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This section includes 7 InterviewSolutions, each offering curated multiple-choice questions to sharpen your Current Affairs knowledge and support exam preparation. Choose a topic below to get started.

1.

भारवि किससे तलवार लेकर आया था? 

Answer»

भारवि मित्र विजयघोष से तलवार लेकर आया था।

2.

‘प्रतिशोध’ एकांकी के एकांकीकार का नाम लिखिए।

Answer»

‘प्रतिशोध’ एकांकी के एकांकीकार डॉ. रामकुमार वर्मा हैं।

3.

शास्त्रार्थ में पंडितों को हराते देख पिता ने भारवि के बारे में क्या सोचा?

Answer»

शास्त्रार्थ में पंडितों को हराते देख पिता ने भारवि के बारे में सोचा कि पंडितों की हार से उसका अहंकार बढ़ता जा रहा है। उसे अपनी विद्वता का घमंड हो गया है। उसका गर्व सीमा को पार कर रहा है। भारवि आज संसार का श्रेष्ठ महाकवि है। दूर-दूर के देशों में उसकी समानता करने वाला कोई नहीं है।
उसने शास्त्रार्थ में बड़े से बड़े पण्डितों को पराजित किया है। उसका पांडित्य देखकर पिता को बहुत प्रसन्नता होती है। पर भारवि के मन में धीरे-धीरे अहंकार बढ़ता जा रहा है। पिता चाहते हैं कि भारवि और भी अधिक पंडित और महाकवि बने। पर अहंकार उन्नति में बाधक है। इसलिए पिता ने अहंकार पर अंकुश रखना चाहा। जिसे अपने पांडित्य का अभिमान हो जाता है वह अधिक उन्नति नहीं कर सकता। इसी कारण से पिता भारवि को समय-समय पर मूर्ख और अज्ञानी कहते हैं। पिता नहीं चाहते हैं कि अहंकार के कारण उसके पुत्र की उन्नति रुक जाये।

4.

भारवि के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा अपराध क्या है?

Answer»

भारवि के अनुसार जीवन का सबसे बड़ा अपराध जीवन को चिंता में घुलाना, पाप में लपेटना और दुःख में बिलखाना है।

5.

पितृ-हत्या का दण्ड क्या नहीं है?

Answer»

पितृ-हत्या का दण्ड प्रतिशोध या पुत्र-हत्या नहीं है।

6.

भारवि ने प्रतिशोध की आग में क्या करना चाहा?

Answer»

भारवि ने प्रतिशोध की आग में पिता की हत्या करना चाहा।

7.

संस्कृत के महापंडित कौन हैं?

Answer»

संस्कृत के महापंडित भारवि के पिता श्रीधर हैं।

8.

भारवि किस महाकाव्य की रचना कर महाकवि भारवि बने?

Answer»

भारवि ‘किरातार्जुनीयम’ महाकाव्य की रचना कर महाकवि भारवि बने।

9.

भारवि अपने पिता से क्यों बदला लेना चाहता था?

Answer»

भारवि के पिता श्रीधर भरी सभा में उसका अपमान करते हैं। वहाँ बैठे हुए सभी पंडित भारवि के स्वर में ही बोलकर उसका परिहास करते हैं। इस बात को भारवि अपने दिल से लगा लेता है और उसके मन में यह बात घर कर जाती है कि पिता ने सब के सामने उसका अपमान किया। उनके रहते वह अपनी जिन्दगी में आगे नहीं बढ़ सकता। इस वजह से पिता के प्रति उसका क्रोध अंतिम सीमा तक पहुँच जाता है और वह अपने पिता से बदला लेना चाहता था।

10.

भारती और सुशीला के वार्तालाप को अपने शब्दों में लिखिए।

Answer»

भारती महाकवि भारवि के शास्त्रार्थ से प्रभावित होकर उनसे मिलने के लिए उनके घर आती है। भारवि उस समय घर पर नहीं थे। भारती ने सुशीला को बताया कि उसने भारवि को उषा बेला में मालिनी तट पर देखा था। उस समय भारवि ध्यान मग्न थे। उसने उनका ध्यान भग्न नहीं किया। श्रीधर ने भारती से कहा कि जैसे ही भारवी आएगा तुम्हें उसकी सूचना दे दी जाएगी। भारती ने कहा कि वह स्वयं अगले दिन सुबह आएगी।

11.

श्रीधर पंडित भारवि को खोजने के लिए किसका सहारा लेना चाहते थे?

