरण – विकसित देशों ने उद्योगों के लिए कृषि से कच्चे माल प्राप्त करने हेतु कृषि में मशीनों का प्रयोग प्रारम्भ कर दिया है। बड़े पैमाने पर मशीनों से कृषि की जाती है। कृषि के यन्त्रीकरण ने विकसित देशों की प्रगति के द्वार खोल दिये हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, हॉलैण्ड आदि विकसित देशों में कृषि का यन्त्रीकरण हो चुका है। इन देशों में बड़े-बड़े फार्मों , में मशीनों की सहायता से विस्तृत, सघन खेती की जाती है तथा बड़े स्तर पर व्यापारिक कृषि की जाती है तथा कृषि उत्पादन के पर्याप्त भाग का निर्यात कर दिया जाता है।

4. व्यापारिक आधार पर उद्यानों का विकास – विकसित देशों में बड़े-बड़े महानगरीय क्षेत्रों में निवास करने वाली जनसंख्या के लिए फल एवं सब्जियों के उत्पादन हेतु व्यापारिक स्तर पर उद्यानों का विकास किया गया है। इस प्रकार की कृषि को बाजार के लिए बागवानी या फलों की कृषि कहते हैं। अमेरिका एवं यूरोप के बड़े-बड़े नगरों के चारों ओर ऐसे ही उद्यान स्थित हैं।

5. उन्नत स्तर पर पशुपालन तथा दुग्ध-व्यवसाय का विकास – शीतोष्ण जलवायु, उत्तम चरागाह तथा उत्तम नस्ल के पशुओं के कारण विकसित देशों में पशुपालन तथा दुग्ध-व्यवसाय बहुत प्रगति कर गया है। पशुओं से दूध, मांस, चमड़ा,ऊन आदि पदार्थ प्राप्त होते हैं; अत: डेनमार्क, हॉलैण्ड, संयुक्त राज्य अमेरिका, न्यूजीलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण अमेरिका के कई देशों में पशुपालन का खूब विकास हुआ है। दूध से मक्खन, पनीर, दुग्ध-चूर्ण (milk-powder) आदि वस्तुएँ तैयार की जाती हैं। कई देश इनका बड़ी मात्रा में निर्यात करते हैं।

6. अत्यधिक विकसित यातायात एवं संचार-व्यवस्था – विकसित देशों में यातायात एवं संचार-व्यवस्था का विकास उच्च स्तर पर कर लिया गया है। इन देशों में सड़क तथा वृहत् रेल-पथों का जाल बिछा है। ट्रान्स-साइबेरियन रेलमार्ग विश्व की सबसे लम्बा रेलमार्ग है। इन देशों में रेल तथा वायु परिवहन का भी विकास कर लिया गया है। जल परिवहन नदियों, झीलों तथा नहरों द्वारा सम्पन्न होता है। इसके अतिरिक्त, इन देशों में  स्वचालित मोटरगाड़ियों, विद्युत रेलगाड़ियों, पनडुब्बियों, आधुनिक जलयानों तथा तीव्रगामी हवाई जहाजों ने भी इन देशों को एक-दूसरे के निकट ला दिया है। इन देशों में संचार साधनों का भी अत्यधिक विकास हुआ है।

7. अधिक प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय – विकसित राष्ट्रों में कृषि, उद्योग और व्यापार में वृद्धि होने के कारण प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय अधिक होती है, जो कि इनकी सम्पन्नता के मापदण्ड हैं। इससे इन देशों के निवासियों का जीवन-स्तर ऊँचा होता है।

8. नारी की स्थिति – विकसित देशों में स्त्रियाँ शिक्षित तथा रोजगार में संलग्न हैं तथा आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। विकसित देशों में नारी का स्थान पुरुषों के बराबर समझा जाता है। इन देशों में नारी साक्षरता का प्रतिशत ऊँचा है। अधिकांश स्त्रियाँ स्वस्थ हैं तथा राष्ट्र के निर्माण व अभ्युन्नति में सक्रिय योगदान देती हैं।

9. अन्य विशेषताएँ

  • वृहत् स्तर पर औद्योगीकरण के कारण विकसित देशों में नगरों तथा नगरीय जनसंख्या की अधिकता पायी जाती है।
  • विकसित देशों में उच्च साक्षरता पायी जाती है।
  • जनसंख्या में नियन्त्रित वृद्धि होती है।
  • विभिन्न आर्थिक क्रियाओं में आधुनिक तकनीकी ज्ञान ‘ तथा वैज्ञानिक विधि का प्रयोग किया जाता है।
49.

अवधी भाषा आज किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है?

Answer»

अवधी भाषा कानपुर से पूरब चलते ही उन्नाव के कुछ भागों लखनऊ, फैज़ाबाद, बाराबंकी, प्रतापगढ़, सुलतानपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, वाराणसी, इलाहाबाद तथा आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है।

50.

विकासशील देशों में पेट्रोलियम किन-किन देशों में प्राप्त होता है ?

Answer»

ईरान, इराक, अरब, कुवैत, ब्राजील, चीन आदि विकासशील देशों में पेट्रोलियम प्राप्त होता है।