Explore topic-wise InterviewSolutions in Current Affairs.

This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

गृह-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले गृह-सम्बन्धी कारकों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

⦁ घर का सुविधाजनक होना
⦁ सफाई
⦁ जल, वायु तथा प्रकाश की उचित व्यवस्था
⦁ भोज्य सामग्री की व्यवस्था तथा
⦁ घर की सामग्री की व्यवस्था।

2.

गृह-व्यवस्था को प्रभावित करने वाले परिवार सम्बन्धी कारकों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

⦁ पारिवारिक सौहार्द और समन्वय
⦁ आवश्यकतानुसार अनुकूलन
⦁ अच्छा आचरण, व्यवहार तथा आदतें
⦁ सुरक्षा की भावना
⦁ सामर्थ्य को ज्ञान तथा
⦁ उन्नति

3.

पारस्परिक सहयोग से क्या लाभ होता है?

Answer»

श्रम का विभाजन होता है, कार्य सुगमतापूर्वक हो जाता है तथा घर का वातावरण सुखमय व शान्तिमय रहती है।

4.

मानवीय साधन नहीं हैं(क) शक्ति(ख) ज्ञान(ग) पैसा(घ) कुशलता

Answer»

सही विकल्प है (ग) पैसा

5.

घर और मकान में क्या अन्तर है?

Answer»

मकान मिट्टी, सीमेन्ट, ईंटों, पत्थर आदि का बना ढांचा होता है जो हमें बारिश, तूफान, गर्मी, सर्दी, जंगली जानवर और चोर डाकुओं से बचाता है। परन्तु घर एक परिवार के सदस्यों की भावनाओं का सूचक है। जहाँ परिवार के सभी सदस्य इकट्ठे होकर अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ कर जीवन सुखमयी बनाते हैं।

6.

घर में वृद्ध हों तो गृह व्यवस्था कैसे प्रभावित होती है?

Answer»

क्योंकि बुजुर्गों की आवश्यकताएं परिवार के शेष सदस्यों से भिन्न होती हैं इसलिए घर के प्रबन्ध में कुछ विशेष परिवर्तन करने पड़ते हैं जैसे बुजुर्गों की खुराक को ध्यान में रखकर खाना बनाया जाता है। उठने और सोने का समय भी बुजुर्गों के अनुकूल ही रखा जाता है। घर में शोर-गुल को रोकना पड़ता है। बुजुर्गों के लिए पूजा-पाठ आदि का प्रबन्ध किया जाता है। इस तरह कई ढंगों से घर की व्यवस्था प्रभावित होती है।

7.

गृह-व्यवस्था के साधनों को कितने वर्गों में बाँटा जाता है?

Answer»

गृह-व्यवस्था के साधनों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है

⦁ भौतिक साधन
⦁ मानवीय साधन तथा
⦁ सार्वजनिक साधन।

8.

कुशलता तथा योग्यता कैसे साधन हैं?

Answer»

सही उत्तर है मानवीय साधन

9.

गृह व्यवस्था के साथ गृहिणी समय का ठीक उपयोग कैसे करती है?

Answer»

अच्छी गृहिणी घर के सारे कार्य को योजनाबद्ध ढंग से करती है। वह कार्य करने के लिए समय सारिणी निश्चित करती हैं तथा घर के सभी सदस्यों को कार्य इसी सारिणी के अनुसार करने के लिए प्रेरित करती है। घर के भिन्न-भिन्न कार्य सदस्यों में बाँट देती है। इस प्रकार सभी कार्य समयानुसार निपट जाते हैं तथा समय भी बच जाता है।

10.

गृह-व्यवस्था को अर्थ स्पष्ट कीजिए।

Answer»

गृह-व्यवस्था को अर्थ–घर-परिवार में उपलब्ध साधनों के सदुपयोग के लिए उचित निर्णय लेना तथा लिए गए निर्णय के आधार पर परिवार के स्वीकृत लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध साधनों का सदुपयोग करना।

11.