Answer»

श्रीधर पंडित भारवि को खोजने के लिए राजकीय सहायता लेना चाहते थे।

12.

टिप्पणी लिखिए :१. आभा२. भारती

Answer»

१. आभा
‘आभा’ भारवि की सेविका है। जब सुशीला ने उससे पूछा कि आभा, भारवि नहीं आया? तो आभा ने कहा – अब तक कवि नहीं आये? मैं तो समझती थी कि वह इस समय तक आ गये होंगे। मैं अभी जाती हूँ, उन्हें खोजकर लाती हूँ। आप भोजन कर लीजिए। मुझे क्षमा करें। एक निवेदन और है – महाकवि से परिचित एक युवती प्रवेश चाहती है। वह स्वामी के दर्शन की अभिलाषा रखती है। ‘आभा’ सच्ची सेविका है।

२. भारती
भारती एक विदुषी है। भारती के हृदय में महाकवि भारवि के प्रति श्रद्धा की भावना है। वह सुशीला से कहती है कि वसंत ऋतु में कोकिल के स्वर से कौन परिचित नहीं? गत पूर्णिमा के पर्व में उन्होंने जो शास्त्रार्थ किया, वह बहुत महत्व का है। आज तक वेदान्त की इतनी सुन्दर मीमांसा मैंने नहीं सुनी, जैसी महाकवि भारवि के मुख से सुनी। वीणापाणि को भी ‘भारती’ ही कहते हैं। वे उस भारती की उपासना कर रहे थे। भारती सुशीला तथा श्रीधर का सम्मान करती है।

13.

भारवि ने अपने पिता से किस प्रकार का दण्ड चाहा और उसे क्या दण्ड मिला?

Answer»

भारवि बदले की आग में जलते हुए अपने पिता की हत्या करना चाहता था। पिता की प्रताड़ना के पीछे उनकी मंगलकामनाओं का पता चलने पर वह लज्जित हो गया। उसने पिता से तलवार से उसका मस्तक काटने को कहा जिससे उसकी ग्लानि भी कट जाए। पिता कहते हैं कि पितृ-हत्या का दंड पुत्र-हत्या नहीं है। वे भारवि को क्षमा कर देते हैं। भारवि कहता है कि पाप के लिए न सही, उसके प्रायश्चित के लिए भी तो कुछ व्यवस्था होनी चाहिए। वह कहता है कि यदि आप चाहते हैं कि आपका भारवि जीवित रहे तो उसे दंड दीजिए। उसके पिता उसे छः मास तक ससुराल में जाकर सेवा करने तथा जूठे भोजन पर अपना पोषण करने का दंड देते हैं।

14.

निम्नलिखित पात्रों का चरित्र-चित्रण कीजिए :१. महापंडित श्रीधर२. सुशीला३. महाकवि भारवि

Answer»

१. महापंडित श्रीधर
महापण्डित श्रीधर संस्कृत के महापण्डित थे। उनका पुत्र महाकवि था और वह शास्त्रार्थ में पण्डितों को पराजित करता चला जा रहा था। इससे उसका अहंकार बढ़ता जा रहा था। उसे अपनी विद्वता का घमंड हो गया था। श्रीधर अपने पुत्र को सही राह पर लाना चाहते थे। वे अपने पुत्र को ताड़ना देते हैं क्योंकि वे उसका भला चाहते हैं। अहंकार व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकता है। वे एक आदर्श पिता का फर्ज निभाते हुए अपने पुत्र को सही राह पर लाने के लिए ताड़ना देते हैं। उनका पुत्र उन्हें गलत समझता है लेकिन अपने पिता के उद्देश्य का पता चलने पर वह लज्जित हो जाता है। वह अपनी गलती के लिए प्रायश्चित करना चाहता है। इस तरह श्रीधर का चरित्र उच्च कोटि का है।

. सुशीला
सुशीला महापंडित श्रीधर की पत्नी तथा महाकवि भारवि की माता है। अपने विद्वान पुत्र पर पिता की तरह इसे भी गर्व है। वह अपने पुत्र भारवि के घर न लौटने के कारण दुःखी है। वह पुत्र शोक में सो नहीं पाती। वह मानती है कि यदि पुत्र के लिए माँ की ममता मूर्खता है तो ऐसी मूर्खता हमेशा बनी रहे। पति के समझाने पर भी पुत्र-मोह कम नहीं होता। पुत्र के व्यामोह में वह अपने पति से भी काफी वाद-विवाद करती है, परन्तु अपनी मर्यादा में रहकर, अपने पति-धर्म को निभाती है।