घर की अव्यवस्था या व्यवस्था के अभाव से होने वाली हानियों का उल्लेख कीजिए।

Answer»

गृह-व्यवस्था हर प्रकार से लाभदायक एवं महत्त्वपूर्ण होती है। इसके विपरीत यदि घर में अव्यवस्था या व्यवस्था का अभाव हो, तो विभिन्न प्रकार की हानियाँ हो सकती हैं। घर की अव्यवस्था से होने वाली मुख्य हानियाँ निम्नलिखित हैं

(1) कुशलता की कमी हो जाती है:
यदि घर में समुचित व्यवस्था का अभाव हो, तो परिवार का कोई भी सदस्य अपने कार्य को कुशलतापूर्वक नहीं कर पाता। इस स्थिति में पारिवारिक कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पाते तथा परिवार की सुख-समृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है।

(2) सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि:
कार्यकुशलता का अभाव अथवा फूहड़पने समाज में परिवार की प्रतिष्ठा को गिराता है। फूहड़ स्त्री न तो समाज में सम्मान प्राप्त कर पाती है और न ही स्वयं अपने घर में। फूहड़पन से परिवार में कलह का वातावरण उत्पन्न होता है।

(3) धन एवं अन्य साधनों की बर्बादी:
अव्यवस्थित गृहिणियाँ पारिवारिक साधनों का अनुचित व अनावश्यक उपयोग करती हैं। ये आवश्यकता से अधिक भोजन बनाती हैं, जिससे इसकी बर्बादी होती है। इसी प्रकार अव्यवस्थित घर में अन्य खाद्य पदार्थों, वस्त्रों, सौन्दर्य प्रसाधन की सामग्रियों आदि की बर्बादी होती है। अव्यवस्थित गृहिणियाँ पारिवारिक बजट नहीं बनातीं, जिसके फलस्वरूप धन का अपव्यय होता है तथा परिवार कभी भी आर्थिक सुदृढ़ता नहीं प्राप्त कर पाता है।

(4) स्वास्थ्य की हानि:
गृह-व्यवस्था के अभाव में कुछ गृहिणियाँ भोजन एवं पोषण का आवश्यक ध्यान नहीं रखतीं, जिसके फलस्वरूप परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। स्वच्छता के अभाव में अव्यवस्थित घर में विभिन्न प्रकार के रोगाणु पनपते रहते हैं जो कि विभिन्न प्रकार के रोग उत्पन्न करते हैं।

(5) दुर्घटनाएँ:
आजकल घरों में विद्युत-चलित विभिन्न उपकरण, कुकिंग गैस व विभिन्न प्रकार की जटिल मशीनों एवं यन्त्रों का उपयोग किया जाता है। सुचारु गृह-व्यवस्था के अभाव में गृहिणी की थोड़ी-सी असावधानी किसी भी छोटी अथवा बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। एक अव्यवस्थित घर में इस प्रकार की घटनाएँ प्रायः होती रहती हैं।

(6) पारिवारिक समन्वय व अनुशासन का अभाव:
एक अव्यवस्थित परिवार के सदस्यों में पारस्परिक समन्वय का सदैव अभाव रहता है। सभी सदस्य नियोजन व नियन्त्रण के सिद्धान्तों को महत्त्व न देकर अपनी इच्छानुसार कार्य करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कार्यकुशलता का अभाव रहता है तथा पारिवारिक कलह का वातावरण बना रहता है।

12.

किसी गृहिणी को कुशल गृह-संचालन के लिए सर्वप्रथम क्या करना चाहिए?

Answer»

गृहिणी को परिवार में किए जाने वाले कार्यों की उपयुक्त योजना बनानी चाहिए।

13.

छोटे समय के लक्ष्य की उदाहरण दें।

Answer»

बच्चों को स्कूल भेजना

14.

दीर्घ समय के लक्ष्य की उदाहरण दें।

Answer»

सही उत्तर है मकान बनाना

15.

मकान बनाना किस अरसे का लक्ष्य है?

Answer»

सही उत्तर है लम्बे अरसे का

16.

अच्छे गृह प्रबन्धक में क्या गुण होने ज़रूरी हैं?

Answer»

अच्छा गृह प्रबन्ध गृह प्रबन्धक की योग्यता पर ही निर्भर करता है। गृह प्रबन्धक के गुण और अवगुण किसी घर को स्वर्ग बना सकते हैं और किसी को नरक। घर को सामाजिक गुणों का झूला कहा जाता है। प्रत्येक इन्सान का प्रारम्भिक व्यक्तित्व घर में ही बनता है। इसलिए घर का वातावरण बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। बढ़िया पारिवारिक व्यवस्था तथा वातावरण पैदा करने के लिए गृह प्रबन्धक में निम्नलिखित योग्यताओं या गुणों का होना आवश्यक है

  1. मानसिक गुण (Psychological Qualities)
  2. शारीरिक गुण (Physical Qualities)
  3. सामाजिक और नैतिक गुण (Social and Moral Qualities)
  4. ग्रहणशीलता (Adaptability)
  5. काम में कुशलता (Efficient Worker)
  6. तकनीकी गुण (Technical Qualities)
  7. बाह्य गुण (Outdoor Qualities)

1. मानसिक गुण (Psychological Qualities)

  1. बुद्धि (Intelligence) — सफल गृहिणी के लिए बुद्धि एक आवश्यक विशेषता है। किसी मुश्किल को अच्छी तरह समझने, पूरे हालात का जायजा लेने, पहले अनुभवों से हुई जानकारी को नई समस्या के समाधान के लिए प्रयोग कर उद्देश्यों की पूर्ति करना गृहिणी की बुद्धिमत्ता पर आधारित है।
  2. ज्ञान (Knowledge) — ज्ञान भी एक साधन है। यह साधन घर को अच्छी तरह चलाने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त यह हमें अन्य मानवीय और भौतिक साधनों के बारे में परिचित कराता है जोकि घरेलू उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक होता है।
  3. उत्साह (Enthusiasm) — उत्साह बढ़िया शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का सूचक है। एक सफल गृह प्रबन्धक के लिए यह गुण बहुत आवश्यक है। यदि गृहिणी घर के काम के लिए उत्साहित होगी तो परिवार के अन्य सदस्यों पर भी अच्छा प्रभाव होता है। वे भी काम में रुचि लेते हैं। उत्साह होने से प्रत्येक काम आसान लगता है और ज्ञान-इन्द्रियों की हरकत तेज़ हो जाती है।
  4. मानवीय स्वभाव को समझने का सामर्थ्य (Ability to Understand Human Nature) — परिवार के सभी सदस्यों के स्वभाव भिन्न-भिन्न होते हैं। इस कारण ही उनकी रुचियां और आवश्यकताएं भी भिन्न-भिन्न होती हैं। गृह प्रबन्धक को इन सबका ध्यान रखना चाहिए। परिवार के सदस्यों की रुचियों, योग्यताओं और आवश्यकताओं की जानकारी, योजना बनाने और काम के विभाजन में सहायक होती है।
  5. कल्पना शक्ति (Imagination) — गृह प्रबन्ध सम्बन्धी आयोजन के लिए रचनात्मक कल्पना शक्ति का होना आवश्यक गुण है। कल्पना शक्ति से गृहिणी योजना बनाते समय ही आने वाली समस्याओं को देख सकती है और उनका हल ढूंढने में सफल हो सकती है।
  6. निर्णय लेने की शक्ति (Decision Making Power) — गृह प्रबन्ध में निर्णय लेने का बहुत महत्त्व है। ठीक निर्णय लेना प्रबन्धक की दूर दृष्टि पर निर्भर करता है और इसके लिए अच्छे तजुर्बे की भी आवश्यकता होती है। इसलिए. गृह प्रबन्धक में निर्णय लेने की शक्ति एक आवश्यक विशेषता है।

2. शारीरिक गुण (Physical Qualities) — गृहिणी के लिए शारीरिक गुणों का होना भी बहुत आवश्यक है। यदि वह निरोग और तन्दुरुस्त होगी तो अपने घर के कार्यों और उद्देश्यों को और परिवार के सदस्यों की इच्छाओं की प्राप्ति उत्साहपूर्ण कर सकती है। तन्दुरुस्ती उसको काम के लिए उत्साहित करती है। बीमार और आलसी गृहिणी अपने परिवार के उद्देश्यों की प्राप्ति में पूर्ण सफल नहीं हो सकती।