३. महाकवि भारवि
भारवि संस्कृत के महाकवि थे जो आगे चलकर ‘किरातार्जुनीयम’ महाकाव्य की रचना करते हैं। भारवि शास्त्रार्थ में पंडितों को पराजित कर रहे थे। उनके अंदर पंडितों की हार से अहंकार बढ़ता जा रहा था। उन्हें अपनी विद्वत्ता का घमंड होता जा रहा था। उनका गर्व सीमा का अतिक्रमण कर रहा था। उनके पिता श्रीधर भरी सभा में उन्हें ताड़ते हैं। भारवि उनसे बदला लेना चाहता है। जब भारवि को पिता का उनके प्रति मंगलकामना का पता चलता है तो वे विचलित हो जाते हैं। अपनी गलती पर पछताते हुए पिता से दण्ड माँगते हैं। इस तरह भारवि के चरित्र का पता चलता है कि उन्हें अपनी गलती का पछतावा है। वे पिता द्वारा दिए हुए दण्ड को सहर्ष स्वीकार करते हुए पालन करने की आज्ञा माँगते हैं।

15.

वसंत ऋतु में किसके स्वर से सभी परिचित हैं?

Answer»

वसंत ऋतु में कोकिल के स्वर से सभी परिचित हैं।

16.

भारवि से मिलने आयी स्त्री का नाम लिखिए।

Answer»

भारवि से मिलने आई स्त्री का नाम भारती है।

17.

ब्रह्म ज्ञान किसकी वीणा पर नृत्य करने के समान था?

Answer»

ब्रह्मज्ञान सरस्वती की वीणा पर नृत्य करने के समान था।

18.

श्रीधर पंडित के घर की सेविका का नाम लिखिए।

Answer»

श्रीधर पंडित के घर की सेविका का नाम आभा है।

19.

भारवि से संबंधित माता-पिता के बीच होने वाले प्रारंभिक संवाद का सार लिखिए।

Answer»

भारवी से संबंधित माता-पिता के बीच होनेवाला प्रारंभिक संवाद इस प्रकार से है – भारवि के पिता श्रीधर अपनी पत्नी सुशीला को वेद सुना रहे हैं। सुशीला का ध्यान कहीं और है क्योंकि अभी तक उसका पुत्र घर नहीं आया। श्रीधर कहते हैं कि भारवि शास्त्रार्थ में पण्डितों को पराजित करता जा रहा था और इस वजह से उसका घमण्ड बढ़ता जा रहा था। मैंने उसे ताड़ना दी क्योंकि मैं चाहता था कि मेरा पुत्र सुमार्ग पर चले। इसके लिए कभी-कभी ताड़ना अनिवार्य हो जाती है। सुशीला कहती है कि माँ के हृदय को शास्त्रार्थ के नियमों में नहीं बाँधा जा सकता।

20.

पंडित किस प्रकार भारवि का परिहास करने लगे?

Answer»

पंडित भारवि की ओर देखकर, उनके स्वर में ही बोलकर वे उसका परिहास करने लगे और ताली पीटने लगे।

21.

सुशीला किसके लिए बेचैन है?

Answer»

सुशीला अपने बेटे भारवि के न आने से बेचैन है।

22.

सुशीला के अनुरोध पर श्रीधर ने भारवि को कहाँ-कहाँ और कैसे तलाश करने का वचन दिया?

Answer»

जब पुत्र भारवि वापस नहीं लौटा तो माता सुशीला बहुत चिंतित हो गई। बार-बार अपने पुत्र की खोज के लिए पति श्रीधर से आग्रह करने लगी। श्रीधर हिम्मत करते हुए कहते हैं कि पुत्र तो है ही, किन्तु वह संसार का जनक भी है। अपनी कल्पना से वह न जाने कितने संसारों का निर्माण कर सकता है। श्रीधर उसे जनपदों से खोज लाने का वादा करते हैं, राजकीय सहायता लेकर उसको खोजने की बात करते है। सुशीला को शांत रहने के लिए कहते हैं।

23.

श्रीधर पंडित का पुत्र क्या नहीं हो सकता?

Answer»

श्रीधर पंडित का पुत्र इतना पतित नहीं हो सकता।

24.

भारवि के पिता को किसके पांडित्य को देखकर प्रसन्नता होती थी?

Answer»

भारवि के पांडित्य को देखकर उसके पिता को हार्दिक प्रसन्नता होती थी।

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