3. सामाजिक और नैतिक गुण (Social and Moral Qualities) — परिवार समाज की प्रारम्भिक इकाई है और इन्सान समाज में रहना, सामाजिक और नैतिक गुण परिवार में से ही ग्रहण करता है।

  1. दृढ़ता (Firmness) — जिस गृहिणी में यह गुण होता है वह अपने उद्देश्यों और इच्छाओं की प्राप्ति के लिए हमेशा यत्नशील रहती है। वह कठिनाइयों का बहुत हौसले और बहादुरी से सामना करने के योग्य होती है। इस गुण के परिणामस्वरूप ही वह अपने लिए गए निर्णयों की प्राप्ति के लिए हमेशा यत्नशील रहती है और सफलता प्राप्त करती है।
  2. सहयोग (Co-operation) — गृह प्रबन्धक के इस गुण से घर परिवार खुशहाल रहता है। सहयोग भाव एक दूसरे के काम करने, लेन-देन से आपसी निकटता बढ़ती है और गृहिणी का बोझ भी कम हो जाता है। सहयोग के कारण ही बहुत-से काम पूरे हो जाते हैं।
  3. प्यार, हमदर्दी और स्वःनियन्त्रण की भावना (Love, Sympathy and Self-Control) — प्यार, हमदर्दी से ही गृहिणी दूसरों का सहयोग प्राप्त कर सकती है और बच्चों के लिए आदर्श बन सकती है। एक समझदार गृहिणी में बातचीत करने के ढंग, बच्चों या छोटों को प्यार, बड़ों का सत्कार और दुःखियों से हमदर्दी होनी चाहिए। वह अपने गुणों के कारण ही परिवार की सुख-शान्ति बनाए रख सकती है।
  4. सहनशक्ति और धैर्य (Tolerance and Patience) — गृहिणी के मानवीय स्वभाव को समझते हुए सहनशक्ति और धैर्य से काम लेना चाहिए ताकि परिवार में आपसी मतभेद और तनाव पैदा न हो। परिवार में कोई दुःखदायक घटना घटने पर धीरज और हौसला रखकर शेष सदस्यों को भी धैर्य देना चाहिए ताकि परिवार संकटमयी समय से आसानी से निकल सके।

4. ग्रहणशीलता (Adaptability) — ग्रहणशीलता के गुण से गृहिणी दूसरों के ज्ञान और तजुर्बे से लाभ उठाकर अपने घर-प्रबन्ध के काम को और भी बढ़िया ढंग से चला सकती है। वैसे भी समाज परिवर्तनशील है, इसलिए गृहिणी की योजना इतनी लचकदार होनी चाहिए कि वह बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी योजना और अपने आपको ढाल सके। परिस्थितियां और मानवीय आवश्यकताएं रोजाना परिवर्तित होती रहती हैं। यदि वह बदलती आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल सके तभी वह आगे बढ़ सकती है।

5. काम में कुशलता (Efficient Worker) — घर का बढ़िया गृह प्रबन्ध, गृहिणी की काम में कुशलता पर निर्भर करता है। इससे काम कम समय में, कम थकावट से और अच्छे ढंग से करके खुशी मिलती है। पर यह सब तभी हो सकता है यदि गृहिणी में सिलाई, कढ़ाई, खाना बनाने, परोसने और घर की सजावट आदि के गुण होंगे।

17.

रिक्त स्थान भरें………. ही गृह विज्ञान का आधार है।मकान बनाना ……….. समय का लक्ष्य है।शक्ति एक ……… साधन है।बच्चे को डॉक्टर अथवा इन्जीनियर बनाना ……. समय का लक्ष्यसमय, पैसा तथा जायदाद (सम्पत्ति) ………. साधन हैं।योग्यता, रुचि तथा कुशलता ………….. साधन हैं।बढ़िया गृह व्यवस्था से ……….. संतोष की प्राप्ति होती है।प्यार, हमदर्दी, सहयोग आदि गृह प्रबन्धक के …… गुण हैं।

Answer»
  1. गृह व्यवस्थ,
  2. लम्बे,
  3. भौतिक,
  4. लम्बे,
  5. भौतिक,
  6. मानवी,
  7. मानसिक,
  8. सामाजिक तथा नैतिक।
18.

गृह-व्यवस्था का अर्थ है(क) घर के सभी कार्यों को योजना बनाकर करना(ख) घर की आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना(ग) पारिवारिक साधनों का उपयोग करना(घ) पारिवारिक जीवन को व्यवस्थित ढंग से चलाना।

Answer»

सही विकल्प है (घ) पारिवारिक जीवन को व्यवस्थित ढंग से चलाना।

19.

गृह-व्यवस्था के कुशल संचालन में किन-किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है? समझाइए।

Answer»

गृह-व्यवस्था के कुशल संचालन में बाधाएँ
निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि घर-परिवार की सुख-समृद्धि तथा उत्तम जीवन के लिए गृह-व्यवस्था आवश्यक है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक परिवार चाहता है कि सुचारू गृह-व्यवस्था को लागू किया जाए, परन्तु चाहते हुए भी अनेक बार व्यवहार में उत्तम गृह-व्यवस्था को लागू कर पाना सम्भव नहीं हो पाता। इसका मुख्य कारण है-गृह-व्यवस्था को लागू करने के मार्ग में उत्पन्न होने वाली विभिन्न बाधाएँ। इस प्रकार की मुख्य बाधाओं का संक्षिप्त विवरण निम्नवर्णित है|

(1) साधनों के ज्ञान का अभाव:
परिवार के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के साधनों की आवश्यकता होती है। अतः गृहिणी को विभिन्न साधनों तथा उनकी उपयोगिता का ज्ञान होना चाहिए। इस ज्ञान के अभाव में गृहिणी गृह-व्यवस्था का कुशल संचालन नहीं कर सकती।

(2) लक्ष्यों के ज्ञान का अभाव:
गृह-व्यवस्था का कुशल संचालन करने के लिए गृहिणी को परिवार के लक्ष्यों की पूरी जानकारी नहीं होती है। फलतः ऐसे परिवार गृह-व्यवस्था लागू करने में असमर्थ होते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि गृहिणी को गृह-व्यवस्था का कुशल संचालन करने के लिए लक्ष्यों का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए।

(3) कार्य-कुशलता का निम्न स्तर:
उत्तम गृह-व्यवस्था के लिए एक निश्चित स्तर की कार्य-कुशलता भी आवश्यक होती है। वास्तव में, पर्याप्त मात्रा में साधन उपलब्ध होने पर भी समुचित कार्य-कुशलता के अभाव में, गृह-व्यवस्था को बनाए रखना सम्भव नहीं होता। उदाहरण के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य-सामग्री उपलब्ध होने पर भी यदि गृहिणी पाक-क्रिया में कुशल नहीं है, तो वह अपने परिवार को स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्द्धक भोजन प्रदान नहीं कर सकती। स्पष्ट है कि कार्य-कुशलता का निम्न स्तर भी गृह-व्यवस्था के मार्ग में एक मुख्य बाधक सिद्ध होता है।

(4) विभिन्न घरेलू समस्याएँ:
विभिन्न घरेलू समस्याएँ भी गृह-व्यवस्था के मार्ग में बाधक सिद्ध होती हैं। यदि परिवार की समस्याएँ विकराल एवं गम्भीर रूप धारण कर लें, तो स्थिति बिगड़ जाती है। ऐसे में समस्याओं का समाधान भी मुश्किल हो जाता है तथा गृह-व्यवस्था बनाए रखना भी कठिन हो जाता है। उदाहरण के लिए-निरन्तर रहने वाली पारिवारिक कलह, पति-पत्नी का गम्भीर मन-मुटाव या संयुक्त परिवार के सदस्यों में संघर्ष आदि कुछ ऐसे कारक होते हैं, जो उत्तम गृह-व्यवस्था के मार्ग में बाधक सिद्ध होते हैं।

20.

अच्छी गृह व्यवस्था का महत्त्व विस्तारपूर्वक बताएं।

Answer»

अच्छी गृह व्यवस्था का महत्त्व इस प्रकार है:

  1. घर को सुन्दर तथा खुशहाल बनाना-अच्छी गृह व्यवस्था से घर सुन्दर, खुशहाल, सजीला बन जाता है। बेशक साधन सीमित हों तो भी घर को सुन्दर, बढ़िया
    तथा सुखी बनाया जा सकता है। प्रत्येक सदस्य अपनी बुद्धि विवेक के अनुसार घर
    की खुशहाली में योगदान डालता है।
  2. पारिवारिक स्तर को ऊँचा उठाना-गृह व्यवस्था अच्छी हो तो पारिवारिक स्तर ऊँचा उठाने में सहायता मिलती है। घर में ही मनुष्य को अपनी सफलता के लिए सीढ़ी का पहला सोपान प्राप्त होता है जिस पर चढ़ कर वह सफलता प्राप्त कर सकता है।
  3. व्यक्तित्व का विकास-यदि घर की व्यवस्था अच्छी हो तो मनुष्य घर में सुख, आनन्द की प्राप्ति कर लेता है तथा सन्तुलित रहता है। ऐसे आनन्ददायक तथा सुखी वातावरण का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है तथा उसका सर्वपक्षीय विकास होता है। घर से ही बच्चों में किसी काम को करने की लगन लगती है। बहुत से महान् कलाकारों को यह वरदान घर से ही प्राप्त हुआ है।
  4. समय का उचित प्रयोग-समय एक ऐसा सीमित साधन है जिसे बचाया नहीं जा सकता। इसलिए समय का उचित प्रयोग करके कार्य को सरल बनाया जा सकता है। गृह व्यवस्था अच्छे ढंग से की जाए तो घर के सभी कार्य समय पर निपट जाते हैं। अच्छी गृहिणी परिवार के सदस्यों को एक समय सारणी में ढाल लेती है तथा घर के काम परिवार के सदस्यों में बांट देती है। प्रत्येक सदस्य अपनी सामर्थ्य अनुसार काम करता है तथा घर में खुशी बनी रहती है।
  5. मानसिक सन्तोष-जब गृह व्यवस्था अच्छी हो तो मानसिक सन्तोष की प्राप्ति होती है। घर के लक्ष्य बहुत ऊँचे न हों तथा गृह व्यवस्था अच्छी हो तो लक्ष्यों की प्राप्ति सरलता से हो जाती है। इस प्रकार मानसिक सन्तुष्टि मिलती है।
21.

अच्छी गृह व्यवस्था का क्या महत्त्व है?

Answer»

परिवार की सुख-शान्ति और खुशहाली के लिए अच्छी गृह व्यवस्था का होना आवश्यक है। निम्नलिखित कारणों के कारण अच्छी व्यवस्था हमारी ज़िन्दगी के लिए और भी महत्त्वपूर्ण बन जाती है

  1. घर को खूबसूरत और खुशहाल बनाना-अच्छी गृह व्यवस्था से ही घर अधिक सुन्दर, सजीला और खुशहाल हो सकता है। यदि व्यवस्था अच्छी हो तो कम साधनों से भी परिवार खुशी और उन्नति प्राप्त कर सकता है।
  2. स्वास्थ्य सम्भाल-अच्छी गृह व्यवस्था में गृह परिवार के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा रह सकता है। सन्तुलित खुराक, सफ़ाई आदि एक अच्छी व्यवस्था वाले घर में प्राप्त होती है।
  3. अच्छी गृह व्यवस्था में ही बच्चों का उचित मानसिक विकास होता है तथा वे अपनी पढ़ाई और कैरियर में उच्च मंज़िलें प्राप्त करते हैं।

इनके अतिरिक्त परिवार को आनन्दमयी बनाना, साधनों का सही प्रयोग और आपसी प्यार एक अच्छी व्यवस्था में ही सम्भव हो सकता है।

22.

परिवार के साधनों को मुख्य रूप से कौन-से दो भागों में बांटा जा सकता है?

Answer»

परिवार के साधनों को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जा सकता है

  1. मानवीय साधन जैसे काम करने की योग्यता, कुशलता और स्वास्थ्य।
  2. भौतिक साधन जैसे समय, पैसा, जायदाद आदि।
23.

लक्ष्यों को किस्म के अनुसार कितने भागों में बांटा जा सकता है?

Answer»

दो भागों में व्यक्तिगत लक्ष्य तथा पारिवारिक लक्ष्य।